लद्दाख में 10,600 फीट की ऊंचाई पर उच्च-ऊंचाई पुष्प-कृषि की नई पहल
लद्दाख के लेह जिले में 10,600 फीट की ऊंचाई पर चोगलम्सर और स्टकना में 40 एकड़ क्षेत्र में दो पुष्प-कृषि क्षेत्र विकसित किए गए हैं, जिनमें 25 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। परियोजना में मुख्य रूप से 24 लाख लिलियम और 1 लाख ग्लैडियोलस के पौधे शामिल हैं तथा चोगलम्सर में एक मॉडल पुष्प-कृषि केंद्र विकसित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय किसानों की आय में विविधीकरण, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना तथा SHGs एवं सहकारी समितियों को फूलों की खेती और विपणन से जोड़ना है। यह परियोजना उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल कृषि, कृषि मूल्य श्रृंखला और व्यावसायिक पुष्प-कृषि की संभावनाओं का अभिनव उदाहरण प्रस्तुत करती है।
लद्दाख के लेह जिले में लगभग 10,600 फीट की ऊंचाई पर चोगलम्सर और स्टकना में दो पुष्प-कृषि क्षेत्र विकसित किए गए हैं। इन दोनों क्षेत्रों का कुल विस्तार लगभग 40 एकड़ है और यहां 25 लाख से अधिक फूलों के पौधे लगाए गए हैं। परियोजना का उद्घाटन 17 सितंबर 2026 को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा किया गया। यह उच्च हिमालयी क्षेत्र में व्यावसायिक पुष्प-कृषि को बढ़ावा देने का एक अभिनव प्रयास है।
परियोजना में लिलियम और ग्लैडियोलस की खेती:
इन पुष्प-कृषि क्षेत्रों में मुख्य रूप से लिलियम और ग्लैडियोलस की खेती की जा रही है। परियोजना में लगभग 24 लाख लिलियम तथा 1 लाख ग्लैडियोलस पौधे शामिल हैं। चोगलम्सर में लिलियम, ग्लैडियोलस, ट्यूलिप तथा अन्य सजावटी फूलों की प्रजातियों के लिए प्रदर्शन एवं मॉडल केंद्र विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य लद्दाख की विशिष्ट जलवायु परिस्थितियों में वैज्ञानिक पुष्प-कृषि की संभावनाओं को प्रदर्शित करना है।
किसानों की आय में विविधीकरण:
इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य स्थानीय किसानों के लिए पुष्प-कृषि को आय के वैकल्पिक स्रोत के रूप में विकसित करना है। लद्दाख में सीमित कृषि योग्य भूमि और कठोर जलवायु के कारण कृषि गतिविधियों का विविधीकरण महत्वपूर्ण है। प्रशासन पहले चरण में खेती और प्रबंधन करेगा तथा फूलों के खिलने के बाद चयनित स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी समितियों को इससे जोड़ा जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, उद्यमिता और आय के अवसर बढ़ सकते हैं।
मूल्य श्रृंखला और बाजार से जुड़ाव:
परियोजना केवल फूल उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कटाई, विपणन और मूल्य संवर्धन को भी इसमें शामिल किया गया है। प्रारंभिक चरण के बाद सहकारी समितियां फूलों की खेती, कटाई और मूल्यवर्धन की जिम्मेदारी संभालेंगी। घरेलू और संभावित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सजावटी फूलों की मांग को देखते हुए यह पहल लद्दाख में कृषि-आधारित मूल्य श्रृंखला (Agricultural Value Chain) विकसित करने में सहायक हो सकती है।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कृषि नवाचार:
चोगलम्सर फ्लावर क्षेत्र को लगभग दो महीने में विकसित किया गया। यहां रोपण 16 जुलाई 2026 से शुरू हुआ और सितंबर के शुरुआती सप्ताह में फूल खिलने लगे। स्टकना में अगस्त 2026 में लगभग 14 लाख लिलियम बल्ब लगाए गए, जिनके अक्टूबर के अंत तक खिलने की उम्मीद है। यह परियोजना दर्शाती है कि वैज्ञानिक तकनीक, उपयुक्त फसल चयन और स्थानीय जलवायु के अनुकूल कृषि पद्धतियों के माध्यम से उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी कृषि विविधीकरण संभव है।
UPSC के लिए महत्व:
यह समाचार कृषि विविधीकरण, पर्वतीय कृषि, जलवायु-अनुकूल कृषि, ग्रामीण आजीविका, स्वयं सहायता समूह, सहकारी संस्थाओं, कृषि मूल्य श्रृंखला और सतत विकास से जुड़ा है। UPSC में इसे GS-III के अंतर्गत “कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में कृषि विकास और किसानों की आय में विविधीकरण” के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही, लद्दाख की उच्च ऊंचाई, शुष्क ठंडी जलवायु, सीमित कृषि भूमि और हिमालयी पारिस्थितिकी को कृषि एवं पर्यावरणीय दृष्टिकोण से जोड़कर समझना उपयोगी होगा।