दक्षिणी रेलवे का 100% विद्युतीकरण: 5,068 किमी ब्रॉड गेज नेटवर्क हुआ इलेक्ट्रिक
दक्षिणी रेलवे ने अपने 5,068 किमी लंबे संपूर्ण ब्रॉड गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा कर लिया है, जिससे यह 100% विद्युतीकृत हो गया। अंतिम 71 किमी पट्टुकोट्टई–कराइकुडी खंड का विद्युतीकरण 9 सितंबर 2026 को वैधानिक निरीक्षण के बाद पूरा हुआ और इसमें 25 kV AC ट्रैक्शन का उपयोग किया गया। विद्युतीकरण से डीजल-इलेक्ट्रिक इंजन बदलने की आवश्यकता कम होगी तथा गति, परिचालन दक्षता और ऊर्जा उपयोग में सुधार हो सकता है। यह उपलब्धि डीजल निर्भरता और उत्सर्जन घटाने, हरित परिवहन तथा भारत के Net-Zero 2070 लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
दक्षिणी रेलवे ने अपने 5,068 किलोमीटर लंबे संपूर्ण ब्रॉड गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। यह भारतीय रेलवे के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अंतिम शेष 71 किमी लंबे पट्टुकोट्टई–कराइकुडी खंड का वैधानिक निरीक्षण 9 सितंबर 2026 को पूरा होने के बाद दक्षिणी रेलवे का पूरा ब्रॉड गेज नेटवर्क विद्युत कर्षण के लिए सक्षम हो गया।
पट्टुकोट्टई–कराइकुडी खंड बना अंतिम कड़ी
अंतिम खंड में Overhead Electrical Equipment (OHE) की स्थापना और कमीशनिंग की गई। इसके बाद प्रधान मुख्य विद्युत अभियंता द्वारा वैधानिक निरीक्षण किया गया। इस खंड में 25 kV AC traction system का उपयोग किया गया है। इसके पूरा होने से दक्षिणी रेलवे के सभी ब्रॉड गेज मार्गों पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन संभव हो गया है।
रेलवे विद्युतीकरण का ऐतिहासिक विकास
भारत में रेलवे विद्युतीकरण की शुरुआत लगभग एक सदी पहले हुई थी। दक्षिणी रेलवे के संदर्भ में 11 मई 1931 को मद्रास में विद्युत रेल सेवा की शुरुआत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर थी। बाद में 1968 में मद्रास बीच–तांबरम खंड को 25 kV AC प्रणाली से विद्युतीकृत किया गया। 2026 में अंतिम खंड के विद्युतीकरण के साथ दक्षिणी रेलवे की यह दीर्घकालिक प्रक्रिया पूर्ण हुई।
परिचालन दक्षता और गति में सुधार
विद्युतीकरण से ट्रेनों को मार्ग में डीजल से इलेक्ट्रिक इंजन बदलने की आवश्यकता कम या समाप्त होती है, जिससे परिचालन समय बच सकता है। इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बेहतर acceleration और regenerative braking जैसी तकनीकों के कारण परिचालन दक्षता बढ़ा सकते हैं। इससे यात्री और मालगाड़ी सेवाओं में समयबद्धता, क्षमता उपयोग और ऊर्जा दक्षता बेहतर करने में सहायता मिल सकती है।
ऊर्जा संक्रमण और पर्यावरणीय लाभ
रेलवे विद्युतीकरण भारत के कम-कार्बन परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से डीजल पर निर्भरता घटती है और रेलवे को अधिक स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों, विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा, के साथ जोड़ना आसान होता है। हालांकि वास्तविक उत्सर्जन लाभ बिजली उत्पादन के स्रोत पर भी निर्भर करते हैं। इस प्रकार रेलवे विद्युतीकरण को भारत के Net-Zero 2070 लक्ष्य और ऊर्जा संक्रमण के व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व
यह उपलब्धि आर्थिक अवसंरचना, सतत परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय शासन से जुड़ी है। UPSC में इसे भारतीय रेलवे का आधुनिकीकरण, Dedicated Freight Corridors, Multimodal Transport, Energy Efficiency, Electrification और Green Mobility से जोड़ा जा सकता है। विशेष रूप से यह समझना महत्वपूर्ण है कि रेलवे विद्युतीकरण से डीजल आयात पर निर्भरता कम करने, परिचालन लागत नियंत्रित करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और परिवहन क्षेत्र के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में सहायता मिल सकती है।