ग्लॉ झील बनी भारत का 101वाँ रामसर स्थल: पूर्वी हिमालय की आर्द्रभूमि संरक्षण को मिली वैश्विक मान्यता
अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील (Glow Lake) को भारत का 101वाँ रामसर स्थल घोषित किया गया है, जिससे यह राज्य का पहला रामसर स्थल बन गया है। कामलांग टाइगर रिजर्व में स्थित यह प्राकृतिक मीठे पानी की आर्द्रभूमि पूर्वी हिमालय की समृद्ध जैव विविधता, जल संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। रामसर अभिसमय (1971) का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों का संरक्षण एवं उनका सतत उपयोग सुनिश्चित करना है। ग्लॉ झील को यह दर्जा मिलने से जैव विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन तथा स्थानीय समुदायों की सतत आजीविका को बढ़ावा मिलेगा।
अरुणाचल प्रदेश स्थित ग्लॉ झील (Glow Lake) को भारत का 101वाँ रामसर स्थल (Ramsar Site) घोषित किया गया है। इसकी घोषणा 3 अगस्त 2026 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की। इसके साथ ही ग्लॉ झील अरुणाचल प्रदेश का पहला रामसर स्थल बन गई है। यह मान्यता भारत की आर्द्रभूमि संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।
ग्लॉ झील का भौगोलिक एवं पारिस्थितिक महत्व
ग्लॉ झील कामलांग टाइगर रिजर्व एवं वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत पूर्वी हिमालय क्षेत्र में स्थित एक प्राकृतिक मीठे पानी (Freshwater Wetland) की आर्द्रभूमि है। यह झील वर्षभर बहने वाली जलधाराओं से पोषित होती है तथा घने वनों से घिरी हुई है। इसका पारिस्थितिक तंत्र जल संरक्षण, जलवायु संतुलन तथा वन्यजीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जैव विविधता की दृष्टि से महत्व
ग्लॉ झील पूर्वी हिमालय के अत्यंत समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है। यहाँ 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियाँ तथा 49 ऑर्किड (Orchid) प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह आर्द्रभूमि अनेक स्थानीय (Endemic) एवं संकटग्रस्त वनस्पतियों तथा जीवों के लिए प्राकृतिक आवास प्रदान करती है। इस प्रकार यह क्षेत्र पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने तथा आनुवंशिक विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) क्या है?
रामसर अभिसमय (Convention on Wetlands) वर्ष 1971 में ईरान के रामसर नगर में अपनाई गई एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य विश्व की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों का संरक्षण एवं सतत उपयोग (Conservation and Wise Use of Wetlands) सुनिश्चित करना है। भारत इस अभिसमय का संविदात्मक पक्ष (Contracting Party) है तथा देश में रामसर स्थलों की संख्या बढ़ाकर आर्द्रभूमि संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।
रामसर स्थल का महत्व
रामसर स्थल का दर्जा किसी आर्द्रभूमि की अंतरराष्ट्रीय पारिस्थितिक महत्ता को मान्यता देता है। इससे जैव विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन (Climate Resilience), कार्बन भंडारण, बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण तथा स्थानीय समुदायों की सतत आजीविका को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, यह वैज्ञानिक अनुसंधान, पारिस्थितिक पर्यटन तथा संरक्षण आधारित विकास को भी प्रोत्साहित करता है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह विषय GS Paper-III (Environment, Biodiversity, Conservation, Climate Change) तथा प्रारंभिक परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभ्यर्थियों को रामसर अभिसमय, रामसर स्थल के चयन के मानदंड, राष्ट्रीय आर्द्रभूमि संरक्षण कार्यक्रम, पूर्वी हिमालय जैव विविधता हॉटस्पॉट, कामलांग टाइगर रिजर्व, Wetlands (Conservation and Management) Rules, 2017 तथा भारत के प्रमुख रामसर स्थलों का समग्र अध्ययन करना चाहिए। यह विषय प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार—तीनों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
