15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के पासपोर्ट की वैधता में संशोधन
विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 के तहत 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साधारण पासपोर्ट की वैधता संबंधी नियमों में बदलाव किया है। नए नियम के अनुसार, ऐसे पासपोर्ट 5 वर्ष या बच्चे के 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, वैध रहेंगे। यह संशोधन पासपोर्ट नियम, 1980 के नियम 12(1A) से संबंधित है और केवल 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साधारण पासपोर्ट पर लागू होगा। आयु-आधारित वैधता से नाबालिगों के पासपोर्ट संबंधी प्रशासनिक प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए दस्तावेजी आवश्यकताओं को अधिक स्पष्ट किया गया है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 के माध्यम से 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को जारी किए जाने वाले साधारण पासपोर्ट की वैधता से संबंधित प्रावधान में बदलाव किया है। यह अधिसूचना 17 सितंबर 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित की गई। संशोधन पासपोर्ट नियम, 1980 के नियम 12(1A) से संबंधित है।
नई वैधता अवधि क्या होगी:
संशोधित व्यवस्था के अनुसार, 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे को जारी साधारण पासपोर्ट 5 वर्ष या बच्चे के 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक—जो भी पहले हो—वैध रहेगा। इसका उद्देश्य नाबालिगों के पासपोर्ट की वैधता को उनकी आयु के साथ स्पष्ट रूप से जोड़ना है।
आयु-आधारित वैधता को समझना:
नई व्यवस्था में पासपोर्ट की वैधता निर्धारित करने के लिए दो सीमाएं महत्वपूर्ण हैं—5 वर्ष की अवधि और 18 वर्ष की आयु। उदाहरण के लिए, यदि किसी बच्चे को 14 वर्ष की आयु में पासपोर्ट जारी किया जाता है, तो सामान्यतः पांच वर्ष की अवधि 19 वर्ष की आयु तक जाती, लेकिन संशोधित प्रावधान के तहत पासपोर्ट 18 वर्ष की आयु पर ही समाप्त हो जाएगा। इस प्रकार दोनों में से जो सीमा पहले आएगी, वही अंतिम वैधता होगी।
किन पासपोर्ट पर लागू होगा:
यह प्रावधान विशेष रूप से 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को जारी साधारण पासपोर्ट पर लागू होता है। इसलिए इसे सभी पासपोर्ट धारकों की सामान्य वैधता में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पासपोर्ट व्यवस्था में नाबालिगों के लिए अलग प्रावधान होने का प्रमुख कारण उनकी आयु, पहचान और व्यक्तिगत विवरण में समय के साथ होने वाले परिवर्तनों को ध्यान में रखना है।
प्रशासनिक एवं नागरिक सुविधा का महत्व:
नाबालिगों के दस्तावेजों में आयु बढ़ने के साथ फोटोग्राफ, व्यक्तिगत पहचान और अन्य विवरण में परिवर्तन की आवश्यकता हो सकती है। आयु-आधारित वैधता व्यवस्था इस प्रशासनिक आवश्यकता के अनुरूप है। इससे अभिभावकों के लिए बच्चे के पासपोर्ट की वैधता को समझना आसान होगा और अंतरराष्ट्रीय यात्रा की योजना बनाते समय दस्तावेजों की समयसीमा स्पष्ट रहेगी। पासपोर्ट भारत में विदेश यात्रा के लिए प्रमुख आधिकारिक दस्तावेज है और इसकी व्यवस्था विदेश मंत्रालय के अधीन संचालित होती है।
UPSC के लिए महत्व:
यह समाचार शासन एवं प्रशासन, नागरिक सेवाएँ, विदेश मंत्रालय, पासपोर्ट व्यवस्था और कार्यपालिका द्वारा नियमों में संशोधन जैसे विषयों से संबंधित है। UPSC में इससे पूछा जा सकता है कि Passport Rules, 1980 किस प्रकार पासपोर्ट जारी करने की प्रशासनिक व्यवस्था को नियंत्रित करते हैं तथा अधीनस्थ/प्रत्यायोजित विधि-निर्माण के माध्यम से नियमों में कैसे संशोधन किए जाते हैं। अभ्यर्थियों को यह भी समझना चाहिए कि भारत का पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी आधिकारिक दस्तावेज है।