कर्नाटक ने 15 सितंबर को आधिकारिक ‘इंजीनियर्स डे’ घोषित किया, इंजीनियरों को ‘Er.’ उपसर्ग की अनुमति
कर्नाटक सरकार ने 15 सितंबर को आधिकारिक ‘इंजीनियर्स डे’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया और इंजीनियरों को नाम के आगे ‘Er.’ उपसर्ग लगाने की अनुमति दी। 15 सितंबर भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती है, जिन्हें 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। विश्वेश्वरैया ने मैसूर के दीवान (1912–1918) के रूप में सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, जल संसाधन और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा KRS बांध से जुड़े रहे। यह निर्णय इंजीनियरिंग पेशे की पहचान को बढ़ावा देने के साथ तकनीकी मानव संसाधन, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में इंजीनियरों की भूमिका को रेखांकित करता है।
कर्नाटक सरकार ने 15 सितंबर को राज्य में आधिकारिक रूप से ‘इंजीनियर्स डे’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। 15 सितंबर को भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती के अवसर पर देशभर में इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। कर्नाटक सरकार के आदेश में इंजीनियरों के नाम के आगे ‘Er.’ उपसर्ग के प्रयोग की अनुमति भी दी गई है।
सर एम. विश्वेश्वरैया और इंजीनियर्स डे:
सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (M. Visvesvaraya) प्रसिद्ध भारतीय सिविल इंजीनियर, प्रशासक और राष्ट्र-निर्माण से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व थे। उनकी जयंती 15 सितंबर को भारत में इंजीनियर्स डे के रूप में मनाई जाती है। उन्हें राष्ट्र निर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र में योगदान के लिए 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
विश्वेश्वरैया का इंजीनियरिंग एवं प्रशासन में योगदान:
विश्वेश्वरैया ने मैसूर के दीवान के रूप में 1912 से 1918 तक कार्य किया। वे जल संसाधन प्रबंधन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और औद्योगिक विकास से संबंधित परियोजनाओं के लिए प्रसिद्ध रहे। कृष्ण राजा सागर (KRS) बांध से उनका महत्वपूर्ण संबंध रहा। हैदराबाद में बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था और विशाखापत्तनम बंदरगाह को कटाव से बचाने संबंधी कार्यों में भी उनका योगदान रहा।
‘Er.’ उपसर्ग का महत्व:
कर्नाटक के नए निर्णय के तहत इंजीनियरिंग पेशेवरों को अपने नाम से पहले ‘Er.’ लिखने की अनुमति दी गई है। इसका उद्देश्य इंजीनियरिंग पेशे की पेशेवर पहचान और सामाजिक मान्यता को बढ़ावा देना है। राज्य सरकार ने इंजीनियरों के योगदान को राष्ट्र के विकास और आर्थिक प्रगति से जोड़ते हुए इस पहचान को औपचारिक मान्यता दी है।
कर्नाटक का इंजीनियरिंग एवं तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र:
कर्नाटक, विशेषकर बेंगलुरु, भारत के प्रमुख प्रौद्योगिकी और अनुसंधान केंद्रों में शामिल है। राज्य में इंजीनियरिंग शिक्षा, अनुसंधान, IT, स्टार्टअप और तकनीकी उद्योगों का व्यापक नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में राज्य स्तर पर इंजीनियर्स डे की औपचारिक मान्यता तकनीकी मानव संसाधन, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में इंजीनियरों की भूमिका को रेखांकित करती है।
UPSC के लिए महत्व:
यह समाचार GS Paper-I के भारतीय व्यक्तित्व एवं आधुनिक भारत के विकास, तथा GS Paper-III के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार और मानव संसाधन से जोड़ा जा सकता है। UPSC के लिए सर एम. विश्वेश्वरैया के योगदान के साथ जल संसाधन प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, इंजीनियरिंग एवं सतत अवसंरचना जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं। यह उदाहरण यह भी दर्शाता है कि तकनीकी विशेषज्ञता किस प्रकार अवसंरचना निर्माण और सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान करती है।