कांडला में 150 TPD ई-मेथनॉल संयंत्र की योजना, भारत में हरित शिपिंग ईंधन को मिलेगा बढ़ावा
गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह पर 150 TPD ई-मेथनॉल संयंत्र स्थापित करने की योजना है, जिसे DPA और APCL मिलकर विकसित करेंगे। लगभग ₹2,300 करोड़ की यह परियोजना दो चरणों में पूरी होगी और DPA तथा APCL की प्रस्तावित निवेश हिस्सेदारी 76:24 होगी। ई-मेथनॉल हरित हाइड्रोजन और CO₂ से उत्पादित कम-कार्बन ईंधन है, जिसका उपयोग विशेष रूप से ग्रीन शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन में किया जा सकता है। यह परियोजना राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से जुड़कर नवीकरणीय ऊर्जा → हरित हाइड्रोजन → ई-मेथनॉल → हरित शिपिंग की एकीकृत मूल्य शृंखला विकसित करने में सहायक होगी।
गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह पर प्रतिदिन 150 टन (TPD) ई-मेथनॉल उत्पादन क्षमता वाला बंदरगाह-आधारित संयंत्र विकसित करने की योजना है। यह परियोजना दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (APCL) के सहयोग से प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में कम-कार्बन एवं वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना है।
परियोजना का निवेश एवं चरणबद्ध विकास:
लगभग ₹2,300 करोड़ की परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में 50 TPD तथा दूसरे चरण में अतिरिक्त 100 TPD उत्पादन क्षमता स्थापित की जाएगी। परियोजना में DPA और APCL की निवेश भागीदारी का अनुपात 76:24 प्रस्तावित है। DPA बंदरगाह संबंधी बुनियादी ढाँचा, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और ईंधन प्रबंधन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराएगा, जबकि APCL उत्पादन इकाई विकसित करेगी।
ई-मेथनॉल का महत्व:
ई-मेथनॉल (Electro-methanol) मुख्यतः हरित हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड के संयोजन से उत्पादित किया जाता है तथा इसके उत्पादन में नवीकरणीय बिजली का उपयोग किया जा सकता है। यह उन क्षेत्रों के लिए संभावित कम-कार्बन ईंधन है जहां प्रत्यक्ष विद्युतीकरण कठिन है। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी, भारी परिवहन और रासायनिक उद्योग में इसका उपयोग जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में सहायक हो सकता है।
ग्रीन शिपिंग एवं मेथनॉल बंकरिंग:
दीनदयाल बंदरगाह में पहले से ही मेथनॉल बंकरिंग अवसंरचना विकसित की जा रही है। अप्रैल 2026 में बंदरगाह पर जहाज तक मेथनॉल ईंधन स्थानांतरण का प्रदर्शन किया गया। ऐसी व्यवस्था भविष्य में मेथनॉल-आधारित या dual-fuel जहाजों को ईंधन उपलब्ध कराने में सहायक होगी। कांडला की पश्चिमी तट पर रणनीतिक स्थिति इसे एशिया-यूरोप समुद्री व्यापार मार्ग के लिए महत्वपूर्ण बना सकती है।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से संबंध:
दीनदयाल बंदरगाह को National Green Hydrogen Mission के तहत विकसित किए जा रहे संभावित ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में भी देखा जा रहा है। बंदरगाह परिसर में हरित हाइड्रोजन उत्पादन की क्षमता तथा हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्धता, ई-मेथनॉल जैसी downstream green-fuel परियोजनाओं के लिए आधार तैयार करती है। इससे Renewable Energy → Green Hydrogen → E-methanol → Green Shipping जैसी एकीकृत मूल्य शृंखला विकसित की जा सकती है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व:
यह परियोजना ऊर्जा संक्रमण, हरित हाइड्रोजन, समुद्री परिवहन का डीकार्बोनाइजेशन और Blue Economy के बीच संबंध को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। UPSC में इसे GS Paper-3—पर्यावरण, ऊर्जा, बुनियादी ढाँचा और सतत विकास से जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा, असम की पेट्रोकेमिकल विशेषज्ञता और गुजरात के बंदरगाह अवसंरचना का संयोजन सहकारी संघवाद, क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और Green Growth का उदाहरण प्रस्तुत करता है। ई-मेथनॉल के व्यापक उपयोग के लिए हरित बिजली की उपलब्धता, CO₂ का टिकाऊ स्रोत, उत्पादन लागत, बंकरिंग अवसंरचना और वैश्विक समुद्री ईंधन मानकों जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
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