18वां BRICS शिखर सम्मेलन: रामनाथस्वामी मंदिर की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को मिला वैश्विक मंच
भारत ने 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें वैश्विक शासन, बहुपक्षवाद, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और सुरक्षा पर चर्चा हुई। BRICS नेताओं के स्वागत में रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम की पृष्ठभूमि का उपयोग भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और सॉफ्ट पावर को प्रदर्शित करता है। रामनाथस्वामी मंदिर भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और द्रविड़ स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है। BRICS भारत के लिए Global South की आवाज, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है।
भारत ने 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। शिखर सम्मेलन के दौरान उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच वैश्विक शासन, बहुपक्षवाद, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत के लिए यह सम्मेलन अपनी राजनयिक प्राथमिकताओं और वैश्विक नेतृत्व को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
रामनाथस्वामी मंदिर बना सांस्कृतिक आकर्षण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा BRICS नेताओं के स्वागत के दौरान रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम की पृष्ठभूमि का उपयोग किया गया। यह केवल सजावटी प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंच पर भारत की सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का माध्यम भी बनी। यह भारत की Cultural Diplomacy और Soft Power के उपयोग का उदाहरण है।
रामनाथस्वामी मंदिर का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व
तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित रामनाथस्वामी मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। मंदिर अपनी विशाल गलियारों (Corridors), स्तंभों और द्रविड़ स्थापत्य परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह मंदिर भारतीय कला, वास्तुकला और तीर्थ परंपरा की महत्वपूर्ण विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।
BRICS और समावेशी वैश्विक शासन
शिखर सम्मेलन में “Inclusive Global Governance and Multilateralism” जैसे विषयों पर चर्चा की गई। भारत BRICS के माध्यम से वैश्विक संस्थाओं में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण एवं न्यायसंगत भागीदारी की वकालत करता रहा है। यह मुद्दा विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में प्रतिनिधित्व और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने से संबंधित है।
BRICS भारत के लिए रणनीतिक महत्व
BRICS भारत को प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ आर्थिक, तकनीकी, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का मंच प्रदान करता है। भारत के लिए इसका महत्व केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह Global South की आवाज, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और रणनीतिक स्वायत्तता जैसे व्यापक विदेश नीति उद्देश्यों से भी जुड़ा है। शिखर सम्मेलन के दौरान भारत को विभिन्न देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता का अवसर भी मिला।
UPSC के लिए ‘सॉफ्ट पावर’ का महत्व
रामनाथस्वामी मंदिर को BRICS जैसे उच्चस्तरीय राजनयिक आयोजन की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत करना Soft Power Diplomacy का महत्वपूर्ण उदाहरण है। भारत योग, आयुर्वेद, बौद्ध विरासत, भारतीय भाषाओं, कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के माध्यम से अपनी वैश्विक छवि को मजबूत करता है। UPSC में इस घटना को Cultural Diplomacy + Soft Power + Civilizational Diplomacy + Global South + Multilateralism के परिप्रेक्ष्य में समझना उपयोगी होगा।