18वें BRICS शिखर सम्मेलन में ‘ग्लोबल साउथ’ और ठोस परिणामों पर भारत का जोर
नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के समापन पर भारत ने 2027 के 19वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए चीन को अध्यक्षता सौंपी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS में घोषणाओं के बजाय ठोस और परिणाम-आधारित सहयोग पर जोर दिया तथा Global South के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी अंतरराष्ट्रीय मामलों में BRICS की सक्रिय भूमिका और Global South के हितों के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने पर बल दिया। शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-चीन द्विपक्षीय वार्ता ने बहुपक्षीय सहयोग, रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक शासन के संदर्भ में BRICS के महत्व को रेखांकित किया।
नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2027 में 19वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए चीन को बधाई दी। BRICS की घूर्णनशील अध्यक्षता का हस्तांतरण भारत से चीन को किया गया। यह संगठन के भीतर नेतृत्व की निरंतरता और सदस्य देशों के बीच संस्थागत सहयोग को दर्शाता है।
घोषणाओं से आगे ‘ठोस परिणाम’ पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS अपने अस्तित्व के तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है और अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय समूह से केवल घोषणाओं एवं विचारों की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि ठोस और परिणाम-आधारित सहयोग चाहता है। यह दृष्टिकोण BRICS को वैश्विक आर्थिक एवं राजनीतिक चुनौतियों के समाधान के लिए अधिक प्रभावी मंच बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
ग्लोबल साउथ के हितों को प्राथमिकता
भारत ने BRICS के माध्यम से Global South के देशों के हितों और उनकी विकास संबंधी चुनौतियों को प्रमुखता दी। आपदा प्रबंधन, MSME, पर्यावरण, विकास और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया। भारत का प्रयास है कि BRICS केवल सरकारों का मंच न रहकर विकासशील देशों की वास्तविक आवश्यकताओं और आकांक्षाओं से जुड़े व्यापक सहयोग का माध्यम बने।
BRICS में जन-केंद्रित सहयोग की आवश्यकता
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS सहयोग को सरकारों तक सीमित रखने के बजाय उद्यमियों, किसानों, वैज्ञानिकों, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों तक विस्तारित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि BRICS की प्रमुख शक्ति उसकी विविधता में एकता और अलग-अलग परिस्थितियों वाले देशों के बीच सहयोग की क्षमता है।
चीन का Global South में BRICS की भूमिका बढ़ाने पर जोर
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी BRICS को Global South के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली अधिक प्रभावी शक्ति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सदस्य देशों से अंतरराष्ट्रीय मामलों में सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। इससे स्पष्ट होता है कि BRICS स्वयं को केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित न रखकर वैश्विक शासन व्यवस्था में अधिक प्रभावशाली भूमिका देने की दिशा में बढ़ रहा है।
भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में BRICS का महत्व
BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। भारत और चीन दोनों BRICS के महत्वपूर्ण सदस्य हैं और दोनों की Global South तथा बहुपक्षीय संस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे मंच बहुपक्षीय सहयोग के साथ-साथ द्विपक्षीय संवाद के अवसर भी प्रदान करते हैं। UPSC के लिए यह भारत की Strategic Autonomy, Multilateralism और Global South Diplomacy को समझने का महत्वपूर्ण उदाहरण है।