सार्वजनिक परीक्षा सुधार 2.0 (पीईआर 2.0)
Public Examination Reform 2.0 (PER 2.0) उच्च-दांव वाली भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं को Secure-by-Design बनाने के लिए एक End-to-End Examination Security Framework की अवधारणा है। इसका उद्देश्य प्रश्न निर्माण से लेकर परिणाम जारी होने तक प्रत्येक चरण में सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इसमें Chain of Custody, Role-Based Access, Biometric Authentication, Digital Watermarking और Activity Logging जैसे उपाय शामिल हैं। परीक्षा के बाद Statistical Analysis, Cyber Forensic Audit और Whistleblower Protection के माध्यम से Merit Integrity की रक्षा पर जोर दिया जाता है। संस्थागत जवाबदेही के लिए समयबद्ध Action Taken Report (ATR) और बाध्यकारी SOP आवश्यक हैं। आगे National Examination Integrity Framework के तहत समान सुरक्षा मानक, डेटा एन्क्रिप्शन, सुरक्षित प्रश्न बैंक रैंडमाइजेशन और त्वरित न्याय व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।
Public Examination Reform 2.0 उच्च-दांव वाली भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं के लिए End-to-End Examination Security Framework की अवधारणा है। इसका लक्ष्य पेपर लीक या अनियमितता के बाद कार्रवाई करने के बजाय परीक्षा प्रणाली को Secure-by-Design बनाना है। इसमें प्रश्न निर्माण से लेकर परिणाम जारी होने तक प्रत्येक चरण की सुरक्षा और जवाबदेही पर जोर है।
प्रश्नपत्र सुरक्षा और Chain of Custody
पेपर लीक का जोखिम केवल प्रश्नपत्र के परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रश्न निर्माण, मॉडरेशन, अनुवाद और डिजिटल स्टोरेज के स्तर पर भी हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञों की पृष्ठभूमि जांच, Conflict of Interest Declaration, सुरक्षित प्रश्न बैंक और प्रश्नपत्र की पूरी Chain of Custody सुनिश्चित करना आवश्यक है।
End-to-End Digital Monitoring
PER 2.0 में Role-Based Access, Biometric Authentication, Digital Watermarking और Activity Logging जैसे उपाय महत्वपूर्ण हैं। परीक्षा केंद्रों का तकनीक-आधारित आवंटन, CCTV निगरानी और डिजिटल सिस्टम का साइबर ऑडिट स्थानीय स्तर पर मिलीभगत तथा तकनीकी छेड़छाड़ के जोखिम को कम कर सकता है।
स्वतंत्र ऑडिट और Merit Integrity
परीक्षा के बाद केवल परिणाम घोषित करना पर्याप्त नहीं है। Statistical Analysis के माध्यम से असामान्य अंक-पैटर्न और संदिग्ध समूहों की पहचान, स्वतंत्र Cyber Forensic Audit तथा Whistleblower Protection जैसी व्यवस्थाएं आवश्यक हैं। इससे चयन प्रक्रिया की Merit Integrity और अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत होगा।
संस्थागत जवाबदेही और कानूनी सुधार
विभिन्न समितियों द्वारा दिए गए परीक्षा सुधारों को केवल सुझाव के रूप में नहीं छोड़ना चाहिए। समयबद्ध Action Taken Report (ATR), स्पष्ट जिम्मेदारी और बाध्यकारी SOP आवश्यक हैं। साथ ही Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के प्रभावी क्रियान्वयन से परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।
UPSC के लिए महत्व भारत को National Examination Integrity Framework विकसित करना चाहिए, जिसमें National Testing Agency, Union Public Service Commission, State PSCs और भर्ती बोर्डों के लिए समान न्यूनतम सुरक्षा मानक हों। Secure-by-Design, डेटा एन्क्रिप्शन, सुरक्षित प्रश्न बैंक रैंडमाइजेशन, बायोमेट्रिक सत्यापन, स्वतंत्र ऑडिट और त्वरित न्याय इसके प्रमुख घटक होने चाहिए।
