सेमीकॉन 2.0: भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर महाशक्ति बनाने की नई राष्ट्रीय पहल
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम को ₹1,27,500 करोड़ के बजट के साथ मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र बनाना है। यह योजना चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन (Fab), ATMP/OSAT, पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास (R&D), कौशल विकास तथा संपूर्ण सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसका लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी सेमीकंडक्टर उद्योग का विकास करना है। यह पहल AI, 5G, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, चिकित्सा उपकरण और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की तकनीकी एवं आर्थिक क्षमता को सुदृढ़ करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेमीकॉन 2.0 (Semicon 2.0) कार्यक्रम को मंजूरी दी है। इस योजना के लिए ₹1,27,500 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण (Fabrication), पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास (R&D), कौशल विकास तथा संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाकर भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
सेमीकॉन 2.0 क्या है?
सेमीकॉन 2.0, भारत सरकार का दूसरी पीढ़ी का सेमीकंडक्टर विकास कार्यक्रम है, जो Semicon 1.0 का उन्नत संस्करण है। इसका लक्ष्य केवल चिप निर्माण तक सीमित न रहकर चिप डिजाइन, वेफर निर्माण, ATMP/OSAT, पैकेजिंग, मशीनों एवं सामग्री का विकास, अनुसंधान तथा कुशल मानव संसाधन सहित पूरे सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र (Semiconductor Ecosystem) का विकास करना है।
योजना के प्रमुख उद्देश्य एवं रणनीतिक स्तंभ
सेमीकॉन 2.0 के अंतर्गत भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमता को मजबूत करना, नई फैब्रिकेशन (Fab) इकाइयों की स्थापना, ATMP/OSAT उद्योग का विस्तार, सेमीकंडक्टर निर्माण में प्रयुक्त मशीनों, रसायनों एवं सामग्रियों का स्वदेशी विकास, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना तथा कुशल कार्यबल तैयार करना प्रमुख लक्ष्य हैं। यह योजना भारत को आयात-निर्भरता से मुक्त कर आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर उद्योग विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भारत के लिए इसका महत्त्व
सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीक की आधारशिला हैं और इनका उपयोग मोबाइल फोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रिक वाहन (EV), 5G संचार, रक्षा उपकरण, चिकित्सा उपकरण, ऑटोमोबाइल तथा औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स में व्यापक रूप से होता है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हाल के व्यवधानों को देखते हुए भारत का अपना मजबूत सेमीकंडक्टर उद्योग विकसित करना आर्थिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व
यह विषय GS Paper-3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, औद्योगिक विकास, अर्थव्यवस्था, अनुसंधान एवं नवाचार) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। परीक्षा में सेमीकंडक्टर, Fab, ATMP, OSAT, आपूर्ति श्रृंखला, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI), डिजिटल अर्थव्यवस्था एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रश्न पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे भारत की तकनीकी प्रतिस्पर्धा और औद्योगिक नीति के संदर्भ में जोड़ा जा सकता है।
