मार्केट डिस्टॉर्शन परफॉर्मेंस इंडेक्स 2023: भारत ने 13 वर्षों में 25 स्थानों की छलांग लगाई
कॉम्पेटियर फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार मार्केट डिस्टॉर्शन परफॉर्मेंस इंडेक्स (MDPI) 2023 में भारत ने 2010 के 82वें स्थान से 57वें स्थान पर पहुँचकर 25 स्थानों का उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। यह सूचकांक देशों की प्रतिस्पर्धात्मकता, पारदर्शिता और निवेश-अनुकूल नीतियों का मूल्यांकन करता है। भारत की रैंकिंग में सुधार का श्रेय GST, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), नियामकीय सुधारों और व्यापार सुगमता उपायों को दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन सुधारों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है और भारत को अधिक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है।
कॉम्पेटियर फाउंडेशन (Competere Foundation) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट डिस्टॉर्शन परफॉर्मेंस इंडेक्स (Market Distortion Performance Index - MDPI) में भारत ने वर्ष 2010 के 82वें स्थान से 2023 में 57वें स्थान तक पहुँचकर 25 स्थानों का उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। रिपोर्ट में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तथा बाजार विकृतियों (Market Distortions) को कम करने के लिए किए गए संरचनात्मक सुधारों की सराहना की गई है।
मार्केट डिस्टॉर्शन परफॉर्मेंस इंडेक्स (MDPI) क्या है?
MDPI एक अंतरराष्ट्रीय सूचकांक है, जो यह आकलन करता है कि किसी देश में सरकारी नीतियाँ, नियम और संस्थागत ढाँचा बाजार को कितना प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाते हैं। इस रिपोर्ट का उद्देश्य बाजार में मौजूद विकृतियों (Distortions) की पहचान करना तथा सुधारों के प्रभाव का विश्लेषण करना है। इससे देशों की निवेश क्षमता और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता का तुलनात्मक मूल्यांकन किया जाता है।
मूल्यांकन के प्रमुख आधार
रिपोर्ट में देशों का मूल्यांकन तीन प्रमुख स्तंभों पर किया गया है— स्वामित्व अधिकारों का संरक्षण (Property Rights Protection), घरेलू प्रतिस्पर्धा (Domestic Competition) तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा (International Competition)। इन मानकों के माध्यम से कानूनी सुरक्षा, व्यापारिक स्वतंत्रता, नियामकीय पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा का स्तर तथा वैश्विक बाजारों में एकीकरण का आकलन किया जाता है।
भारत के सुधारों की प्रमुख भूमिका
भारत की रैंकिंग में सुधार का प्रमुख कारण पिछले एक दशक में लागू किए गए व्यापक आर्थिक सुधार हैं। इनमें वस्तु एवं सेवा कर (GST) के माध्यम से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का एकीकरण, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के जरिए ऋण समाधान प्रणाली को मजबूत करना, व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) हेतु नियामकीय सुधार तथा सीमा शुल्क एवं व्यापार सुविधा आधुनिकीकरण जैसे कदम शामिल हैं। इन सुधारों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाने और व्यापारिक लागत कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह रिपोर्ट भारत की आर्थिक सुधार प्रक्रिया, प्रतिस्पर्धात्मकता तथा निवेश-अनुकूल वातावरण को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। UPSC प्रारंभिक परीक्षा में GST, IBC, व्यापार सुगमता, आर्थिक सुधारों एवं संबंधित संस्थानों से जुड़े तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में आर्थिक सुधार, निवेश आकर्षण, नियामकीय सुधार, प्रतिस्पर्धा नीति तथा समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास के संदर्भ में इसका विश्लेषण महत्वपूर्ण रहेगा।
