संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2024-25: भारतीय प्रदर्शन कलाओं को राष्ट्रीय सम्मान
संगीत नाटक अकादमी ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए 7 अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) और 108 अकादमी पुरस्कार घोषित किए, यानी कुल 115 कलाकारों का चयन किया गया। संगीत नाटक अकादमी संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य एवं नाट्य अकादमी है, जो प्रदर्शन कलाओं के संरक्षण और संवर्धन का कार्य करती है। अकादमी रत्न इसका सर्वोच्च सम्मान है, जबकि पुरस्कारों में संगीत, शास्त्रीय एवं लोक नृत्य, रंगमंच, जनजातीय कला और कठपुतली जैसी विविध प्रदर्शन कलाएं शामिल हैं। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1952 से प्रदान किए जा रहे हैं और ये भारत की सांस्कृतिक विरासत, गुरु-शिष्य परंपरा तथा प्रदर्शन कलाओं में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करते हैं।
भारत में संगीत, नृत्य, रंगमंच और अन्य प्रदर्शन कलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए संगीत नाटक अकादमी ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए अकादमी फैलोशिप और पुरस्कारों की घोषणा की है। अकादमी की जनरल काउंसिल ने 7 प्रतिष्ठित कलाकारों को अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) तथा 108 कलाकारों को अकादमी पुरस्कार के लिए चुना है। इस प्रकार दोनों वर्षों के लिए कुल 115 कलाकारों का चयन हुआ है।
संगीत नाटक अकादमी क्या है?
संगीत नाटक अकादमी भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य एवं नाट्य अकादमी है और यह संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्य करती है। इसका उद्देश्य देश की प्रदर्शन कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना है। अकादमी के प्रमुख सम्मान अकादमी रत्न (Fellowship) और अकादमी पुरस्कार (Puraskar) हैं।
अकादमी रत्न और अकादमी पुरस्कार में अंतर
अकादमी रत्न संगीत नाटक अकादमी का सर्वोच्च सम्मान है। यह अत्यंत प्रतिष्ठित और सीमित सदस्यता वाला सम्मान है तथा किसी भी समय अधिकतम 40 फेलो हो सकते हैं। 2024-25 के लिए 7 नए फेलो चुने गए हैं। फेलो को ₹3 लाख की पुरस्कार राशि दी जाती है। वहीं अकादमी पुरस्कार प्रदर्शन कलाओं में निरंतर उच्च स्तर के विशिष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। इसके अंतर्गत संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक एवं जनजातीय कला, कठपुतली तथा प्रदर्शन कलाओं में समग्र योगदान/शोध जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
किन-किन कलाओं को सम्मानित किया जाता है?
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भारत की सांस्कृतिक विविधता और प्रदर्शन कला परंपराओं को व्यापक रूप से प्रतिनिधित्व देते हैं। प्रमुख क्षेत्रों में हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत, शास्त्रीय नृत्य, रंगमंच, लोक एवं जनजातीय संगीत/नृत्य/रंगमंच, कठपुतली कला तथा प्रदर्शन कलाओं में समग्र योगदान और छात्रवृत्ति शामिल हैं। इस प्रकार यह पुरस्कार केवल शास्त्रीय कलाओं तक सीमित न रहकर भारत की लोक एवं पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षण प्रदान करता है।
ऐतिहासिक एवं संवैधानिक-सांस्कृतिक महत्व
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1952 से प्रदान किए जा रहे हैं। हालांकि हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत के पुरस्कार 1951 में ही शुरू हो गए थे और उस समय इन्हें Presidential Awards कहा जाता था। अकादमी के गठन के बाद इन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के रूप में जाना गया। ये सम्मान भारत की प्रदर्शन कलाओं में उत्कृष्टता, दीर्घकालिक योगदान तथा गुरु-शिष्य परंपरा और कला-शिक्षण के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को मान्यता देते हैं।
UPSC के लिए परीक्षा उपयोगिता
यह समाचार GS Paper-I (भारतीय संस्कृति), Essay और Art & Culture आधारित प्रश्नों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत, लोक एवं जनजातीय कला, शास्त्रीय संगीत-नृत्य, सांस्कृतिक संस्थानों और सरकारी संरक्षण को समझा जा सकता है। UPSC में इसे “भारत की सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण में संस्थागत तंत्र की भूमिका” जैसे प्रश्नों से जोड़ा जा सकता है। साथ ही, संस्कृति और कला के संरक्षण के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान हस्तांतरण, कलाकारों की आजीविका तथा सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के पहलू भी महत्वपूर्ण हैं।
