भारतीय बंदरगाह अधिनियम 2025 के तहत चार बंदरगाहों को मिला ‘मेगा पोर्ट’ दर्जा
केंद्र सरकार ने भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025 की धारा 73 के तहत दीनदयाल, जवाहरलाल नेहरू, पारादीप और मुंद्रा पोर्ट को मेगा पोर्ट घोषित किया है। मेगा पोर्ट एक अतिरिक्त वर्गीकरण है, जिससे बंदरगाह की मूल Major या Non-Major Port की स्थिति नहीं बदलती। धारा 73 केंद्र सरकार को निर्धारित मानदंडों के आधार पर Major और अन्य पात्र बंदरगाहों को मेगा पोर्ट घोषित करने का अधिकार देती है। यह कदम EXIM व्यापार, लॉजिस्टिक्स, तटीय शिपिंग, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
केंद्र सरकार ने भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025 की धारा 73 के तहत दीनदयाल पोर्ट (कंडला), जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (न्हावा शेवा), पारादीप पोर्ट और मुंद्रा पोर्ट को मेगा पोर्ट के रूप में अधिसूचित किया है। भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025 का उद्देश्य बंदरगाहों से संबंधित कानून को समेकित करना, एकीकृत बंदरगाह विकास को बढ़ावा देना और भारत की तटरेखा का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
‘मेगा पोर्ट’ नया बंदरगाह प्रकार नहीं है:
मेगा पोर्ट एक अतिरिक्त वर्गीकरण है, न कि बंदरगाह की मूल कानूनी श्रेणी। अधिनियम की धारा 73(4) के अनुसार, मेगा पोर्ट घोषित होने के बाद भी बंदरगाह अपनी मूल स्थिति—Major Port या Port other than Major Port—को बनाए रखता है और उस पर संबंधित कानून लागू रहते हैं। इसलिए मुंद्रा पोर्ट का मेगा पोर्ट बनना उसे कानूनी रूप से Major Port में परिवर्तित नहीं करता।
मेगा पोर्ट घोषित करने का कानूनी आधार:
भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025 की धारा 73(1) केंद्र सरकार को राज्य सरकार से परामर्श के बाद मेगा पोर्ट के लिए मानदंड निर्धारित करने की शक्ति देती है। धारा 73(2) के तहत निर्धारित मानदंड पूरा करने वाले Major Port को तथा धारा 73(3) के तहत Major Port के अलावा अन्य पात्र बंदरगाह को भी मेगा पोर्ट घोषित किया जा सकता है। यह प्रावधान भारत के बंदरगाह क्षेत्र में क्षमता-आधारित वर्गीकरण और एकीकृत विकास को बढ़ावा देता है।
भारतीय बंदरगाह व्यवस्था में Major और Non-Major Ports:
भारत में Major Ports केंद्र के स्तर पर बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के प्रशासनिक ढांचे में आते हैं, जबकि Non-Major Ports सामान्यतः संबंधित राज्य सरकारों/State Maritime Boards के अधिकार क्षेत्र में होते हैं। मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में 14 Major Ports में से 12 operational हैं तथा लगभग 200 Non-Major Ports हैं। यह संघीय ढांचा भारत के समुद्री प्रशासन और तटीय राज्यों की भूमिका को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
समुद्री अर्थव्यवस्था के लिए महत्व:
बड़े और उच्च-क्षमता वाले बंदरगाह भारत के EXIM व्यापार, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक गलियारों, तटीय शिपिंग और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। मेगा पोर्ट की अवधारणा का संबंध बंदरगाहों की उच्च कार्गो-हैंडलिंग क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता से है। बेहतर पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से माल की आवाजाही अधिक कुशल बनाने, लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और भारत की समुद्री व्यापार क्षमता मजबूत करने में सहायता मिल सकती है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व:
यह विषय GS Paper-III—भारतीय अर्थव्यवस्था, अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स, तथा GS Paper-II—केंद्र-राज्य संबंध और शासन से जुड़ा है। विशेष रूप से याद रखें: Indian Ports Act, 2025 → धारा 73 → Mega Port notification; Mega Port ≠ अलग प्रकार का Port; Major/Non-Major status बरकरार रहता है। साथ ही इसे Sagarmala, port-led development, coastal shipping, maritime logistics और Blue Economy जैसे व्यापक विषयों से जोड़कर पढ़ना उपयोगी होगा।