उत्तर प्रदेश पूरक बजट 2026-27: पूंजीगत व्यय आधारित विकास मॉडल को गति
उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹59,019.54 करोड़ का पूरक बजट प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य विकास परियोजनाओं, आधारभूत संरचना और आर्थिक गतिविधियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करना है। बजट का 70.5% (₹41,620.04 करोड़) पूंजीगत व्यय पर केंद्रित है, जिससे सड़क, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक अवसंरचना को मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार से ₹11,240.97 करोड़ की सहायता प्राप्त होगी, जबकि राज्य पर वास्तविक अतिरिक्त वित्तीय भार ₹47,778.57 करोड़ रहेगा। संविधान के अनुच्छेद 115 के तहत प्रस्तुत यह पूरक बजट नई योजनाओं तथा अतिरिक्त व्यय की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रावधान है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹59,019.54 करोड़ का पूरक (Supplementary) बजट प्रस्तुत किया। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इसे विधानसभा में पेश किया। यह बजट राज्य के वार्षिक बजट ₹9,12,696.35 करोड़ का विस्तार है, जिसका उद्देश्य चल रही विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्त उपलब्ध कराना, आर्थिक गतिविधियों को गति देना तथा आधारभूत संरचना को मजबूत करना है।
पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर विशेष जोर
पूरक बजट का लगभग 70.5% (₹41,620.04 करोड़) पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किया गया है, जबकि 29.5% (₹17,399.50 करोड़) राजस्व व्यय के लिए रखा गया है। पूंजीगत व्यय से सड़क, औद्योगिक गलियारे, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण होता है, जिससे दीर्घकाल में आर्थिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है।
प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्र
इस पूरक बजट में औद्योगिक विकास, ग्रामीण अवसंरचना, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा तथा पंचायती राज संस्थाओं को अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। विशेष रूप से औद्योगिक अवसंरचना, ग्रामीण संपर्क, विद्युत वितरण प्रणाली, अस्पतालों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों तथा कृषि एवं डेयरी क्षेत्र के विकास पर बल दिया गया है। यह आवंटन समावेशी एवं संतुलित क्षेत्रीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता एवं राजकोषीय प्रबंधन
पूरक बजट में केंद्र सरकार से ₹11,240.97 करोड़ की सहायता प्राप्त होगी, जबकि राज्य के खजाने पर वास्तविक अतिरिक्त भार ₹47,778.57 करोड़ रहेगा। यह व्यवस्था सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना को दर्शाती है, जिसमें केंद्र और राज्य मिलकर विकास परियोजनाओं का वित्तपोषण करते हैं तथा राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने का प्रयास करते हैं।
पूरक बजट (Supplementary Budget) का महत्व
पूरक बजट वह अतिरिक्त वित्तीय प्रस्ताव होता है, जिसे सरकार वित्तीय वर्ष के दौरान तब प्रस्तुत करती है जब स्वीकृत वार्षिक बजट से अधिक धन की आवश्यकता होती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 115 के अंतर्गत अनुपूरक, अतिरिक्त एवं अधिक अनुदानों (Supplementary, Additional and Excess Grants) का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य नई योजनाओं, अप्रत्याशित व्यय अथवा चल रही परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना होता है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह विषय GS Paper-II (Governance & Public Policy) तथा GS Paper-III (Indian Economy, Public Finance, Infrastructure, Inclusive Growth) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभ्यर्थियों को वार्षिक बजट एवं पूरक बजट में अंतर, पूंजीगत एवं राजस्व व्यय, राजकोषीय संघवाद, सार्वजनिक वित्त प्रबंधन, अवसंरचना निवेश, पूंजीगत व्यय का आर्थिक विकास पर प्रभाव तथा संविधान के अनुच्छेद 112 और 115 का समग्र अध्ययन करना चाहिए। यह विषय प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार—तीनों के लिए उपयोगी है।
