जुलाई 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.45% — खाद्य कीमतों का दबाव
MoSPI के 12 अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति जून के 4.38% से बढ़कर जुलाई 2026 में 4.45% हो गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य कीमतों में वृद्धि रही। जुलाई में खाद्य मुद्रास्फीति 5.52% रही, जिसमें अदरक, लहसुन और प्याज की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई, जबकि आलू की कीमतों में गिरावट आई। ग्रामीण मुद्रास्फीति 4.84% रही, जो शहरी मुद्रास्फीति 3.96% से अधिक थी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों पर खाद्य महंगाई का अपेक्षाकृत अधिक दबाव दिखाई देता है। राज्यों में तेलंगाना में मुद्रास्फीति सर्वाधिक 6.32% रही, जबकि दिल्ली में यह 2.68% थी; यह क्षेत्रीय स्तर पर खाद्य आपूर्ति, कीमतों और उपभोग पैटर्न में अंतर को दर्शाता है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा 12 अगस्त 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) जून 2026 के 4.38% से बढ़कर जुलाई 2026 में 4.45% हो गई। यह वृद्धि मुख्यतः खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई। जुलाई के आंकड़े संशोधित CPI श्रृंखला, आधार वर्ष 2024=100 पर आधारित हैं।
खाद्य मुद्रास्फीति बनी प्रमुख वजह
जुलाई 2026 में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) आधारित खाद्य मुद्रास्फीति 5.52% रही, जो जून के 5.32% से अधिक है। अदरक की कीमतों में सालाना वृद्धि 50.41% से बढ़कर 83.62%, लहसुन में 17.93% से 35.36% और प्याज में 4.73% से 22.54% हो गई। इसके विपरीत, आलू की कीमतों में 16.56% की सालाना गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य मुद्रास्फीति के भीतर विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में अलग-अलग रुझान हो सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति का दबाव अधिक
जुलाई में ग्रामीण CPI मुद्रास्फीति 4.84% रही, जबकि शहरी मुद्रास्फीति 3.96% थी। ग्रामीण खाद्य मुद्रास्फीति 5.45% से बढ़कर 5.79% हो गई। ग्रामीण परिवारों के उपभोग में खाद्य पदार्थों का अपेक्षाकृत अधिक महत्व होने के कारण खाद्य कीमतों में वृद्धि का उनके वास्तविक उपभोग और क्रय शक्ति पर अधिक प्रभाव पड़ता है। UPSC में इसे inflation, rural demand और welfare के साथ जोड़कर पूछा जा सकता है।
अन्य उपभोग श्रेणियों में भी मूल्य दबाव
जुलाई 2026 में खाद्य एवं पेय पदार्थों की संयुक्त मुद्रास्फीति 5.24% रही। रेस्तरां एवं होटल सेवाओं में मुद्रास्फीति 7.72%, परिवहन में 4.43% तथा कपड़े एवं जूते में 3.38% रही। आवास क्षेत्र में यह अपेक्षाकृत कम 2.16% थी। विशेष रूप से चांदी के आभूषणों की मुद्रास्फीति 109.84% रही, हालांकि यह जून के 133.24% से कम थी। इससे पता चलता है कि headline CPI पर वस्तुओं और सेवाओं का प्रभाव समान नहीं होता।
राज्यों के बीच मुद्रास्फीति में बड़ा अंतर
5 मिलियन से अधिक आबादी वाले राज्यों में जुलाई 2026 में तेलंगाना में सबसे अधिक 6.32% मुद्रास्फीति दर्ज की गई। इसके बाद आंध्र प्रदेश 5.72%, तमिलनाडु 5.44%, मध्य प्रदेश 4.91% और कर्नाटक 4.89% रहे। दूसरी ओर, दिल्ली में मुद्रास्फीति 2.68% रही। महाराष्ट्र में यह 4.09%, जबकि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 4.74% रही। क्षेत्रीय अंतर स्थानीय खाद्य आपूर्ति, फसल कीमतों, उपभोग पैटर्न और अन्य राज्य-विशिष्ट आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित हो सकते हैं।
UPSC के लिए व्यापक महत्व
मुद्रास्फीति में यह वृद्धि RBI की मौद्रिक नीति, रेपो रेट, वास्तविक आय, उपभोग मांग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा से सीधे जुड़ी है। भारत में CPI मुद्रास्फीति को RBI के Flexible Inflation Targeting (FIT) ढांचे के तहत मौद्रिक नीति के प्रमुख आधार के रूप में देखा जाता है। इसलिए UPSC अभ्यर्थियों को केवल जुलाई की 4.45% दर याद करने के बजाय CPI बनाम WPI, Headline बनाम Core Inflation, CFPI, खाद्य मुद्रास्फीति के कारण, ग्रामीण-शहरी अंतर और मुद्रास्फीति नियंत्रण में RBI की भूमिका को आपस में जोड़कर पढ़ना चाहिए।
