उत्तर प्रदेश में पशुधन बीमा को नई दिशा — मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना 2026
उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने 6 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंजूरी दी, जिसके लिए वित्त वर्ष 2026-27 में ₹60 करोड़ का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85% राज्य सरकार और 15% लाभार्थी वहन करेगा तथा 2,28,350 पशुधन को बीमा सुरक्षा देने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू होगी और महामारी, प्राकृतिक आपदा एवं आकस्मिक घटनाओं से पशुधन की हानि के विरुद्ध आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी। इसका विशेष महत्व छोटे एवं सीमांत किसानों, भूमिहीन पशुपालकों और डेयरी संचालकों के लिए है; पुरानी ₹40,000–₹80,000 कवरेज राशियों को वर्तमान योजना की निश्चित सीमा नहीं माना जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने 6 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु ₹60 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों को पशुधन की मृत्यु अथवा गंभीर क्षति से उत्पन्न आर्थिक जोखिम से सुरक्षा प्रदान करना है। योजना का क्रियान्वयन पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा किया जाना है।
सरकार और लाभार्थी के बीच प्रीमियम का साझा वहन
योजना की प्रमुख विशेषता प्रीमियम-साझेदारी मॉडल है। इसके तहत बीमा प्रीमियम का 85% उत्तर प्रदेश सरकार और 15% लाभार्थी वहन करेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी पशु का लागू बीमा प्रीमियम ₹1,000 है, तो ₹850 सरकार और ₹150 लाभार्थी द्वारा दिया जाएगा। यह मॉडल पशुपालकों के लिए बीमा को अधिक किफायती बनाने तथा पशुधन क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास है।
2.28 लाख से अधिक पशुधन को बीमा सुरक्षा
वित्त वर्ष 2026-27 में योजना के तहत 2,28,350 पशुधन को बीमा कवरेज देने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 1,86,800 पशुधन सामान्य घटक तथा 41,550 पशुधन SCSP घटक के अंतर्गत लक्षित हैं। योजना को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने का प्रावधान किया गया है। इससे योजना का उद्देश्य केवल डेयरी व्यवसाय तक सीमित न रहकर ग्रामीण आजीविका और सामाजिक सुरक्षा के व्यापक ढांचे से जुड़ जाता है।
पशुधन जोखिमों से आर्थिक सुरक्षा
योजना के अंतर्गत निर्धारित शर्तों के अनुसार महामारी, प्राकृतिक आपदा और आकस्मिक घटनाओं के कारण पशुधन की मृत्यु से होने वाले आर्थिक नुकसान के विरुद्ध बीमा सुरक्षा दी जाएगी। मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत ढांचे में स्थायी विकलांगता की स्थिति में भी दावा प्रावधान का उल्लेख है। इस प्रकार योजना का महत्व केवल मुआवजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों के livelihood risk management का एक साधन है।
छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए विशेष महत्व
ग्रामीण भारत में पशुधन कृषि आय का पूरक स्रोत होने के साथ-साथ कई परिवारों के लिए नियमित आय, पोषण और आजीविका का आधार है। विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक और डेयरी संचालक पशुधन की अचानक मृत्यु से गंभीर आर्थिक संकट में आ सकते हैं। सब्सिडी वाले बीमा प्रीमियम के माध्यम से राज्य सरकार इन जोखिमों को कम करने का प्रयास कर रही है। UPSC के लिए इसे कृषि विविधीकरण, ग्रामीण रोजगार, पशुधन अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा से जोड़कर समझना महत्वपूर्ण है।
पुरानी बीमा राशि को वर्तमान योजना से न जोड़ें
UPSC अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पहले की पशुधन बीमा संबंधी सामग्री में गाय के लिए ₹40,000, भैंस के लिए ₹50,000 और कुछ विदेशी नस्लों के लिए ₹80,000 तक की बीमा राशि का उल्लेख मिलता था। लेकिन जुलाई 2026 में स्वीकृत नई राज्य योजना के संदर्भ में इन राशियों को सार्वभौमिक वर्तमान कवरेज सीमा नहीं माना जाना चाहिए, जब तक संबंधित सरकारी अधिसूचना या नीति दस्तावेज इसकी पुष्टि न करे। अतः परीक्षा की तैयारी में वर्तमान योजना के ₹60 करोड़ बजट, 85:15 प्रीमियम-साझेदारी और 2,28,350 पशुधन लक्ष्य को प्राथमिक तथ्य के रूप में याद रखना अधिक उपयुक्त है।
