मोबाइल फोन विनिर्माण योजना 2026: भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम
केंद्र सरकार ने 21 अगस्त 2026 को ₹62,500 करोड़ की पांच वर्षीय मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) की घोषणा की, जो 1 अप्रैल 2026 से वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य मोबाइल निर्माण का विस्तार, घरेलू मूल्यवर्धन बढ़ाना, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाना है। योजना में मोबाइल निर्माण और भारतीय ब्रांडों के लिए दो लक्षित खंड बनाए गए हैं तथा घरेलू घटकों की सोर्सिंग और अनुसंधान एवं डिजाइन के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है। नीति अवधि में लगभग ₹39 लाख करोड़ के मोबाइल उत्पादन और 60,000 नए प्रत्यक्ष रोजगार सृजन का अनुमान है, जिससे यह योजना आत्मनिर्भर भारत और रोजगार वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
केंद्र सरकार ने 21 अगस्त 2026 को मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) की घोषणा की। यह ₹62,500 करोड़ की पांच वर्षीय योजना है, जिसका उद्देश्य भारत को एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है। योजना के तहत उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन देकर मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।
योजना की अवधि और प्रमुख लक्ष्य
MPMS योजना 1 अप्रैल 2026 से वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी। इसका मुख्य उद्देश्य मोबाइल फोन विनिर्माण का विस्तार, घरेलू मूल्यवर्धन में वृद्धि और एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का विकास करना है। यह पहल इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूत करेगी।
योजना के दो लक्षित खंड
योजना को दो प्रमुख लक्षित खंडों में विभाजित किया गया है। Target Segment-1 (TS1) मोबाइल फोन निर्माण के लिए तथा Target Segment-2 (TS2) भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को प्रोत्साहित करने के लिए है। TS2 के आवेदकों के लिए एक वर्ष की प्रतीक्षा अवधि का प्रावधान किया गया है।
पात्रता और भारतीय स्वामित्व को प्रोत्साहन
यह योजना भारत में पंजीकृत मोबाइल फोन निर्माताओं तथा EMS कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी। कुछ शर्तों के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में न्यूनतम ₹10,000 करोड़ कारोबार वाली कंपनियां पात्र हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, 51% भारतीय स्वामित्व और कम से कम ₹1,000 करोड़ कारोबार वाली फर्मों के लिए भी पात्रता का प्रावधान है।
घरेलू घटकों के लिए 1.5% तक अतिरिक्त प्रोत्साहन
योजना के तहत घरेलू स्तर पर प्रमुख घटकों और उप-असेंबली की सोर्सिंग के लिए 1.5% तक अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके लिए एक वित्तीय वर्ष में उत्पादित कुल मोबाइल फोन इकाइयों में से 25% में स्थानीय स्तर पर निर्मित घटकों का उपयोग आवश्यक होगा। इसमें कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले असेंबली, यांत्रिक घटक और बैटरी सेल जैसे महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं।
रोजगार, उत्पादन और भारतीय ब्रांडों को बढ़ावा
MPMS के तहत भारतीय मोबाइल ब्रांडों को घरेलू अनुसंधान एवं विकास तथा उत्पाद डिजाइन के लिए 3% तक प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। नीति अवधि के दौरान भारत में कुल मोबाइल फोन उत्पादन लगभग ₹39 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इसके साथ ही लगभग 60,000 नए प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है, जिससे यह योजना रोजगार सृजन, विनिर्माण और आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण बन जाती है।
