इग नोबेल पुरस्कार 2026: असामान्य शोध से वैज्ञानिक जिज्ञासा और नवाचार को बढ़ावा
इग नोबेल पुरस्कार 2026 का 36वाँ समारोह 3 सितंबर को ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड में आयोजित हुआ, जिसमें असामान्य लेकिन विचारोत्तेजक वैज्ञानिक शोधों को सम्मानित किया गया। भारतीय वैज्ञानिकों सहित शोधकर्ताओं ने तिलचट्टे के पोषक प्रोटीन क्रिस्टलों पर शोध के लिए रसायन विज्ञान में पुरस्कार प्राप्त किया। मच्छर के मुखांगों से प्रेरित 3D-प्रिंटिंग तकनीक और मिट्टी के अध्ययन के लिए सूती अंडरवियर को दबाने जैसे अनोखे प्रयोग भी सम्मानित हुए। भौतिकी में द्रव गतिकी के आधार पर छींटे रहित मूत्रालय डिजाइन का अध्ययन किया गया, जो रोजमर्रा की समस्याओं में विज्ञान के उपयोग को दर्शाता है।
इग नोबेल पुरस्कार (Ig Nobel Prize) ऐसे वैज्ञानिक शोधों को सम्मानित करता है जो पहली दृष्टि में हास्यास्पद या असामान्य लग सकते हैं, लेकिन लोगों को हंसाने के बाद सोचने पर मजबूर करते हैं। इसका आयोजन विज्ञान एवं हास्य पत्रिका ‘Annals of Improbable Research’ द्वारा किया जाता है। वर्ष 2026 में इसका 36वाँ समारोह 3 सितंबर 2026 को ज्यूरिख कन्वेंशन सेंटर, स्विट्जरलैंड में आयोजित किया गया। रसायन विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, मृदा विज्ञान, भौतिकी और विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया।
रसायन विज्ञान: तिलचट्टे के ‘दूध’ पर शोध
2026 के उल्लेखनीय विजेताओं में भारतीय वैज्ञानिक भी शामिल रहे। संचारी बनर्जी, सुब्रह्मण्यम रामास्वामी और अन्य शोधकर्ताओं ने Diploptera punctata नामक जीवित बच्चे पैदा करने वाली तिलचट्टे की प्रजाति में पाए जाने वाले पोषक तत्वों से भरपूर प्रोटीन क्रिस्टलों का अध्ययन किया। ये क्रिस्टल प्रोटीन, लिपिड और शर्करा से बने होते हैं। शोध के अनुसार, इनमें समान मात्रा के स्तनधारी दूध की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक ऊर्जा हो सकती है। यह अध्ययन असामान्य जैविक प्रणालियों से पोषण एवं जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं को समझने की वैज्ञानिक संभावनाओं को दर्शाता है।
प्रौद्योगिकी: मच्छर के मुखांगों से प्रेरित तकनीक
एक अन्य पुरस्कार ऐसे शोध को दिया गया जिसमें मच्छरों के रक्त चूसने वाले मुखांगों को अत्यंत सूक्ष्म 3D-प्रिंटिंग नोजल के रूप में उपयोग करने की संभावना का अध्ययन किया गया। यह शोध बायोमिमिक्री (Biomimicry) की अवधारणा का उदाहरण है, जिसमें प्रकृति में मौजूद संरचनाओं और प्रक्रियाओं से प्रेरणा लेकर नई तकनीक विकसित की जाती है।
मृदा विज्ञान: मिट्टी में सूती अंडरवियर का प्रयोग
मृदा विज्ञान के शोधकर्ताओं ने 25 देशों में सूती अंडरवियर को मिट्टी में दबाकर मिट्टी में मौजूद जीवों और जैविक अपघटन की प्रक्रिया का अध्ययन किया। कपास जैसे जैविक पदार्थों के अपघटन की गति से मिट्टी की जैविक गतिविधि और सूक्ष्मजीवों की सक्रियता के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यह प्रयोग दिखाता है कि सरल और असामान्य दिखाई देने वाली विधियों का उपयोग मृदा स्वास्थ्य एवं पारिस्थितिकी तंत्र के अध्ययन में किया जा सकता है।
भौतिकी एवं द्रव गतिकी: छींटे रहित मूत्रालय
भौतिकी से संबंधित पुरस्कार में शोधकर्ताओं ने तरल के प्रभाव कोण (impact angle), द्रव गतिकी और छींटों का अध्ययन करके ऐसे मूत्रालय डिजाइन विकसित करने का प्रयास किया जिनमें तरल के छींटे कम हों। यह शोध Fluid Dynamics के व्यावहारिक उपयोग का उदाहरण है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व
इग नोबेल पुरस्कार का मूल संदेश यह है कि वैज्ञानिक जिज्ञासा किसी भी असामान्य प्रश्न से शुरू हो सकती है। 2026 के शोधों में जैव-प्रेरित तकनीक, पोषण विज्ञान, मृदा पारिस्थितिकी और द्रव गतिकी जैसे विविध क्षेत्रों का समावेश दिखाई देता है।