अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2026: साक्षरता को मानव सशक्तिकरण और सतत विकास का आधार
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस प्रत्येक वर्ष 8 सितंबर को UNESCO के नेतृत्व में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य साक्षरता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देना है। UNESCO ने 1966 में इसे घोषित किया और 1967 से यह दिवस मनाया जा रहा है, ताकि वैश्विक स्तर पर निरक्षरता की समस्या पर ध्यान दिया जा सके। आधुनिक समय में साक्षरता में डिजिटल, वित्तीय, स्वास्थ्य और मीडिया साक्षरता भी शामिल हो गई है, जबकि भारत में NEP 2020 और ULLAS जैसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। साक्षरता SDG-4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) से जुड़ी है और मानव पूंजी निर्माण, महिला सशक्तिकरण, रोजगार तथा सामाजिक-आर्थिक समानता को बढ़ावा देती है।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (International Literacy Day) प्रत्येक वर्ष 8 सितंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य साक्षरता के महत्व के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना तथा सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना है। यह दिवस UNESCO के नेतृत्व में मनाया जाता है और साक्षरता को व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता, सामाजिक भागीदारी तथा आर्थिक अवसरों से जोड़कर देखा जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की शुरुआत
UNESCO ने 1966 में 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस घोषित किया था। पहली बार इसे 1967 में मनाया गया। इसका उद्देश्य विश्वभर में निरक्षरता की समस्या पर ध्यान आकर्षित करना और सरकारों, शिक्षण संस्थानों तथा नागरिक समाज को साक्षरता के विस्तार के लिए प्रेरित करना था। यह दिवस शिक्षा को केवल पढ़ने-लिखने की क्षमता के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्ति के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के साधन के रूप में स्थापित करता है।
साक्षरता का बदलता स्वरूप
आज साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ना और लिखना नहीं रह गया है। डिजिटल युग में Digital Literacy, Financial Literacy, Health Literacy और Media Literacy भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। डिजिटल साक्षर व्यक्ति इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन सूचनाओं का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग कर सकता है। इसी प्रकार वित्तीय साक्षरता व्यक्ति को बचत, ऋण, बीमा और निवेश जैसे आर्थिक निर्णयों को समझने में सहायता करती है।
भारत के लिए साक्षरता का महत्व
भारत में साक्षरता मानव पूंजी निर्माण, महिला सशक्तिकरण, रोजगार, सामाजिक समानता और लोकतांत्रिक भागीदारी से सीधे जुड़ी है। शिक्षा का प्रसार गरीबी और सामाजिक बहिष्करण को कम करने में मदद करता है। भारत सरकार की National Education Policy (NEP) 2020 में Foundational Literacy and Numeracy (FLN) को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके अतिरिक्त ULLAS – Nav Bharat Saaksharta Karyakram वयस्क शिक्षा और कार्यात्मक साक्षरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
साक्षरता और सतत विकास लक्ष्य (SDGs)
साक्षरता का सीधा संबंध SDG-4: Quality Education (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) से है। गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा गरीबी कम करने, लैंगिक समानता बढ़ाने, बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त करने और रोजगार के अवसरों में सुधार करने में सहायक होती है। विशेष रूप से महिलाओं और वंचित समुदायों में साक्षरता बढ़ाने से अंतर-पीढ़ीगत गरीबी को कम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए साक्षरता केवल शिक्षा का विषय नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक-आर्थिक विकास का आधार है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व
UPSC अभ्यर्थियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस को शिक्षा, मानव पूंजी, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल विभाजन और SDGs से जोड़कर पढ़ना चाहिए। GS Paper-2 में इसे Social Justice और Education के अंतर्गत तथा निबंध में “शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का साधन है” जैसे विषयों के साथ जोड़ा जा सकता है। भारत के लिए आगे की चुनौती केवल साक्षरता दर बढ़ाना नहीं, बल्कि कार्यात्मक, डिजिटल, वित्तीय और गुणवत्तापूर्ण साक्षरता सुनिश्चित करना है, ताकि शिक्षा वास्तविक सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण में परिवर्तित हो सके।