भारत-अमेरिका ‘युद्ध अभ्यास 2026’ — रेगिस्तान से उच्च हिमालय तक संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण
भारत-अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ 9 सितंबर से 28 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य रक्षा सहयोग और Interoperability बढ़ाना है। इस वर्ष अभ्यास दो थिएटरों में हो रहा है—राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में रेगिस्तानी युद्ध और उत्तराखंड के औली में उच्च ऊंचाई वाले पर्वतीय युद्ध का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अभ्यास में लंबी दूरी की सटीक फायरिंग, सामरिक योजना, हवाई गतिशीलता, कमांड पोस्ट अभ्यास और Counter-Drone Operations पर जोर दिया जा रहा है। भारत Pinaka, K9 Vajra और M777, जबकि अमेरिका HIMARS और AH-64E Apache जैसी आधुनिक सैन्य प्रणालियों का उपयोग कर रहा है।
भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ का शुभारंभ 9 सितंबर 2026 को हुआ और यह 28 सितंबर 2026 तक चलेगा। यह भारत-अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग एवं Interoperability बढ़ाने वाला प्रमुख द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है। इस वर्ष अभ्यास का विशेष पहलू इसका दो-थिएटर प्रारूप है।
रेगिस्तान से उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र तक प्रशिक्षण
अभ्यास का पहला चरण राजस्थान के बीकानेर के पास स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया जा रहा है, जबकि दूसरा चरण उत्तराखंड के औली में होगा। इस प्रकार सैनिकों को एक ही अभ्यास में रेगिस्तानी युद्ध तथा उच्च ऊंचाई वाले पर्वतीय युद्ध दोनों परिस्थितियों में प्रशिक्षण प्राप्त होगा। यह भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों में सैन्य संचालन की क्षमता को मजबूत करता है।
प्रमुख प्रशिक्षण एवं युद्धक गतिविधियाँ
अभ्यास में सटीक एवं लंबी दूरी की फायरिंग, सामरिक योजना, कमांड पोस्ट अभ्यास, क्षेत्रीय प्रशिक्षण, हवाई गतिशीलता और पर्वतीय युद्ध पर जोर दिया जा रहा है। औली जैसे उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र में प्रशिक्षण से सैनिकों को कठिन पर्वतीय भूभाग में संचालन की वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव मिलता है। इसके अतिरिक्त Counter-Drone Operations भी अभ्यास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
भारत द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्रमुख हथियार
भारतीय सेना इस अभ्यास में आधुनिक हथियार प्रणालियों का उपयोग कर रही है, जिनमें Pinaka Multi-Barrel Rocket Launcher System, K9 Vajra Self-Propelled Howitzer और M777 Ultra-Light Howitzer प्रमुख हैं। इन प्रणालियों के प्रयोग से दोनों सेनाओं के बीच Long-Range Precision Fires तथा संयुक्त संचालन संबंधी क्षमताओं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
अमेरिकी सैन्य क्षमता एवं उपकरण
अमेरिकी सेना द्वारा HIMARS (High Mobility Artillery Rocket System) तथा AH-64E Apache Attack Helicopters जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। अभ्यास में अमेरिकी सेना की 11th Airborne Division और 3rd Multi-Domain Task Force की क्षमताएँ भी महत्वपूर्ण हैं। ये इकाइयाँ लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता, कमान एवं नियंत्रण तथा बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियानों में विशेषज्ञता रखती हैं।
UPSC के लिए व्यापक महत्व
‘युद्ध अभ्यास’ भारत-अमेरिका के बढ़ते Strategic Partnership और Defence Cooperation का महत्वपूर्ण उदाहरण है। दो अलग-अलग भौगोलिक थिएटरों में अभ्यास से दोनों सेनाओं की Interoperability, Jointness और Multi-Domain Operations क्षमता बढ़ती है। Counter-Drone Warfare का शामिल होना आधुनिक युद्ध में UAV और ड्रोन से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। UPSC में इससे भारत-अमेरिका रक्षा संबंध, सैन्य अभ्यास, आधुनिक युद्ध तकनीक, ड्रोन युद्ध, सीमा सुरक्षा, पर्वतीय युद्ध और रक्षा आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।