यूनेस्को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार 2026: समावेशी और बहुभाषी शिक्षा पर वैश्विक जोर
यूनेस्को ने 2026 के अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कारों के लिए कोलंबिया, लेबनान, मेक्सिको, नीदरलैंड्स, नाइजीरिया और थाईलैंड के छह कार्यक्रमों को सम्मानित किया। पुरस्कारों में किंग सेजोंग साक्षरता पुरस्कार मातृभाषा-आधारित शिक्षा और कन्फ्यूशियस साक्षरता पुरस्कार नवाचार एवं डिजिटल साक्षरता पर केंद्रित है। प्रत्येक विजेता को 30,000 अमेरिकी डॉलर, पदक और प्रमाण-पत्र/डिप्लोमा प्रदान किया गया। यूनेस्को के अनुसार, विश्व में 739 मिलियन से अधिक युवा एवं वयस्क बुनियादी साक्षरता से वंचित हैं, जिनमें लगभग 63% महिलाएं हैं।
यूनेस्को ने कोलंबिया, लेबनान, मेक्सिको, नीदरलैंड्स साम्राज्य, नाइजीरिया और थाईलैंड के छह साक्षरता कार्यक्रमों को 2026 के अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कारों से सम्मानित किया। पुरस्कार अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (8 सितंबर) के अवसर पर प्रदान किए गए। इस वर्ष की थीम “लोगों, ग्रह और समृद्धि के लिए साक्षरता” है। इसका प्रमुख उद्देश्य साक्षरता को अधिक समावेशी, बहुभाषी और सामाजिक रूप से प्रासंगिक बनाना है।
दो प्रमुख UNESCO Literacy Awards
2026 में छह कार्यक्रमों को दो पुरस्कार श्रेणियों के अंतर्गत सम्मानित किया गया—
यूनेस्को किंग सेजोंग साक्षरता पुरस्कार – मातृभाषा-आधारित साक्षरता को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों पर विशेष जोर।
यूनेस्को कन्फ्यूशियस साक्षरता पुरस्कार – नवाचार, डिजिटल साक्षरता तथा वयस्कों और स्कूल से बाहर युवाओं के लिए नए शिक्षण दृष्टिकोणों को प्रोत्साहित करता है।
दोनों पुरस्कारों के प्रत्येक विजेता को 30,000 अमेरिकी डॉलर, पदक और प्रमाण-पत्र/डिप्लोमा प्रदान किया जाता है।
किंग सेजोंग पुरस्कार के तीन विजेता
इस श्रेणी में कोलंबिया का Escuelas LEO Programme, नीदरलैंड्स का Language Friendly School Programme और नाइजीरिया का Project PAL शामिल हैं। इन कार्यक्रमों में मातृभाषा, स्थानीय भाषाओं, बहुभाषी शिक्षा और वंचित समुदायों पर विशेष ध्यान दिया गया है। नाइजीरिया का Project PAL विशेष रूप से संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में स्कूल से बाहर बच्चों तक शिक्षा पहुँचाने के लिए सौर ऊर्जा से संचालित साक्षरता केंद्रों और स्थानीय भाषा शिक्षण का प्रयोग करता है।
कन्फ्यूशियस पुरस्कार के तीन विजेता
इस श्रेणी में लेबनान का Al-Sama Project, मेक्सिको का Chiapas Puede State Literacy Programme और थाईलैंड का Language of Life Programme शामिल हैं। इनके माध्यम से विस्थापित युवाओं, आदिवासी समुदायों, महिलाओं और स्कूल से बाहर शिक्षार्थियों को लक्षित किया गया है। थाईलैंड का कार्यक्रम अंग्रेजी, मलय और चीनी जैसी भाषाओं के माध्यम से बहुभाषी साक्षरता तथा आपदा संचार, पर्यावरण और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े भाषा कौशल पर भी जोर देता है।
वैश्विक साक्षरता संकट और लैंगिक असमानता
यूनेस्को के अनुसार दुनिया में 739 मिलियन से अधिक युवा एवं वयस्क बुनियादी साक्षरता कौशल से वंचित हैं और इनमें लगभग 63% महिलाएं हैं। निरक्षर युवाओं और वयस्कों में 77% से अधिक उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में रहते हैं। इसके अतिरिक्त, विश्वभर में लगभग दस में से चार विद्यार्थी प्राथमिक शिक्षा पूरी करने तक न्यूनतम पठन दक्षता हासिल नहीं कर पाते। ये आंकड़े साक्षरता को केवल शिक्षा का मुद्दा न मानकर मानव विकास, लैंगिक समानता और सामाजिक समावेशन का महत्वपूर्ण मुद्दा बनाते हैं।
UPSC के लिए महत्व: SDG-4 और भारत से संबंध
यह विषय सतत विकास लक्ष्य-4 (SDG-4) से सीधे जुड़ा है, जिसका उद्देश्य समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना तथा सभी के लिए आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना है। भारत के संदर्भ में यह विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, मातृभाषा में शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, लैंगिक समानता और वंचित समूहों की शिक्षा से जोड़ा जा सकता है। UPSC में प्रश्न UNESCO के साक्षरता पुरस्कार, पुरस्कारों की श्रेणियां, अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस, SDG-4 तथा वैश्विक साक्षरता असमानता के संदर्भ में पूछे जा सकते हैं।