भरतनाट्यम की दिग्गज कलाकार डॉ. वसुंधरा दोरास्वामी को मिलेगा ‘गुरु डॉ. सरोजा वैद्यनाथन उत्कृष्टता पुरस्कार 2026’
डॉ. वसुंधरा दोरास्वामी, प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना, कोरियोग्राफर और शोधकर्ता, को पद्मभूषण गुरु डॉ. सरोजा वैद्यनाथन उत्कृष्टता पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार 26–27 सितंबर 2026 को विशाखापत्तनम में आयोजित वैशाखी नृत्योत्सव में नटराज संगीत एवं नृत्य अकादमी द्वारा प्रदान किया जाएगा। पाँच दशकों से भरतनाट्यम से जुड़ी दोरास्वामी ने भरतनाट्यम और अष्टांग विन्यास योग के संबंध पर शोध किया तथा ‘पांचाली’, ‘गंगा लहरी’ और ‘साम वेद’ जैसी प्रस्तुतियों की कोरियोग्राफी की है। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और शांताला पुरस्कार सहित कई सम्मान मिल चुके हैं और वे भारतीय शास्त्रीय नृत्य की परंपरा के संरक्षण एवं वैश्विक प्रसार में योगदान दे रही हैं।
प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना, कोरियोग्राफर और शोधकर्ता डॉ. वसुंधरा दोरास्वामी को पद्मभूषण गुरु डॉ. सरोजा वैद्यनाथन उत्कृष्टता पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार नटराज संगीत एवं नृत्य अकादमी (NMDA) द्वारा 26–27 सितंबर 2026 को विशाखापत्तनम में आयोजित वैशाखी नृत्योत्सव भारतीय नृत्य महोत्सव में प्रदान किया जाएगा।
डॉ. वसुंधरा दोरास्वामी का योगदान:
मैसूर में रहने वाली डॉ. दोरास्वामी पिछले लगभग पाँच दशकों से भरतनाट्यम के प्रदर्शन, शिक्षण और शोध से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी भारतीय शास्त्रीय नृत्य का प्रचार किया है। वे भरतनाट्यम की परंपरा को आधुनिक शोध और शारीरिक अनुशासन के साथ जोड़ने के लिए जानी जाती हैं।
भरतनाट्यम और अष्टांग विन्यास योग का संबंध:
डॉ. दोरास्वामी के कार्यों की प्रमुख विशेषता भरतनाट्यम और अष्टांग विन्यास योग के बीच संबंध का अध्ययन है। उन्होंने योग की शारीरिक तकनीकों तथा भरतनाट्यम के नृत्य-प्रशिक्षण में मौजूद समानताओं पर शोध किया है। उन्होंने प्रसिद्ध योग गुरु के. पट्टाभि जोइस से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया था। यह कार्य भारतीय प्रदर्शन कलाओं में शरीर, गति, अनुशासन और आध्यात्मिकता के अंतर्संबंध को समझने में महत्वपूर्ण है।
प्रमुख नृत्य प्रस्तुतियाँ एवं सम्मान:
डॉ. दोरास्वामी ने ‘पांचाली’, ‘गंगा लहरी’ और ‘साम वेद’ जैसी उल्लेखनीय एकल नृत्य प्रस्तुतियों की कोरियोग्राफी की है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और शांताला पुरस्कार सहित विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया गया है। उन्हें अमेरिका के लुइसविले, केंटकी की मानद नागरिकता भी प्रदान की गई है।
वैशाखी नृत्योत्सव 2026 का महत्व:
वैशाखी नृत्योत्सव भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं को बढ़ावा देने तथा इस क्षेत्र के प्रतिष्ठित कलाकारों के योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। 2026 का आयोजन विशाखापत्तनम में होगा। ऐसे सांस्कृतिक महोत्सव भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत, गुरु-शिष्य परंपरा और शास्त्रीय कला रूपों के संरक्षण एवं नई पीढ़ी तक उनके हस्तांतरण में योगदान देते हैं।
UPSC के लिए महत्व:
यह समाचार भारतीय कला एवं संस्कृति, शास्त्रीय नृत्य, सांस्कृतिक विरासत और गुरु-शिष्य परंपरा से संबंधित है। UPSC के लिए भरतनाट्यम के साथ इसके तमिलनाडु से ऐतिहासिक संबंध, नाट्यशास्त्र, अभिनय/अभिनय के अंग, नृत्य-नाट्य परंपरा तथा संगीत नाटक अकादमी जैसे विषयों को जोड़कर पढ़ना उपयोगी है। साथ ही, यह उदाहरण दर्शाता है कि भारतीय शास्त्रीय कलाओं का संरक्षण केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध, दस्तावेजीकरण, शिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रसार से भी जुड़ा है।