अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026: सांकेतिक भाषाओं के माध्यम से बधिर व्यक्तियों के मानवाधिकार और समावेशन पर जोर
हर वर्ष 23 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2017 में प्रस्ताव A/RES/72/161 के माध्यम से घोषित किया था। वर्ष 2026 की थीम “Declaring Deaf People’s Human Rights” है, जिसका उद्देश्य बधिर व्यक्तियों के मानवाधिकारों और सांकेतिक भाषाओं के माध्यम से समान भागीदारी को बढ़ावा देना है। 2026 में CRPD को अपनाए जाने के 20 वर्ष और World Federation of the Deaf (WFD) की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ होने के कारण यह दिवस विशेष महत्व रखता है। भारत में ISLRTC की स्थापना 28 सितंबर 2015 को हुई थी, जो भारतीय सांकेतिक भाषा के प्रशिक्षण, शोध और संसाधन विकास के साथ Indian Sign Language Dictionary उपलब्ध कराता है।
हर वर्ष 23 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस (International Day of Sign Languages) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2017 में प्रस्ताव A/RES/72/161 के माध्यम से 23 सितंबर को यह दिवस घोषित किया था। इसका उद्देश्य बधिर व्यक्तियों के मानवाधिकारों की पूर्ण प्राप्ति में सांकेतिक भाषाओं के महत्व के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है। 23 सितंबर की तिथि World Federation of the Deaf (WFD) की स्थापना की स्मृति में चुनी गई है।
वर्ष 2026 की थीम और इसका महत्व
2026 की थीम — “Declaring Deaf People’s Human Rights” (बधिर व्यक्तियों के मानवाधिकारों की घोषणा) है। इसका मुख्य जोर बधिर व्यक्तियों के अधिकारों को केवल मान्यता देने के बजाय जीवन के सभी क्षेत्रों में उन्हें प्रभावी रूप से लागू करने पर है। इसमें राष्ट्रीय सांकेतिक भाषाओं के माध्यम से शिक्षा, सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक जीवन तक पूर्ण पहुंच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना गया है।
सांकेतिक भाषा और भाषाई अधिकार
सांकेतिक भाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विविधता का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, कम उम्र से सांकेतिक भाषा तक पहुंच तथा सांकेतिक भाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बधिर व्यक्तियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए सांकेतिक भाषाओं की मान्यता भाषाई अधिकार, शिक्षा के अधिकार और समान भागीदारी से जुड़ी हुई है।
2026 का विशेष महत्व: CRPD के 20 वर्ष
वर्ष 2026 में संयुक्त राष्ट्र के Convention on the Rights of Persons with Disabilities (CRPD) को अपनाए जाने के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी वर्ष World Federation of the Deaf (WFD) की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ भी है। इसलिए 2026 का अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस दिव्यांगजन अधिकारों, राष्ट्रीय सांकेतिक भाषाओं और समावेशी समाज के निर्माण के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
भारत में भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) और ISLRTC
भारत में Indian Sign Language Research and Training Centre (ISLRTC) दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है। इसकी स्थापना 28 सितंबर 2015 को हुई थी। ISLRTC भारतीय सांकेतिक भाषा के प्रशिक्षण, शोध और संसाधनों के विकास से संबंधित कार्य करता है। इसके Indian Sign Language Dictionary में वीडियो के माध्यम से भारतीय सांकेतिक भाषा के संकेतों और उनके हिंदी/अंग्रेजी समकक्षों को उपलब्ध कराया गया है।
UPSC के लिए महत्व: समावेशी विकास और दिव्यांगजन अधिकार
यह विषय UPSC के GS Paper-II—सामाजिक न्याय, कमजोर वर्गों के अधिकार, शिक्षा और समावेशन के लिए महत्वपूर्ण है। इसे दिव्यांगजन अधिकार, समान अवसर, समावेशी शिक्षा, भाषाई विविधता और मानवाधिकार से जोड़ा जा सकता है। विशेष रूप से याद रखें—23 सितंबर → अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस; 2017 → UN द्वारा मान्यता; 2026 थीम → “Declaring Deaf People’s Human Rights”; WFD स्थापना → 23 सितंबर 1951; ISLRTC स्थापना → 28 सितंबर 2015।