विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस 2026 — स्वस्थ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंध पर वैश्विक जोर
विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस हर वर्ष 26 सितंबर को मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच संबंधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह दिवस International Federation of Environmental Health (IFEH) की पहल से जुड़ा है और स्वच्छ एवं टिकाऊ पर्यावरण के महत्व पर जोर देता है। पर्यावरणीय स्वास्थ्य में वायु-जल प्रदूषण, स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा, रासायनिक जोखिम और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय शामिल हैं। भारत में स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) जैसी पहलें पर्यावरणीय स्वास्थ्य सुधारने में महत्वपूर्ण हैं।
विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस (World Environmental Health Day) प्रत्येक वर्ष 26 सितंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच गहरे संबंध के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सुरक्षित, स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण के महत्व को रेखांकित करना है।
स्थापना और प्रमुख संस्था:
यह दिवस International Federation of Environmental Health (IFEH) की पहल से जुड़ा है। IFEH पर्यावरणीय स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले पेशेवरों और संगठनों का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है। इस दिवस के माध्यम से पर्यावरणीय स्वास्थ्य से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर सहयोग और जागरूकता को बढ़ावा दिया जाता है।
पर्यावरणीय स्वास्थ्य का व्यापक दायरा:
पर्यावरणीय स्वास्थ्य केवल प्रदूषण तक सीमित नहीं है। इसमें वायु एवं जल प्रदूषण, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता, ठोस एवं खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा, रासायनिक जोखिम, जलवायु परिवर्तन, विकिरण तथा स्वस्थ आवास जैसे विषय शामिल हैं। इन कारकों में परिवर्तन सीधे मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य:
जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव, बाढ़, सूखा और अन्य चरम मौसम घटनाओं की तीव्रता तथा आवृत्ति बढ़ सकती है। इसके अतिरिक्त तापमान और वर्षा में बदलाव से कुछ संक्रामक रोगों के वाहक जैसे मच्छरों के भौगोलिक विस्तार पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए जलवायु परिवर्तन को केवल पर्यावरणीय नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती के रूप में भी देखा जाता है।
भारत के संदर्भ में महत्व:
भारत में वायु प्रदूषण, जल एवं स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन पर्यावरणीय स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख मुद्दे हैं। स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) तथा जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना जैसी पहलों का संबंध प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच बेहतर समन्वय से है।
UPSC के लिए महत्व:
विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस को GS Paper-III के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, GS Paper-II के स्वास्थ्य एवं कल्याण, तथा SDGs के संदर्भ में समझना उपयोगी है। इसका मूल विचार One Health Approach से भी जुड़ता है, जिसमें मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को परस्पर संबंधित माना जाता है। पर्यावरणीय जोखिमों को कम करने के लिए रोकथाम, निगरानी, स्वच्छ तकनीक, सतत शहरी नियोजन और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग महत्वपूर्ण हैं।