पशुधन बीमा पोर्टल 2026: किसानों के पशुधन को वित्तीय जोखिम से सुरक्षा और बीमा सेवाओं का डिजिटलीकरण
पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) ने 28 सितंबर 2026 को पशुधन बीमा पोर्टल लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य बीमा सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराना है। पोर्टल के माध्यम से पॉलिसी जारी करने, दावों की प्रक्रिया व ट्रैकिंग, निगरानी और रिपोर्टिंग जैसी सेवाएँ डिजिटल रूप से संचालित की जाएंगी। यह पहल राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) से जुड़ी है, जिसमें लाभार्थी 15% और सरकार 85% बीमा प्रीमियम वहन करती है तथा पशुधन की विभिन्न श्रेणियों को बीमा कवर मिलता है। पशुओं की डिजिटल पहचान के लिए RFID तकनीक को भी शामिल किया गया है, जिससे पारदर्शिता, डेटा प्रबंधन और बीमा दावों की निगरानी को बेहतर बनाया जा सकेगा।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) द्वारा 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में पशुधन बीमा पोर्टल लॉन्च किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पशुधन बीमा से संबंधित विभिन्न सेवाओं को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है। पोर्टल हिंदी, अंग्रेजी और 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा, जिससे ग्रामीण एवं पशुपालक समुदायों के लिए इसकी पहुंच बढ़ेगी।
पोर्टल की प्रमुख विशेषताएँ:
पोर्टल के माध्यम से पशुधन बीमा पॉलिसी जारी करना, बीमा दावों की प्रक्रिया एवं ट्रैकिंग, ऑनलाइन बीमा संबंधी जानकारी, निगरानी और रिपोर्टिंग जैसी सेवाओं को डिजिटल रूप से एकीकृत किया जाएगा। इससे किसान, बीमा कंपनियाँ, सरकार और अन्य संबंधित हितधारकों के बीच डेटा-साझाकरण एवं समन्वय बेहतर होने की संभावना है। डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से योजना की निगरानी और निर्णय लेने की प्रक्रिया को भी मजबूत किया जा सकता है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन से संबंध:
पशुधन बीमा National Livestock Mission (NLM) के Research & Development, Livestock Insurance, Extension and Innovation उप-मिशन से संबंधित है। इसका प्रमुख उद्देश्य पशुओं की मृत्यु से होने वाले आर्थिक नुकसान से पशुपालकों को सुरक्षा प्रदान करना और देश में पशुधन बीमा की पहुंच बढ़ाना है। इसके दायरे में दुधारू पशु, घोड़े, गधे, खच्चर, ऊंट, टट्टू, भेड़, बकरी, सूअर, खरगोश, याक और मिथुन जैसी पशुधन श्रेणियाँ शामिल हैं।
सरकारी सब्सिडी और लाभार्थी योगदान:
वर्तमान प्रावधानों के अनुसार बीमा प्रीमियम का 15% लाभार्थी तथा शेष 85% सरकार द्वारा वहन किया जाता है। इससे पशुपालकों के लिए बीमा की लागत कम होती है और छोटे एवं सीमांत किसानों को जोखिम प्रबंधन का साधन मिलता है। सब्सिडी की पात्रता को बढ़ाकर सामान्यतः प्रति लाभार्थी परिवार 5 पशु इकाइयों से 10 पशु इकाइयों तक किया गया है, जबकि सूअर और खरगोश के लिए सीमा 5 पशु इकाइयाँ है।
RFID और पशुधन की डिजिटल पहचान:
सरकार ने पशुओं की पहचान के अतिरिक्त माध्यम के रूप में Radio Frequency Identification (RFID) के उपयोग को भी मंजूरी दी है। डिजिटल पहचान से पशु की पहचान, बीमा पॉलिसी, दावे और संबंधित रिकॉर्ड को बेहतर तरीके से जोड़ने में सहायता मिल सकती है। इससे फर्जी दावों को कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने और पशुधन बीमा के प्रशासनिक प्रबंधन को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व:
पशुधन बीमा पोर्टल कृषि विविधीकरण, ग्रामीण आजीविका, डिजिटल गवर्नेंस और जलवायु जोखिम प्रबंधन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। भारत में पशुधन छोटे एवं सीमांत किसानों की आय और आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है; अतः बीमारी, प्राकृतिक आपदा या पशु मृत्यु से होने वाला नुकसान ग्रामीण परिवारों को गंभीर आर्थिक संकट में डाल सकता है। डिजिटल बीमा व्यवस्था risk mitigation, financial inclusion और technology-enabled governance को मजबूत कर सकती है। UPSC में इसे GS Paper-2 (ई-गवर्नेंस एवं कल्याणकारी योजनाएँ), GS Paper-3 (कृषि, पशुपालन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था) तथा Essay से जोड़ा जा सकता है।