भारत के इस्पात क्षेत्र में मजबूत वृद्धि, अप्रैल–जुलाई 2026 में खपत 7.9% बढ़ी
वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-जुलाई के दौरान भारत में तैयार इस्पात की खपत 7.9% बढ़कर 56 मिलियन टन हो गई, जबकि उत्पादन 4.7% बढ़कर 54.7 मिलियन टन रहा। कच्चे इस्पात का उत्पादन 2.4% बढ़कर 56.2 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो इस्पात क्षेत्र में मजबूत घरेलू मांग को दर्शाता है। तैयार इस्पात का आयात 36.6% बढ़कर 2.77 मिलियन टन और निर्यात 35% बढ़कर 2.29 मिलियन टन रहा, जिससे भारत शुद्ध आयातक बना रहा। मिश्रधातु इस्पात में उत्पादन और खपत में मजबूत वृद्धि दर्ज हुई, जबकि स्टेनलेस स्टील की बढ़ती मांग के बावजूद घरेलू उत्पादन में गिरावट देखी गई।
वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान भारत में तैयार इस्पात की खपत 7.9% बढ़कर 56 मिलियन टन (MT) हो गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 52 मिलियन टन थी, जो घरेलू मांग में मजबूती का संकेत है।
इस्पात उत्पादन में वृद्धि:
इस अवधि में तैयार इस्पात उत्पादन 4.7% बढ़कर 54.7 MT हो गया, जबकि कच्चे इस्पात का उत्पादन 2.4% बढ़कर 56.2 MT तक पहुंच गया। जुलाई 2026 में तैयार इस्पात की खपत 6.8% बढ़कर 14.4 MT रही।
भारत का इस्पात व्यापार:
तैयार इस्पात का आयात 36.6% बढ़कर 2.77 MT और निर्यात 35% बढ़कर 2.29 MT रहा। आयात अधिक होने के कारण भारत इस अवधि में शुद्ध इस्पात आयातक (Net Importer) बना रहा।
प्रमुख व्यापारिक देश:
भारत के तैयार इस्पात आयात में चीन की हिस्सेदारी 30.9%, दक्षिण कोरिया की 30.2% और जापान की 14.9% रही। भारत से तैयार इस्पात निर्यात के लिए वियतनाम प्रमुख बाजार रहा।
मिश्रधातु और स्टेनलेस स्टील का रुझान:
मिश्रधातु इस्पात का उत्पादन 26.7% बढ़कर 3.71 MT और खपत 22.1% बढ़कर 4.02 MT हो गई। दूसरी ओर, स्टेनलेस स्टील की खपत बढ़ने के बावजूद उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई, जिससे आयात में तेज वृद्धि हुई।
सरकारी नीतियां और UPSC महत्व:
इस्पात क्षेत्र के विकास के लिए लौह अयस्क की उपलब्धता, खनन क्षेत्र में निवेश, तकनीकी उन्नयन और डिजिटलीकरण पर जोर दिया जा रहा है। UPSC के लिए यह समाचार औद्योगिक विकास, अवसंरचना, खनिज संसाधन, विनिर्माण क्षेत्र, आयात-निर्यात तथा आत्मनिर्भर भारत के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
