गुजरात का ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल 2026: नियामक सुधारों से कारोबार और MSME क्षेत्र को बढ़ावा
गुजरात विधानसभा ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 पारित किया, जिसके तहत 5 राज्य अधिनियमों के 12 प्रावधानों में संशोधन किया गया। विधेयक में पात्र दुकानों को 24×7 संचालन, नए व्यवसायों के लिए स्व-घोषणा और जोखिम-आधारित अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का प्रावधान है। MSME सुविधा तंत्र का विस्तार कर बिजली, औद्योगिक संपदा, सहकारी समितियों और सिंचाई से जुड़े अतिरिक्त कानूनों को इसमें शामिल किया गया है। सार्वजनिक सेवाओं में देरी होने पर स्वचालित अपील की व्यवस्था से समयबद्ध सेवा वितरण, जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा मिलेगा।
गुजरात विधानसभा ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 पारित किया है। इसका उद्देश्य राज्य में व्यावसायिक गतिविधियों को सरल, तेज और अधिक कुशल बनाना है। विधेयक के माध्यम से 5 राज्य अधिनियमों के 12 प्रावधानों में संशोधन किया गया है। इसमें अनुपालन का बोझ कम करने, अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा सरकारी सेवाओं में प्रौद्योगिकी आधारित प्रशासन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
24×7 व्यावसायिक संचालन और स्व-घोषणा व्यवस्था
विधेयक के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले पात्र दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को 24×7 संचालन की अनुमति दी जा सकती है। इसका उद्देश्य व्यापारिक गतिविधियों में लचीलापन और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। साथ ही, नए व्यवसायों के पंजीकरण में Self-Declaration (स्व-घोषणा) व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है, जिससे प्रारंभिक सत्यापन और अनुमोदन में लगने वाला समय कम किया जा सके।
जोखिम-आधारित अग्नि सुरक्षा विनियमन
विधेयक में गुजरात अग्नि निवारण अधिनियम से संबंधित प्रावधानों में संशोधन किया गया है। इसके तहत अग्नि सुरक्षा अनुपालन को अधिक Risk-Based Approach के अनुरूप बनाने का प्रयास किया गया है। इसका मूल उद्देश्य यह है कि अधिक जोखिम वाले प्रतिष्ठानों पर अपेक्षाकृत कठोर सुरक्षा मानक लागू हों, जबकि कम जोखिम वाले व्यवसायों पर अनावश्यक नियामक बोझ कम किया जा सके। यह Regulatory Efficiency और Risk-Based Governance का उदाहरण है।
MSME सुविधा तंत्र का विस्तार
विधेयक में MSME Facilitation Framework को मजबूत किया गया है। इसमें बिजली आपूर्ति, GIDC औद्योगिक संपदा, सहकारी समितियों और सिंचाई सहित आठ अतिरिक्त राज्य अधिनियमों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य MSME इकाइयों को विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं और नियामकीय आवश्यकताओं से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर संस्थागत सहायता उपलब्ध कराना है। यह कदम MSME competitiveness और ease of compliance को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
सार्वजनिक सेवाओं में देरी पर स्वचालित अपील
विधेयक में गुजरात लोक सेवाओं के अधिकार से संबंधित व्यवस्था में स्वचालित अपील का प्रावधान किया गया है। यदि कोई सरकारी विभाग निर्धारित समय-सीमा में आवेदन या शिकायत का निपटारा नहीं करता है, तो मामला स्वतः उच्च अधिकारी के समक्ष अपील के लिए भेजा जा सकता है। इससे नागरिकों को बार-बार अपील करने की आवश्यकता कम होगी और समयबद्ध सेवा वितरण, जवाबदेही तथा Good Governance को बढ़ावा मिलेगा।
अन्य राज्यों के डॉक्टरों के लिए त्वरित पंजीकरण
चिकित्सा परिषद से संबंधित प्रावधानों में संशोधन के माध्यम से भारत के अन्य राज्यों में पहले से पंजीकृत योग्य डॉक्टरों के लिए गुजरात में पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। Self-Declaration आधारित त्वरित पंजीकरण से स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधन की गतिशीलता बढ़ सकती है। UPSC के लिए यह प्रावधान Cooperative Federalism, Ease of Mobility of Professionals, Regulatory Simplification और Public Service Delivery जैसे व्यापक शासन-संबंधी मुद्दों से जोड़ा जा सकता है।