भारत का लक्ष्य 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’: मानव अंतरिक्ष उड़ान में नए युग की तैयारी
भारत ने वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, जिसके पहले मॉड्यूल को मंजूरी मिल चुकी है। यह परियोजना भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का महत्वपूर्ण विस्तार होगी। अंतरिक्ष स्टेशन के माध्यम से भारत दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष गतिविधियों, वैज्ञानिक अनुसंधान और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अध्ययन को बढ़ावा देगा। 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जाता है, जो भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों और अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों के महत्व को दर्शाता है।
भारत ने वर्ष 2035 तक अपना भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station - BAS) स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। यह घोषणा 23 अगस्त 2026 को अहमदाबाद में आयोजित तीसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह के दौरान ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन द्वारा की गई।
पहले मॉड्यूल को मंजूरी:
प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को उपग्रह और प्रक्षेपण सेवाओं से आगे बढ़ाकर दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष गतिविधियों की दिशा में ले जाएगी।
गगनयान कार्यक्रम से संबंध:
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन परियोजना, भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का महत्वपूर्ण विस्तार होगी। गगनयान से विकसित तकनीक, अनुभव और मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता भविष्य में अंतरिक्ष स्टेशन के संचालन में उपयोगी होगी।
दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष गतिविधियों का आधार:
स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन भारत को अंतरिक्ष में लंबी अवधि तक मानव उपस्थिति स्थापित करने का अवसर देगा। इसके माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीकों का परीक्षण, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) अध्ययन तथा भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी की जा सकेगी।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस और भारत के अंतरिक्ष अनुप्रयोग:
भारत में प्रतिवर्ष 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जाता है। ISRO के अनुसार, देश के अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों का विस्तार 50 से अधिक क्षेत्रों तक हो चुका है, जिनमें पृथ्वी अवलोकन, रिमोट सेंसिंग, दूरसंचार, आपदा प्रबंधन, नौवहन, शिक्षा और प्रसारण शामिल हैं।
निजी क्षेत्र की भूमिका और UPSC के लिए महत्व:
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ रही है, विशेषकर उपग्रह निर्माण, पेलोड विकास, प्रक्षेपण और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों में। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन परियोजना UPSC के लिए मानव अंतरिक्ष उड़ान, अंतरिक्ष नीति, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, ISRO, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत और भविष्य की अंतरिक्ष कूटनीति के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
