महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित, किसानों के लिए राहत पैकेज और फसल क्षति आकलन प्रक्रिया शुरू
महाराष्ट्र सरकार ने अपर्याप्त मानसूनी वर्षा के कारण 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है, जो राज्य के लगभग 74% तालुक हैं। प्रभावित क्षेत्रों में किसानों के लिए भूमि राजस्व में छूट, कृषि ऋण पुनर्निर्धारण, बिजली शुल्क में राहत और पेयजल व्यवस्था सहित कई उपाय किए गए हैं। फसल क्षति के आकलन के लिए पंचनामा, GPS निर्देशांक और जियोटैग्ड तस्वीरों का उपयोग किया जाएगा। यह घोषणा सूखा प्रबंधन संहिता, 2016 के Trigger-1 मानदंडों के तहत की गई है और कृषि, जल संसाधन तथा आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
महाराष्ट्र सरकार ने 2026 की खरीफ ऋतु में अपर्याप्त मानसूनी वर्षा के कारण राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। यह घोषणा सूखा प्रबंधन संहिता, 2016 के Trigger-1 मानदंडों तथा कृषि आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। प्रभावित तालुकों की संख्या राज्य के कुल तालुकों की लगभग 74% है।
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत:
सरकार ने प्रभावित किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए कई राहत उपायों की घोषणा की है। इनमें भूमि राजस्व में छूट, कृषि ऋणों का पुनर्निर्धारण, कृषि ऋण वसूली पर रोक, कृषि पंपों के लिए बिजली शुल्क में राहत, विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क में छूट तथा पेयजल के लिए टैंकरों की व्यवस्था शामिल हैं। इसके अतिरिक्त चारे, खाद्यान्न और पशुधन के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के उपाय किए जाएंगे।
पंचनामा के माध्यम से फसल क्षति का आकलन:
जिला प्रशासन को प्रभावित कृषि भूमि का पंचनामा तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसके अंतर्गत खेत स्तर पर फसल क्षति का आकलन किया जाएगा और GPS निर्देशांक सहित जियोटैग्ड तस्वीरें ली जाएंगी। इससे नुकसान के आकलन को अधिक पारदर्शी और प्रमाण-आधारित बनाने तथा वास्तविक लाभार्थियों तक राहत पहुंचाने में सहायता मिलेगी।
सूखा प्रबंधन संहिता, 2016 और Trigger-1:
भारत में सूखे की स्थिति के आकलन के लिए वर्षा, कृषि, वनस्पति और जल संबंधी संकेतकों का उपयोग किया जाता है। सूखा प्रबंधन संहिता प्रशासन को सूखे की पहचान, क्षेत्र निर्धारण और राहत उपायों के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करती है। Trigger-1 जैसे प्रारंभिक संकेतकों के आधार पर प्रशासन आगे के विस्तृत मूल्यांकन और राहत प्रक्रिया को सक्रिय कर सकता है।
कृषि और आपदा प्रबंधन से संबंध:
सूखा केवल वर्षा की कमी नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव कृषि उत्पादन, ग्रामीण आय, पशुधन, खाद्य सुरक्षा, पेयजल और ग्रामीण रोजगार पर पड़ता है। इसलिए महाराष्ट्र की राहत व्यवस्था में कृषि ऋण, बिजली, चारा, खाद्यान्न, जल संरक्षण और पेयजल आपूर्ति को एक साथ शामिल किया गया है। यह दृष्टिकोण समेकित आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) के महत्व को दर्शाता है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व:
यह विषय GS Paper-I में भारतीय भूगोल एवं मानसून, GS Paper-III में कृषि, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन तथा GS Paper-II में कल्याणकारी योजनाओं और शासन से जुड़ा है। उत्तर में इसे जलवायु परिवर्तन, मानसून की अनिश्चितता, फसल बीमा, सूखा-रोधी कृषि, माइक्रो-इरिगेशन, जल संरक्षण, आपदा राहत और जलवायु-स्मार्ट कृषि से जोड़कर समझा जा सकता है। विशेष रूप से याद रखें: सूखा प्रबंधन संहिता, 2016 → बहु-सूचक आधारित सूखा आकलन → क्षेत्र की अधिसूचना → पंचनामा/क्षति आकलन → राहत एवं DBT।