वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया सोसाइटी की 28वीं बैठक आयोजित हुई
9 जुलाई 2026 को कोयंबटूर स्थित केंद्रीय राज्य वन सेवा अकादमी (CASFOS) में पुनर्गठित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) सोसाइटी की 28वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की। यह पुनर्गठन के बाद नई सोसाइटी की पहली बैठक थी। बैठक में अगले तीन वर्षों के वैज्ञानिक रोडमैप को मंजूरी दी गई। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने, तकनीक आधारित वन्यजीव प्रबंधन और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया। संस्थान के अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यों को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप बनाने पर चर्चा हुई। WII भारत में वन्यजीव अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्था है।
9 जुलाई 2026 को कोयंबटूर स्थित केंद्रीय राज्य वन सेवा अकादमी (CASFOS) में भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) सोसाइटी की 28वीं बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य संस्थान की आगामी तीन वर्षों की वैज्ञानिक, अनुसंधान एवं संरक्षण संबंधी प्राथमिकताओं का निर्धारण करना था।
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) का परिचय
भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त (Autonomous) राष्ट्रीय संस्थान है।
इसकी स्थापना वर्ष 1982 में देहरादून (उत्तराखंड) में की गई थी।
यह वन्यजीव अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन, प्रशिक्षण तथा नीति-निर्माण के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करने वाला भारत का प्रमुख संस्थान है।
पुनर्गठित WII सोसाइटी का महत्व
यह बैठक अप्रैल 2026 में पूर्व कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्गठित WII सोसाइटी की पहली बैठक थी।
नई सोसाइटी में पदेन (Ex-officio) एवं मनोनीत (Nominated) सदस्य शामिल किए गए हैं।
यह निकाय संस्थान की नीतियों, प्रशासनिक दिशा तथा दीर्घकालिक वैज्ञानिक कार्यक्रमों का मार्गदर्शन करता है।
विकसित भारत @2047 के अनुरूप संस्थागत रोडमैप
बैठक में WII की अनुसंधान एवं प्रशिक्षण गतिविधियों को 'विकसित भारत @2047' के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप विकसित करने पर बल दिया गया।
इसके अंतर्गत मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी, प्रौद्योगिकी आधारित वन्यजीव निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, GIS तथा रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग और क्षमता निर्माण को प्राथमिकता दी गई।
अगले तीन वर्षों के वैज्ञानिक लक्ष्य
सोसाइटी ने आगामी तीन वर्षों के लिए संस्थान का वैज्ञानिक रोडमैप स्वीकृत किया।
इसमें जैव विविधता संरक्षण, संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण, वन्यजीव आवास (Habitat) प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन, पारिस्थितिकी अनुसंधान तथा राज्यों को तकनीकी एवं नीति संबंधी सहायता प्रदान करने जैसे प्रमुख लक्ष्य शामिल हैं।
UPSC के लिए परीक्षा दृष्टि
UPSC प्रारंभिक परीक्षा एवं मुख्य परीक्षा दोनों में Wildlife Institute of India, स्वायत्त संस्थाएँ, जैव विविधता संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष, वन्यजीव प्रबंधन, पर्यावरणीय शासन (Environmental Governance) तथा विकसित भारत @2047 जैसे विषयों से प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
इस समाचार को पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, संरक्षण संस्थानों, जैव विविधता अधिनियम, तथा भारत की पर्यावरणीय नीतियों के साथ समग्र रूप से तैयार करना उपयोगी रहेगा।
