अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिजर्व में 3,261 पुष्पीय पौधों की पहचान, पश्चिमी घाट की जैव-विविधता और स्थानिकता उजागर
JNTBGRI के शोधकर्ताओं की नई चेकलिस्ट में अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिजर्व में 3,261 पुष्पीय पौधों की प्रजातियाँ दर्ज की गईं, जो 1,139 वंशों और 190 परिवारों से संबंधित हैं। अध्ययन में 1,018 स्थानिक और 245 स्टेनो-एंडेमिक टैक्सा पाए गए, जो क्षेत्र की विशिष्ट जैव-विविधता और संरक्षण महत्त्व को दर्शाते हैं। वनस्पति विविधता में Fabaceae सबसे समृद्ध परिवार रहा तथा अगस्त्यमलाई की 347 पौध प्रजातियाँ श्रीलंका में भी पाई जाती हैं। केरल और तमिलनाडु में फैले इस पश्चिमी घाट क्षेत्र के संरक्षण के लिए ex-situ conservation, seed banks, आवास पुनर्स्थापन और जलवायु अनुकूलन जैसे उपायों पर जोर दिया गया है।
जवाहरलाल नेहरू ट्रॉपिकल बॉटेनिक गार्डन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (JNTBGRI), तिरुवनंतपुरम के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार नई चेकलिस्ट में अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिजर्व (ABR) में 3,261 पुष्पीय पौधों की प्रजातियाँ, 26 उप-प्रजातियाँ और 28 किस्में दर्ज की गई हैं। ये पौधे 1,139 वंशों और 190 परिवारों से संबंधित हैं। अध्ययन सितंबर 2026 में Plant Science Today में प्रकाशित हुआ।
स्थानिकता जैव-विविधता का प्रमुख संकेतक:
अध्ययन में 1,018 टैक्सा (लगभग 31.2%) भारत के लिए स्थानिक पाए गए, जबकि 245 स्टेनो-एंडेमिक टैक्सा ऐसे हैं जिनका प्राकृतिक वितरण अत्यंत सीमित क्षेत्र तक है। ऐसी प्रजातियाँ आवास परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन और मानवजनित दबावों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। इसलिए अगस्त्यमलाई क्षेत्र में संरक्षण रणनीतियों को स्थानीय पारिस्थितिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करना महत्वपूर्ण है।
प्रमुख पादप परिवार और जैव-भौगोलिक संबंध:
वनस्पति विविधता में Fabaceae सबसे समृद्ध परिवार रहा, जिसमें 349 टैक्सा दर्ज किए गए। इसके बाद Rubiaceae (194), Poaceae (193) और Orchidaceae (168) का स्थान है। अध्ययन में अगस्त्यमलाई की वनस्पतियों के श्रीलंका के साथ मजबूत जैव-भौगोलिक संबंध का भी संकेत मिलता है और दोनों क्षेत्रों में 347 टैक्सा साझा पाए गए। यह दक्षिणी पश्चिमी घाट और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक एवं जैव-भौगोलिक संबंधों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिजर्व का भौगोलिक एवं पारिस्थितिक महत्व:
ABR केरल और तमिलनाडु में फैला दक्षिणी पश्चिमी घाट का महत्वपूर्ण जैव-विविधता क्षेत्र है। यहाँ उष्णकटिबंधीय वन, उच्च ऊँचाई वाले शोला वन और घासभूमि जैसे विविध पारिस्थितिक तंत्र पाए जाते हैं। यह क्षेत्र पश्चिमी घाट की जैव-विविधता हॉटस्पॉट के अंतर्गत आता है। अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिजर्व को भारत में 2001 में अधिसूचित किया गया था और 2016 में UNESCO के World Network of Biosphere Reserves में शामिल किया गया।
संरक्षण के लिए अध्ययन का महत्व:
इतनी अधिक स्थानिकता और सीमित वितरण वाली प्रजातियों की उपस्थिति अगस्त्यमलाई को संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र बनाती है। शोधकर्ताओं ने ex-situ conservation, seed banks, क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों के पुनर्स्थापन, दीर्घकालिक निगरानी और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन जैसे उपायों पर जोर दिया है। यह चेकलिस्ट भविष्य में प्रजातियों की निगरानी, संरक्षण प्राथमिकताएँ निर्धारित करने और आवास पुनर्स्थापन के लिए एक वैज्ञानिक आधार प्रदान कर सकती है।
UPSC के लिए महत्व:
यह समाचार GS Paper-1 के भौतिक भूगोल एवं जैव-भूगोल तथा GS Paper-3 के पर्यावरण, जैव-विविधता और संरक्षण से सीधे संबंधित है। Prelims के लिए अगस्त्यमलाई–केरल/तमिलनाडु, पश्चिमी घाट, UNESCO Biosphere Reserve, शोला-घासभूमि, Endemism और Steno-endemism महत्वपूर्ण तथ्य हैं। Mains में इसे पश्चिमी घाट में उच्च स्थानिकता के कारण संरक्षण की आवश्यकता, जलवायु परिवर्तन से पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र पर प्रभाव तथा in-situ और ex-situ conservation के संदर्भ में जोड़ा जा सकता है।