तमिलनाडु में तीसरी संतान पर भी 365 दिन मातृत्व अवकाश: महिला कर्मचारियों के कल्याण की नई पहल
तमिलनाडु सरकार ने तीसरी संतान के जन्म पर भी महिला सरकारी कर्मचारियों को 365 दिनों का मातृत्व अवकाश देने की घोषणा की है। यह निर्णय महिला सशक्तिकरण, सामाजिक कल्याण तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। राज्य में मातृत्व अवकाश की अवधि 2011 में 90 दिन से बढ़ाकर 6 माह, 2016 में 9 माह और 2021 में पात्र महिला कर्मचारियों के लिए 365 दिन की गई थी। विस्तारित मातृत्व अवकाश से महिला श्रम भागीदारी, कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
तमिलनाडु सरकार ने घोषणा की है कि अब तीसरी संतान के जन्म पर भी महिला सरकारी कर्मचारियों को 365 दिनों का मातृत्व अवकाश दिया जाएगा। इससे पहले दो या अधिक जीवित बच्चों वाली महिला सरकारी कर्मचारियों को पूर्ण वेतन के साथ केवल 12 सप्ताह तक मातृत्व अवकाश का प्रावधान था।
नई नीति का उद्देश्य:
यह निर्णय महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। विस्तारित मातृत्व अवकाश से महिला कर्मचारियों को प्रसव के बाद अपनी और नवजात शिशु की देखभाल के लिए अधिक समय मिलेगा तथा कार्य और मातृत्व संबंधी जिम्मेदारियों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित हो सकेगा।
तमिलनाडु में मातृत्व अवकाश का विकास:
राज्य में मातृत्व अवकाश की अवधि लगातार बढ़ाई गई है। वर्ष 2011 में 90 दिन से 6 माह, 2016 में 9 माह और जुलाई 2021 में दो से कम जीवित बच्चों वाली महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए 365 दिन किया गया। वर्ष 2026 की घोषणा के अनुसार तीसरी संतान के मामले में भी 365 दिन का लाभ देने का निर्णय लिया गया है।
महिला श्रम भागीदारी से संबंध:
पर्याप्त मातृत्व अवकाश महिलाओं को प्रसव के बाद तुरंत नौकरी छोड़ने या कार्य पर लौटने के दबाव से राहत दे सकता है। इससे महिला श्रम शक्ति भागीदारी, कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा मिल सकता है।
सामाजिक और बाल कल्याण का आयाम:
मातृत्व अवकाश केवल कर्मचारी कल्याण से संबंधित नहीं है, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, नवजात की देखभाल और परिवार के सामाजिक समर्थन से भी जुड़ा है। इस प्रकार ऐसी नीतियां मानव विकास और सामाजिक सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण को मजबूत करती हैं।
UPSC परीक्षा के लिए महत्त्व:
यह समाचार GS Paper-II में महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय और सरकारी नीतियों तथा GS Paper-III में समावेशी विकास और मानव संसाधन के संदर्भ में उपयोगी है। उत्तर लेखन में इसे कार्यस्थल पर लैंगिक समानता, महिला-केंद्रित कल्याणकारी नीतियों और मातृत्व संरक्षण के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
