लद्दाख के लिए प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) — संवैधानिक संरक्षण और स्थानीय स्वशासन की नई पहल
केंद्र सरकार ने लद्दाख के लिए प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) के माध्यम से भूमि, संस्कृति, भाषा, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को विशेष संवैधानिक संरक्षण देने का प्रस्ताव रखा है। अगस्त 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख में विधानसभा नहीं है, जिससे स्थानीय प्रतिनिधित्व, रोजगार, भूमि और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी चिंताएँ बनी हुई हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक प्रत्यक्ष निर्वाचित निकाय को स्थानीय विषयों पर विधायी शक्तियाँ दी जा सकती हैं, हालांकि इसकी शक्तियाँ अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई हैं। लद्दाख की लेह और कारगिल स्वायत्त पहाड़ी परिषदों को वर्तमान में छठी अनुसूची का संवैधानिक संरक्षण प्राप्त नहीं है, जबकि अनुच्छेद 371 श्रृंखला विभिन्न राज्यों को विशेष संवैधानिक प्रावधान प्रदान करती है।
केंद्र सरकार ने लद्दाख के लिए एक नए विशेष संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 371(K) का प्रस्ताव रखा है। यह पहल केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधि संगठनों के बीच हुई चर्चाओं के बाद सामने आई है। प्रस्ताव का उद्देश्य लद्दाख की भूमि, संस्कृति, भाषा, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े हितों को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करना है।
लद्दाख को विशेष संवैधानिक सुरक्षा की आवश्यकता क्यों?
लद्दाख को अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग करके एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। वर्तमान में लद्दाख में विधानसभा नहीं है, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और नीति-निर्माण को लेकर चिंताएँ उठती रही हैं। प्रमुख मुद्दों में भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा, सांस्कृतिक और भाषाई पहचान, पर्यावरण संरक्षण, जनसांख्यिकीय परिवर्तन तथा स्थानीय स्वशासन शामिल हैं।
प्रस्तावित निर्वाचित निकाय की भूमिका
प्रस्ताव के अनुसार लद्दाख में एक प्रत्यक्ष निर्वाचित शासी निकाय बनाया जा सकता है। इसे स्थानीय महत्व के विषयों पर कानून बनाने की शक्तियाँ दिए जाने का प्रस्ताव है। इनमें भूमि, संस्कृति, भाषा, वन, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन जैसे विषय शामिल हैं। हालांकि, इस निकाय की वास्तविक विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियाँ अभी अंतिम रूप से निर्धारित नहीं हुई हैं।
छठी अनुसूची और लद्दाख
संविधान की छठी अनुसूची, अनुच्छेद 244 के साथ मिलकर, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के कुछ आदिवासी क्षेत्रों में स्वायत्त प्रशासन की व्यवस्था करती है। इसके तहत Autonomous District Councils (ADCs) को भूमि, वन, कृषि, ग्राम प्रशासन, सामाजिक प्रथाओं और उत्तराधिकार आदि से संबंधित विषयों पर कानून बनाने सहित कुछ प्रशासनिक एवं न्यायिक शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। लद्दाख में लेह और कारगिल की दो स्वायत्त पहाड़ी परिषदें हैं, लेकिन उन्हें छठी अनुसूची का संवैधानिक संरक्षण प्राप्त नहीं है।
अनुच्छेद 371 श्रृंखला का संवैधानिक महत्व
अनुच्छेद 371 से 371-J तक विभिन्न राज्यों की विशिष्ट ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष संवैधानिक प्रावधान किए गए हैं। उदाहरण के लिए, अनुच्छेद 371-A नागालैंड की धार्मिक एवं सामाजिक प्रथाओं, प्रथागत कानून तथा भूमि एवं संसाधनों के संबंध में विशेष सुरक्षा प्रदान करता है। इसी प्रकार अनुच्छेद 371-F सिक्किम और अनुच्छेद 371-G मिजोरम से संबंधित विशेष प्रावधान करता है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व
प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) भारतीय असममित संघवाद (Asymmetric Federalism) और स्थानीय स्वशासन की अवधारणा को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। यह प्रश्न उठाता है कि विशेष भौगोलिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों को किस प्रकार संवैधानिक संरक्षण दिया जाए। UPSC में इससे अनुच्छेद 371, छठी अनुसूची, अनुच्छेद 244, पंचायती राज, स्वायत्त परिषदें, जनजातीय अधिकार, पर्यावरणीय शासन, संघवाद और लद्दाख की रणनीतिक महत्ता पर प्रश्न बन सकते हैं।