हिरोशिमा दिवस (6 अगस्त): परमाणु हथियारों के विनाश और वैश्विक निरस्त्रीकरण का ऐतिहासिक स्मरण
प्रत्येक वर्ष 6 अगस्त को हिरोशिमा दिवस (परमाणु विरोधी दिवस) मनाया जाता है, जो 1945 में जापान के हिरोशिमा पर हुए पहले परमाणु बम हमले की स्मृति में आयोजित किया जाता है। यह दिवस परमाणु हथियारों के विनाशकारी प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा विश्व शांति और परमाणु निरस्त्रीकरण का संदेश देता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमलों ने मानव इतिहास पर गहरा प्रभाव डाला और युद्ध के अंत का मार्ग प्रशस्त किया। भारत 'पहले उपयोग न करने' (No First Use) तथा 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता' की नीति अपनाते हुए जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में वैश्विक निरस्त्रीकरण का समर्थन करता है।
प्रत्येक वर्ष 6 अगस्त को हिरोशिमा दिवस (Hiroshima Day) अथवा परमाणु विरोधी दिवस (Anti-Nuclear Day) मनाया जाता है। यह दिवस 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा शहर पर अमेरिका द्वारा गिराए गए विश्व के पहले परमाणु बम "लिटिल बॉय (Little Boy)" की स्मृति में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के दुष्परिणामों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना तथा विश्व शांति और परमाणु निरस्त्रीकरण को प्रोत्साहित करना है।
हिरोशिमा परमाणु बमबारी का ऐतिहासिक महत्व
द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया, जिसके तीन दिन बाद 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम "फैट मैन (Fat Man)" गिराया गया। इन दोनों हमलों में लाखों लोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए तथा मानव इतिहास में परमाणु युद्ध की भयावहता पहली बार सामने आई। इसके पश्चात 15 अगस्त 1945 को जापान ने आत्मसमर्पण किया और द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हुआ।
परमाणु निरस्त्रीकरण का वैश्विक महत्व
हिरोशिमा दिवस विश्व समुदाय को परमाणु हथियारों के उन्मूलन (Nuclear Disarmament), विश्व शांति, मानव सुरक्षा तथा सतत विकास की आवश्यकता का संदेश देता है। संयुक्त राष्ट्र सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संगठन परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने तथा उनके नियंत्रण के लिए विभिन्न संधियों और पहलों को बढ़ावा देते हैं।
भारत का परमाणु सिद्धांत (India's Nuclear Doctrine)
भारत "विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता (Credible Minimum Deterrence)" और "पहले उपयोग न करने की नीति (No First Use – NFU)" का पालन करता है। भारत परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन का समर्थक है, लेकिन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए न्यूनतम आवश्यक परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने की नीति अपनाता है। भारत ने सदैव जिम्मेदार परमाणु शक्ति (Responsible Nuclear Power) के रूप में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
UPSC हेतु प्रमुख तथ्य
हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम का नाम "लिटिल बॉय" था, जबकि नागासाकी पर गिराए गए बम का नाम "फैट मैन" था। परमाणु अप्रसार संधि (NPT) वर्ष 1968 में अस्तित्व में आई तथा व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) वर्ष 1996 में अपनाई गई। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की स्थापना 1957 में हुई, जिसका मुख्यालय वियना (ऑस्ट्रिया) में स्थित है। भारत NPT का पक्षकार नहीं है, लेकिन IAEA के साथ नागरिक परमाणु सहयोग करता है।
