65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी 2026 में 20 कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार
ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी 2026 में 20 कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए गए। इस प्रदर्शनी में 27 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 2,495 कलाकारों ने 6,175 कलाकृतियाँ प्रस्तुत कीं, जिनमें से 270 का प्रदर्शन के लिए चयन हुआ। कलाकृतियों में चित्रकला, मूर्तिकला, प्रिंटमेकिंग और मिश्रित माध्यम सहित टेराकोटा, सिरेमिक, संगमरमर, तांबा और लकड़ी जैसे विविध माध्यमों का प्रयोग किया गया। ललित कला अकादमी की स्थापना 1954 में हुई थी और यह भारत में दृश्य कला के विकास, कलाकारों के प्रोत्साहन तथा सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी (National Exhibition of Art-NEA) में 20 कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए गए। वर्ष 2026 की प्रदर्शनी के लिए 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 2,495 कलाकारों ने 6,175 कलाकृतियाँ प्रस्तुत कीं, जो भारत की विविध दृश्य कला परंपराओं और समकालीन कला प्रतिभा को दर्शाती हैं।
कलाकृतियों के चयन की प्रक्रिया:
प्रदर्शनी के लिए प्रस्तुत 6,175 कलाकृतियों में से प्रथम स्तर की निर्णायक समिति ने 270 कलाकृतियों का चयन किया। इसके बाद दूसरे स्तर की निर्णायक समिति ने इनमें से 20 कलाकृतियों को पुरस्कार के लिए चुना। चयन प्रक्रिया में चित्रकला, मूर्तिकला, प्रिंटमेकिंग, रेखांकन तथा मिश्रित माध्यम जैसी विभिन्न कला विधाओं को शामिल किया गया।
कला माध्यमों की विविधता:
पुरस्कार प्राप्त कलाकृतियों में टेराकोटा, सिरेमिक, सागौन की लकड़ी, संगमरमर, तांबा, एचिंग, जलरंग, ऐक्रेलिक, ऑयल पेंटिंग और मिक्स्ड मीडिया जैसे अनेक माध्यमों का प्रयोग किया गया। यह भारतीय समकालीन कला में पारंपरिक शिल्प और आधुनिक कलात्मक तकनीकों के सह-अस्तित्व को दर्शाता है।
ललित कला अकादमी का महत्व:
ललित कला अकादमी (National Academy of Art) भारत की राष्ट्रीय दृश्य कला अकादमी है, जिसकी स्थापना 1954 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य भारत में दृश्य कलाओं के विकास और प्रसार को प्रोत्साहित करना तथा कलाकारों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच प्रदान करना है। अकादमी प्रदर्शनियों, पुरस्कारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से कलाकारों को प्रोत्साहित करती है।
भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विविधता:
राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी देश के विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों को एक साझा मंच प्रदान करती है। 27 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्त कलाकृतियाँ भारत की क्षेत्रीय कला परंपराओं, सामाजिक अनुभवों, पर्यावरणीय चिंताओं और समकालीन विचारों को अभिव्यक्त करती हैं। इस प्रकार ऐसी प्रदर्शनियाँ भारत की सांस्कृतिक विविधता और सांस्कृतिक निरंतरता को संरक्षित एवं प्रदर्शित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
UPSC के लिए महत्व:
यह विषय GS Paper-1 (भारतीय संस्कृति एवं कला), Essay तथा Prelims के लिए महत्वपूर्ण है। UPSC के दृष्टिकोण से ललित कला अकादमी को भारत की राष्ट्रीय अकादमियों और सांस्कृतिक संस्थागत ढाँचे के संदर्भ में समझना चाहिए। राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी जैसे आयोजन कलाकारों को आर्थिक एवं सामाजिक पहचान देने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, समकालीन कला को प्रोत्साहन और सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) को मजबूत करने में योगदान देते हैं।