भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार $740 अरब के पार: RBI के ताजा आंकड़े
RBI के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11.475 अरब डॉलर बढ़कर 740.803 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस वृद्धि में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) की 9.337 अरब डॉलर और स्वर्ण भंडार की 2.191 अरब डॉलर की वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा। वहीं, SDR में 43 मिलियन डॉलर और IMF Reserve Position में 11 मिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई। उच्च विदेशी मुद्रा भंडार भारत की बाहरी भुगतान क्षमता, रुपये की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक संकटों से निपटने की क्षमता को मजबूत करता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11.475 अरब डॉलर बढ़कर 740.803 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले सप्ताह भंडार में 12.422 अरब डॉलर की वृद्धि हुई थी और यह 729.328 अरब डॉलर रहा था। इससे पहले 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था। यह वृद्धि भारत की बाहरी क्षेत्रीय स्थिति और भुगतान क्षमता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) बनीं वृद्धि का प्रमुख आधार
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक Foreign Currency Assets (FCA) है। 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में FCA में 9.337 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 600.67 अरब डॉलर हो गया। FCA में अमेरिकी डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड स्टर्लिंग और जापानी येन जैसी विदेशी मुद्राओं में रखी परिसंपत्तियां शामिल होती हैं। इनके डॉलर मूल्य में बदलाव केवल लेन-देन से नहीं, बल्कि संबंधित मुद्राओं के डॉलर के मुकाबले विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के कारण भी हो सकता है।
स्वर्ण भंडार में भी उल्लेखनीय वृद्धि
इस सप्ताह भारत के Gold Reserves में भी 2.191 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और इसका मूल्य बढ़कर 116.409 अरब डॉलर हो गया। विदेशी मुद्रा भंडार में सोना महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है और यह केंद्रीय बैंक को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के समय अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में परिवर्तन से भी भारत के स्वर्ण भंडार के डॉलर मूल्य में बदलाव हो सकता है। FCA और स्वर्ण भंडार दोनों में वृद्धि ने कुल विदेशी मुद्रा भंडार को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
SDR और IMF Reserve Position में गिरावट
विदेशी मुद्रा भंडार के सभी घटकों में वृद्धि नहीं हुई। सप्ताह के दौरान Special Drawing Rights (SDR) में लगभग 43 मिलियन डॉलर की कमी आई और यह 18.81 अरब डॉलर रह गया। इसी प्रकार IMF में भारत की Reserve Position 11 मिलियन डॉलर घटकर 4.914 अरब डॉलर रह गई। इसके बावजूद FCA और स्वर्ण भंडार में हुई बड़ी वृद्धि ने इन गिरावटों के प्रभाव को पीछे छोड़ दिया और कुल विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई।
विदेशी मुद्रा भंडार का आर्थिक महत्व
विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की बाहरी भुगतान क्षमता और मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेतक है। भारत इसका उपयोग आयात भुगतान, विशेषकर कच्चे तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराने, बाहरी ऋण दायित्वों को पूरा करने तथा रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए कर सकता है। पर्याप्त भंडार से वैश्विक वित्तीय संकट, पूंजी के अचानक बहिर्वाह और विनिमय दर पर दबाव के दौरान अर्थव्यवस्था की resilience बढ़ती है।
UPSC के लिए प्रमुख अवधारणाएं और महत्व
UPSC के लिए इस खबर को RBI, विदेशी मुद्रा भंडार, FCA, Gold Reserves, SDR, IMF Reserve Position, Balance of Payments और Exchange Rate Management से जोड़कर पढ़ना चाहिए। विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि RBI के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और पूंजी/विदेशी मुद्रा प्रवाह जैसे कारकों से प्रभावित हो सकती है। रुपये पर दबाव होने पर RBI विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करके अत्यधिक अस्थिरता को कम करने का प्रयास कर सकता है। इसलिए यह खबर GS Paper-3 (भारतीय अर्थव्यवस्था) में बाह्य क्षेत्र, मुद्रा प्रबंधन और वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।