‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ ऐप से गुजरात के 752 ग्रामीण पुस्तकालयों को जोड़ा जाएगा
अमित शाह ने 12 अगस्त 2026 को गुजरात में ‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ ऐप लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के 752 ग्रामीण पुस्तकालयों को जोड़ना और ग्रामीण युवाओं को ज्ञान संसाधन उपलब्ध कराना है। यह पहल गांधीनगर, कलोल और साणंद क्षेत्रों में पढ़ने की संस्कृति, समान ज्ञान पहुंच और शैक्षिक विकास को बढ़ावा देगी। यह Hub-and-Spoke Model पर आधारित है, जिसके माध्यम से चार प्रमुख पुस्तकालयों से जुड़कर लगभग 2.80 लाख पुस्तकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की सामग्री तक पहुंच मिलेगी। MPLAD से वित्त पोषित विशेष वैन प्रत्येक पखवाड़े गांवों में पुस्तक वितरण एवं वापसी का कार्य करेंगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में Book Circulation System मजबूत होगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 12 अगस्त 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गुजरात में ‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ ऐप लॉन्च किया। इसका प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण बच्चों और युवाओं को व्यापक ज्ञान संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण पुस्तकालयों को एकीकृत करना है। यह पहल गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में लागू की जा रही है, जहां 752 पुस्तकालयों को आपस में जोड़ने की योजना है।
ग्रामीण शिक्षा और ज्ञान तक पहुंच
यह परियोजना गांधीनगर, कलोल और साणंद विधानसभा क्षेत्रों के गांवों को कवर करती है। योजना के तहत प्रत्येक गांव में स्कूलों के निकट केंद्रीय पुस्तकालय विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसका व्यापक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने की संस्कृति, ज्ञान तक समान पहुंच और बच्चों एवं युवाओं के शैक्षिक विकास को बढ़ावा देना है।
हब-एंड-स्पोक मॉडल
‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ Hub-and-Spoke Model पर आधारित है। इसमें ग्रामीण स्तर की पुस्तकालय इकाइयों को चार प्रमुख पुस्तकालयों से जोड़ा जाएगा। इस नेटवर्क के माध्यम से लगभग 2.80 लाख पुस्तकों के सामूहिक संग्रह तक पहुंच उपलब्ध होगी। इसमें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित अध्ययन सामग्री भी शामिल है।
MPLAD के माध्यम से पुस्तक वितरण व्यवस्था
इस परियोजना में MPLAD (Members of Parliament Local Area Development Scheme) के माध्यम से वित्त पोषित विशेष वैन का उपयोग किया जाएगा। ये वैन प्रत्येक पखवाड़े गांवों का दौरा करेंगी। पुरानी वितरित पुस्तकों को वापस लेकर तथा ऐप पर पंजीकृत नई पुस्तकों को गांवों तक पहुंचाकर Book Circulation System को गतिशील रखा जाएगा। इससे सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण पुस्तकालयों को बड़े पुस्तक-संग्रह से जोड़ने में मदद मिलेगी।
ज्ञान, अभिभावक और पुस्तकालयाध्यक्ष की भूमिका
यह पहल केवल पुस्तक उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के खाली समय के उत्पादक उपयोग और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसमें बच्चों की पढ़ाई और ज्ञान-विकास में अभिभावकों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है। साथ ही, सक्षम पुस्तकालयाध्यक्षों के मार्गदर्शन के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने की इच्छा, विषयों की समझ और ज्ञान में महारत विकसित करने पर जोर दिया गया है।
राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस और S.R. रंगनाथन
इस पहल का संबंध 12 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस से भी है। एस.आर. रंगनाथन को भारत में पुस्तकालय विज्ञान का जनक माना जाता है। 12 अगस्त उनकी जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्हें पुस्तकालय विज्ञान में योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। UPSC के लिए यह तथ्य भारतीय शिक्षा व्यवस्था, ज्ञान-संसाधन और सामाजिक विकास के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
