विश्व बैंक ने रूफटॉप सोलर प्रोग्राम के लिए 890 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी
विश्व बैंक ने PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के लिए 890 मिलियन अमेरिकी डॉलर के वित्तपोषण पैकेज को मंजूरी दी है। यह योजना देश के 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित करने पर केंद्रित है। वित्तपोषण में IBRD, Clean Technology Fund और Livable Planet Fund का योगदान शामिल है। इस परियोजना से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, निजी निवेश और लगभग 17 लाख रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। यह पहल भारत के 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य तथा 2035 तक गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को मजबूत करेगी।
विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशकों के बोर्ड ने 9–10 जुलाई 2026 को भारत की PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के लिए 890 मिलियन अमेरिकी डॉलर के वित्तपोषण पैकेज को मंजूरी दी।
इसका उद्देश्य देश में आवासीय रूफटॉप सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार करना है।
PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
यह भारत सरकार की प्रमुख आवासीय रूफटॉप सोलर योजना है, जिसका लक्ष्य 1 करोड़ घरों की छतों पर सौर पैनल स्थापित करना है।
योजना का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, घरेलू बिजली खर्च कम करना तथा अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में उपलब्ध कराना है।
वित्तपोषण संरचना
890 मिलियन डॉलर के पैकेज में अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (IBRD) से 820 मिलियन डॉलर का ऋण, स्वच्छ प्रौद्योगिकी कोष (Clean Technology Fund) से 60 मिलियन डॉलर का रियायती ऋण तथा Livable Planet Fund से 10 मिलियन डॉलर का अनुदान शामिल है।
आर्थिक एवं ऊर्जा महत्व
इस परियोजना से लगभग 4.2 अरब डॉलर का अतिरिक्त निजी निवेश आकर्षित होने की संभावना है।
साथ ही विनिर्माण, स्थापना एवं रखरखाव सहित नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 17 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
भारत के जलवायु लक्ष्य
यह योजना भारत के 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य तथा 2035 तक बिजली उत्पादन में 60% गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसके साथ ही डिस्कॉम, बैंक और विक्रेताओं की संस्थागत क्षमता भी सुदृढ़ होगी।
UPSC परीक्षा दृष्टि
UPSC के लिए PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, रूफटॉप सोलर, विश्व बैंक (IBRD), Clean Technology Fund (CTF), नेट-ज़ीरो उत्सर्जन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा संक्रमण, तथा भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएँ अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं।
