भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) टीका विकसित: पशुधन सुरक्षा एवं आत्मनिर्भर जैव प्रौद्योगिकी की दिशा में बड़ी उपलब्धि
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश का पहला स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) टीका विकसित किया है, जिसका शुभारंभ आईसीएआर स्थापना दिवस 2026 पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। ICAR-NIHSAD, भोपाल द्वारा विकसित यह जीवित क्षीणित (Live Attenuated) वैक्सीन जीन विलोपन तकनीक पर आधारित है और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपयुक्त है। ASF एक अत्यंत संक्रामक वायरल रोग है, जो पालतू एवं जंगली सूअरों को प्रभावित करता है, हालांकि यह मनुष्यों में नहीं फैलता। यह स्वदेशी वैक्सीन पशुधन सुरक्षा, किसानों की आय, जैव सुरक्षा तथा भारत की पशु चिकित्सा अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश का पहला स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर (African Swine Fever-ASF) टीका सफलतापूर्वक विकसित किया है। इसका औपचारिक शुभारंभ आईसीएआर स्थापना दिवस 2026 के अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। यह उपलब्धि भारत की पशु स्वास्थ्य सुरक्षा (Animal Health Security), जैव सुरक्षा (Biosecurity) तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
टीके की प्रमुख विशेषताएँ
यह टीका ICAR-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (ICAR-NIHSAD), भोपाल द्वारा विकसित किया गया है। यह जीवित क्षीणित (Live Attenuated) वैक्सीन है, जिसे जीन विलोपन (Gene Deletion) तकनीक एवं MA-104 सेल लाइन के माध्यम से तैयार किया गया है। इस तकनीक से टीका सुरक्षित, प्रभावी तथा बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपयुक्त बनाया गया है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने ASF के विरुद्ध प्रभावी स्वदेशी वैक्सीन विकसित की है।
अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) क्या है?
अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) एक अत्यंत संक्रामक एवं घातक वायरल रोग है, जो पालतू एवं जंगली सूअरों को प्रभावित करता है। यह रोग African Swine Fever Virus (ASFV) के कारण होता है तथा इसकी मृत्यु दर 100% तक हो सकती है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, रक्तस्राव, कमजोरी तथा भूख में कमी शामिल हैं। यह रोग मनुष्यों में नहीं फैलता, लेकिन सूअर पालन उद्योग को भारी आर्थिक क्षति पहुँचाता है।
भारत में ASF का प्रभाव एवं महत्व
भारत में ASF का पहला प्रकोप वर्ष 2020 में दर्ज किया गया था। इसके बाद विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में इस बीमारी ने व्यापक नुकसान पहुँचाया, जहाँ सूअर पालन ग्रामीण आजीविका का प्रमुख स्रोत है। असम और मिजोरम सहित कई राज्यों में लाखों सूअरों की मृत्यु तथा किसानों को करोड़ों रुपये की आर्थिक हानि हुई। प्रभावी वैक्सीन के अभाव में अब तक जैव सुरक्षा, संक्रमित पशुओं का निस्तारण तथा आवागमन नियंत्रण जैसे उपाय अपनाए जाते रहे हैं।
पशुधन एवं कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्व
यह स्वदेशी वैक्सीन सूअरों की मृत्यु दर को कम करने, पशुधन उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय की सुरक्षा तथा पशुपालन क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने में सहायक होगी। साथ ही, यह भारत की जैव प्रौद्योगिकी क्षमता, पशु रोग नियंत्रण प्रणाली तथा वैक्सीन अनुसंधान एवं विकास (R&D) को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी। इससे भारत भविष्य में पशु चिकित्सा टीकों का एक प्रमुख निर्यातक भी बन सकता है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह विषय GS Paper-III (Science & Technology, Agriculture, Biotechnology, Food Security, Animal Husbandry) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभ्यर्थियों को ICAR, ICAR-NIHSAD, अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF), जैव सुरक्षा (Biosecurity), जीवित क्षीणित टीका (Live Attenuated Vaccine), जीन विलोपन तकनीक (Gene Deletion Technology) तथा राष्ट्रीय पशुधन स्वास्थ्य कार्यक्रमों का समग्र अध्ययन करना चाहिए। यह विषय प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार—तीनों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
