चंडीपुरा वायरस (CHPV) प्रकोप पर केंद्र की सक्रिय कार्रवाई: राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (NJORT) की तैनाती और सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी को मजबूती
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने चंडीपुरा वायरस (CHPV) के प्रकोप से निपटने के लिए गुजरात और राजस्थान में राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (NJORT) तैनात किया है, जिसमें NCDC, ICMR और DAHD के विशेषज्ञ शामिल हैं। चंडीपुरा वायरस एक RNA वायरस है, जो मुख्यतः सैंड फ्लाई के माध्यम से फैलता है और विशेष रूप से बच्चों में तीव्र ज्वर (AFI) तथा तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) का कारण बन सकता है। वायरस के संचरण, आनुवंशिक संरचना और प्रभावी नियंत्रण उपायों के अध्ययन के लिए NIV, NIE, ICMR-NIVCR और NIVEDI सहित कई राष्ट्रीय संस्थान संयुक्त रूप से अनुसंधान कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में IDSP के तहत सक्रिय रोग निगरानी, सामुदायिक सर्वेक्षण, प्रयोगशाला परीक्षण, संपर्क अन्वेषण और वेक्टर नियंत्रण उपायों को तेज किया गया है, ताकि संक्रमण के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने चंडीपुरा वायरस रोग (Chandipura Virus Disease-CHPV) के प्रकोप से निपटने के लिए गुजरात और राजस्थान में राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (National Joint Outbreak Response Team - NJORT) तैनात किया है। इस दल में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) के विशेषज्ञ शामिल हैं। इसका उद्देश्य रोग की पहचान, निगरानी, उपचार एवं नियंत्रण उपायों को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत करना है।
चंडीपुरा वायरस (CHPV) क्या है?
चंडीपुरा वायरस (CHPV) एक RNA वायरस है, जो रैब्डोविरिडी (Rhabdoviridae) परिवार के Vesiculovirus वंश से संबंधित है। इसका नाम महाराष्ट्र के चंडीपुरा गाँव पर रखा गया, जहाँ इसे पहली बार वर्ष 1965 में पहचाना गया था। यह वायरस मुख्यतः सैंड फ्लाई (Sand Fly) के माध्यम से फैलता है तथा कुछ मामलों में अन्य रक्त-चूषक कीट भी वाहक (Vectors) हो सकते हैं। यह संक्रमण विशेष रूप से बच्चों में तीव्र ज्वर (Acute Febrile Illness - AFI) तथा तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome - AES) का कारण बन सकता है।
राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (NJORT) की भूमिका
NJORT का गठन विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर महामारी विज्ञान (Epidemiology), रोग निगरानी (Disease Surveillance), प्रयोगशाला परीक्षण, रोगी प्रबंधन, वेक्टर नियंत्रण तथा राज्य सरकारों के साथ समन्वय सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। यह दल संक्रमण के स्रोत, प्रसार के कारणों तथा प्रभावी नियंत्रण रणनीतियों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगा और राज्यों को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
बहु-संस्थागत (Multi-Agency) अनुसंधान का महत्व
प्रकोप की व्यापक जांच के लिए राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV), राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (NIE), राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग अनुसंधान संस्थान (ICMR-NIVCR) तथा राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान (NIVEDI) सहित कई संस्थान संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। इनके अध्ययन का उद्देश्य वायरस की आनुवंशिक संरचना (Genomics), संचरण तंत्र (Transmission Dynamics), वेक्टर की पहचान, रोग की गंभीरता तथा भविष्य के उपचार एवं रोकथाम के उपायों को बेहतर बनाना है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं रोग निगरानी की रणनीति
प्रभावित क्षेत्रों में एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (Integrated Disease Surveillance Programme - IDSP) के अंतर्गत निगरानी को सुदृढ़ किया गया है। स्वास्थ्य विभाग AFI (Acute Febrile Illness) और AES (Acute Encephalitis Syndrome) के मामलों की सक्रिय निगरानी कर रहा है। साथ ही सामुदायिक सर्वेक्षण (Community Surveillance), संपर्क अन्वेषण (Contact Tracing), प्रयोगशाला परीक्षण तथा वेक्टर नियंत्रण उपाय अपनाए जा रहे हैं, ताकि संक्रमण के प्रसार को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
UPSC परीक्षा के लिए मुख्य तथ्य (Prelims + Mains)
चंडीपुरा वायरस (CHPV) – RNA वायरस; Rhabdoviridae परिवार का सदस्य।
प्रथम पहचान – 1965, चंडीपुरा (महाराष्ट्र)।
प्रमुख वाहक – Sand Fly (Phlebotomine Sand Fly)।
प्रमुख लक्षण – Acute Febrile Illness (AFI) एवं Acute Encephalitis Syndrome (AES)।
प्रमुख संस्थाएँ – NCDC, ICMR, NIV, NIE, NIVEDI, DAHD।
निगरानी कार्यक्रम – Integrated Disease Surveillance Programme (IDSP)।
वर्तमान में CHPV के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा या लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं है; उपचार मुख्यतः समर्थनात्मक (Supportive Care) पर आधारित है।
