COFO-28 में भारत का वन एवं भूदृश्य पुनर्स्थापन मॉडल: सतत वन प्रबंधन, कार्बन सिंक और जलवायु-लचीले पारिस्थितिकी तंत्र पर जोर
भारत ने रोम में आयोजित FAO के COFO-28 में वन एवं भूदृश्य पुनर्स्थापन, सतत वन प्रबंधन और जलवायु कार्रवाई के प्रयासों को प्रस्तुत किया। भारत का वन एवं वृक्ष आवरण 82.74 मिलियन हेक्टेयर (25.17%) है तथा देश ने 2035 तक 3.5–4.0 बिलियन टन CO₂ समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक का लक्ष्य रखा है। Bonn Challenge के तहत भारत ने 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर क्षरित भूमि पुनर्स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें 21.76 मिलियन हेक्टेयर पर कार्य हो चुका है। Aravalli Green Wall जैसी पहलें भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु लचीलेपन को बढ़ावा देते हुए वन पुनर्स्थापन को समुदायों की आजीविका से जोड़ती हैं।
भारत ने रोम में आयोजित FAO की 28वीं Committee on Forestry (COFO-28) में वन एवं भूदृश्य पुनर्स्थापन के क्षेत्र में अपनी पहलों को प्रस्तुत किया। COFO, FAO का वानिकी संबंधी सर्वोच्च अंतर-सरकारी निकाय है और यह प्रत्येक दो वर्ष में बैठक करता है। 2026 का सत्र 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित हो रहा है तथा इसका व्यापक फोकस “Forests for food, resilience and prosperity” पर है।
भारत का वन एवं वृक्ष आवरण और कार्बन सिंक
भारत ने COFO में बताया कि देश का वन एवं वृक्ष आवरण 82.74 मिलियन हेक्टेयर, यानी भौगोलिक क्षेत्र का 25.17% है। FAO के Global Forest Resources Assessment 2025 के अनुसार भारत कुल वन क्षेत्र के मामले में विश्व में 9वें और वार्षिक शुद्ध वन क्षेत्र वृद्धि के मामले में तीसरे स्थान पर है। भारत ने 2021 तक अतिरिक्त 2.29 बिलियन टन CO₂ समतुल्य कार्बन सिंक बनाया है और 2035 तक 2005 के स्तर की तुलना में 3.5–4.0 बिलियन टन CO₂ समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक का लक्ष्य रखा है।
बॉन चैलेंज और भूमि पुनर्स्थापन
भारत ने Bonn Challenge के अंतर्गत 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर क्षरित एवं वनों से वंचित भूमि को पुनर्स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई है। जून 2026 तक भारत ने इस लक्ष्य के विरुद्ध 21.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि को पुनर्स्थापन प्रयासों के अंतर्गत लाया था। वैश्विक बॉन चैलेंज का लक्ष्य 2030 तक 350 मिलियन हेक्टेयर क्षरित एवं वनों से प्रभावित भूमि को पुनर्स्थापित करना है। यह पहल भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण, जैव विविधता ह्रास और जलवायु परिवर्तन से निपटने से जुड़ी है।
अरावली ग्रीन वॉल और पारिस्थितिकी तंत्र आधारित पुनर्स्थापन
भारत ने Aravalli Green Wall Initiative को भी अपने landscape restoration approach के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। लगभग 6.45 मिलियन हेक्टेयर क्षरित भूमि को पुनर्स्थापन के लिए चिन्हित किया गया है। यह पहल गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से जुड़े अरावली भू-दृश्य में हरित आवरण, भूमि संरक्षण और पारिस्थितिक बहाली को बढ़ावा देती है। इसका महत्व मरुस्थलीकरण नियंत्रण, मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता तथा जल एवं जलवायु लचीलापन बढ़ाने के संदर्भ में है।
वन पुनर्स्थापन में जलवायु, खाद्य सुरक्षा और समुदायों का संबंध
COFO-28 में भारत ने सतत वन प्रबंधन (Sustainable Forest Management) को केवल वृक्षारोपण तक सीमित न रखते हुए व्यापक landscape restoration से जोड़ने पर जोर दिया। वन खाद्य, ईंधन, चारा, आजीविका, जल संरक्षण और जैव विविधता जैसी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ प्रदान करते हैं। इसलिए वन पुनर्स्थापन को स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं, जलवायु अनुकूलन और आजीविका के साथ जोड़ना आवश्यक है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग में देश-विशिष्ट क्रियान्वयन, क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, मापनीय परिणाम और विकासशील देशों के लिए वित्तीय संसाधनों पर भी जोर दिया।
UPSC के लिए व्यापक प्रासंगिकता
यह विषय GS Paper-III के पर्यावरण, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण और सतत विकास से सीधे जुड़ा है। साथ ही इसे UNCCD, Bonn Challenge, FAO, Sustainable Forest Management, Carbon Sink, Land Degradation Neutrality और ecosystem restoration से जोड़ा जा सकता है। Mains में प्रश्न हो सकता है—“भारत में वन एवं भूदृश्य पुनर्स्थापन को जलवायु कार्रवाई और आजीविका सुरक्षा के साथ कैसे एकीकृत किया जा सकता है?” उत्तर में Bonn Challenge, Aravalli Green Wall, Green India Mission, समुदाय आधारित संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग जैसे पहलुओं का उल्लेख किया जा सकता है। वर्तमान COFO-28 में भारत ने भी इन्हीं क्षेत्रों में country-driven implementation और measurable outcomes पर जोर दिया है।
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