तमिलनाडु की ‘अन्नपूर्णी सुपर सिक्स एलपीजी योजना’: स्वच्छ ऊर्जा, DBT और लक्षित कल्याण की नई पहल
तमिलनाडु सरकार ने पात्र परिवारों के घरेलू एलपीजी खर्च को कम करने के लिए अन्नपूर्णी सुपर सिक्स एलपीजी योजना की घोषणा की है, जिसे जनवरी 2027 में पोंगल से लागू किया जाएगा। योजना के तहत लाभार्थी पहले एलपीजी सिलेंडर खरीदेंगे और बाद में खर्च की राशि DBT के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में प्रतिपूर्ति की जाएगी। ₹2.5 लाख तक वार्षिक आय वाले परिवारों, मध्यम व सीमांत किसानों तथा दिव्यांगजनों को लक्षित करते हुए इसके लिए लगभग ₹4,000 करोड़ का वार्षिक बजट प्रस्तावित है। यह योजना स्वच्छ ऊर्जा, वित्तीय सहायता और महिला स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के साथ SDG-3, SDG-5 और SDG-7 से भी संबंधित है।
तमिलनाडु सरकार ने अन्नपूर्णी सुपर सिक्स एलपीजी योजना की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य पात्र परिवारों पर घरेलू एलपीजी की लागत का बोझ कम करना है। यह योजना 24 अगस्त 2026 को राज्य विधानसभा में प्रस्तुत की गई और इसे जनवरी 2027 में पोंगल के अवसर से लागू करने की योजना है।
प्रतिपूर्ति आधारित मॉडल और DBT
इस योजना में लाभार्थियों को सिलेंडर सीधे मुफ्त नहीं दिया जाएगा। पात्र परिवार पहले घरेलू एलपीजी सिलेंडर खरीदेंगे और उसके बाद खर्च की गई राशि की प्रतिपूर्ति सीधे बैंक खाते में की जाएगी। इस व्यवस्था में Direct Benefit Transfer (DBT) पारदर्शिता बढ़ाने और लाभार्थियों तक सीधे सहायता पहुंचाने का प्रमुख माध्यम होगा।
लक्षित लाभार्थी समूह
योजना का लाभ उन परिवारों को दिया जाएगा जिनकी वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक नहीं है। इसके अतिरिक्त मध्यम एवं सीमांत किसान तथा दिव्यांगजन भी पात्र श्रेणियों में शामिल हैं। यह लक्षित कल्याणकारी नीति (Targeted Welfare Approach) का उदाहरण है।
वित्तीय प्रावधान और राजकोषीय प्रभाव
तमिलनाडु सरकार ने योजना के लिए लगभग ₹4,000 करोड़ का वार्षिक बजट प्रस्तावित किया है। इससे घरेलू ऊर्जा व्यय में कमी आ सकती है, लेकिन साथ ही राज्य के लिए राजकोषीय प्रबंधन, सब्सिडी का बोझ और लाभार्थियों की सही पहचान जैसी चुनौतियां भी महत्वपूर्ण होंगी।
स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य से संबंध
एलपीजी को पारंपरिक ठोस ईंधनों की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन माना जाता है। इसका उपयोग बढ़ने से घरों में धुएं के संपर्क को कम करने और विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार की संभावना है। यह SDG-3 (अच्छा स्वास्थ्य), SDG-5 (लैंगिक समानता) और SDG-7 (सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा) से भी संबंधित है।
UPSC के लिए व्यापक संदर्भ
यह योजना भारत की सहकारी संघवाद व्यवस्था, राज्य-स्तरीय कल्याणकारी नीतियों, DBT, वित्तीय समावेशन और स्वच्छ ऊर्जा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। इसे केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के साथ जोड़कर समझा जा सकता है। UPSC मुख्य परीक्षा में इस विषय को “ऊर्जा पहुंच, लक्षित सब्सिडी, सामाजिक कल्याण और राजकोषीय स्थिरता” के समन्वय के उदाहरण के रूप में लिखा जा सकता है।
