DRDO–University of Houston का BAM-H24 पेटेंट — स्वदेशी उच्च-ऊर्जा प्रणोदन तकनीक की दिशा में कदम
DRDO और University of Houston के वैज्ञानिकों ने उच्च-ऊर्जा यौगिक BAM-H24 से संबंधित तकनीक का पेटेंट प्राप्त किया है, जो भविष्य की ठोस रॉकेट प्रणोदन प्रणालियों में उपयोगी हो सकता है। बोरॉन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन से युक्त BAM-H24 में उच्च रासायनिक एवं तापीय स्थिरता, प्रभाव-घर्षण प्रतिरोध तथा कम नमी-अवशोषण जैसी विशेषताएँ हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें बेहतर Specific Impulse और कम Ignition Delay की संभावना है, जिससे प्रणोदन दक्षता और परिचालन सुरक्षा में सुधार हो सकता है। यह उपलब्धि रक्षा-शैक्षणिक सहयोग, उन्नत सामग्री विज्ञान और स्वदेशी रक्षा एवं एयरोस्पेस तकनीक के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और University of Houston के वैज्ञानिकों ने एक नए उच्च-ऊर्जा यौगिक BAM-H24 से संबंधित तकनीक के लिए पेटेंट प्राप्त किया है। यह यौगिक भविष्य की ठोस रॉकेट प्रणोदन (Solid Rocket Propulsion) प्रणालियों में उपयोगी हो सकता है।
BAM-H24 में मुख्य रूप से बोरॉन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन तत्व शामिल हैं।
BAM-H24 के प्रमुख गुण
BAM-H24 की प्रमुख विशेषताओं में उच्च रासायनिक एवं तापीय स्थिरता तथा प्रभाव और घर्षण के प्रति अपेक्षाकृत अधिक प्रतिरोध शामिल हैं।
इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि उच्च-ऊर्जा सामग्रियों के निर्माण, परिवहन और भंडारण के दौरान सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चुनौती होती है।
एक अन्य विशेषता इसकी कम नमी-अवशोषण क्षमता है। यानी यह वातावरण से नमी को आसानी से अवशोषित नहीं करता, जिससे सामग्री की स्थिरता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
रॉकेट प्रणोदन में संभावित उपयोग
वैज्ञानिकों के अनुसार BAM-H24 में बेहतर विशिष्ट आवेग (Specific Impulse) और कम प्रज्वलन विलंब (Ignition Delay) की संभावना है।
Specific Impulse: रॉकेट प्रणोदक की दक्षता का प्रमुख मापदंड है। सामान्यतः अधिक विशिष्ट आवेग का अर्थ प्रणोदक से बेहतर प्रदर्शन होता है।
Ignition Delay: प्रज्वलन प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रणोदक की प्रभावी प्रतिक्रिया/दहन शुरू होने में लगने वाला समय।
यदि अपेक्षित प्रदर्शन व्यावहारिक परीक्षणों में सिद्ध होता है, तो BAM-H24 अधिक प्रभावी ठोस प्रणोदन प्रणालियों के विकास में योगदान दे सकता है।
रक्षा और रणनीतिक क्षेत्र में महत्व
आधुनिक मिसाइलों और रॉकेट प्रणालियों में ऊर्जा सामग्री (Energetic Materials) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसी सामग्रियों में ऊर्जा घनत्व, स्थिरता और सुरक्षा के बीच संतुलन आवश्यक होता है।
BAM-H24 जैसी सामग्री भविष्य में:
प्रणोदन दक्षता बढ़ाने,
परिचालन सुरक्षा सुधारने,
ऊर्जा-सघन प्रणोदक विकसित करने तथा
उन्नत रक्षा प्रणालियों की स्वदेशी क्षमता बढ़ाने
में उपयोगी हो सकती है।
अकादमिक–रक्षा सहयोग का उदाहरण
BAM-H24 का विकास रक्षा अनुसंधान संस्थान और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग के महत्व को दर्शाता है।
ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं डॉ. मुद्दामर्री हनुमंथा राव और डॉ. मुरलीधरन कृष्णमूर्ति के शोध से जुड़ी इस तकनीक में अकादमिक क्षेत्र की मूलभूत वैज्ञानिक विशेषज्ञता और रक्षा संस्थानों की अनुप्रयोग क्षमता का समन्वय दिखाई देता है।
ऐसे सहयोग से उन्नत सामग्री विज्ञान, रसायन विज्ञान, प्रणोदन और एयरोस्पेस तकनीक में अनुसंधान को बढ़ावा मिल सकता है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व
यह समाचार GS Paper-III के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा रक्षा से संबंधित विषयों के लिए महत्वपूर्ण है।
ऊर्जा सामग्री: उच्च-ऊर्जा यौगिक उन्नत प्रणोदन प्रणालियों का महत्वपूर्ण घटक हैं।
रक्षा आत्मनिर्भरता: स्वदेशी प्रणोदन तकनीक भारत की रणनीतिक क्षमता को मजबूत कर सकती है।
Material Science: बोरॉन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन आधारित यौगिकों का अध्ययन उन्नत सामग्री विज्ञान से जुड़ा है।
Space & Aerospace: बेहतर प्रणोदक रॉकेट प्रणालियों की दक्षता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।
Academia–Industry/Defence Linkage: विश्वविद्यालयों और रक्षा अनुसंधान संस्थानों का सहयोग नवाचार को बढ़ावा देता है।
Patent & Innovation: पेटेंट वैज्ञानिक अनुसंधान को तकनीकी नवाचार और संभावित व्यावसायिक/रणनीतिक अनुप्रयोग से जोड़ता है।