eRASSU J0608 की खोज से गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अध्ययन को नई दिशा, 6.24 मिनट में परिक्रमा करते हैं दो श्वेत बौने
भारतीय शोधकर्ताओं के नेतृत्व वाली टीम ने eRASSU J0608 नामक अल्ट्राकॉम्पैक्ट डबल-व्हाइट-ड्वार्फ बाइनरी का अध्ययन किया, जिसमें दोनों श्वेत बौने लगभग 6.24 मिनट में एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं। इस प्रणाली में Direct-impact Accretion के कारण एक्स-रे उत्सर्जन होता है, जिसमें पदार्थ बिना अभिवृद्धि डिस्क बनाए सीधे साथी श्वेत बौने पर गिरता है। इसकी कक्षीय अवधि तेजी से घट रही है, जिसका संभावित कारण गुरुत्वाकर्षण विकिरण द्वारा ऊर्जा और कोणीय संवेग का नुकसान है; अनुमानित Chirp Mass लगभग 0.43 सौर द्रव्यमान है। eRASSU J0608 भविष्य में LISA जैसे अंतरिक्ष-आधारित गुरुत्वाकर्षण तरंग मिशन के लिए एक संभावित Verification Source बन सकता है।
भारतीय शोधकर्ताओं के नेतृत्व वाले एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक दल ने eRASSU J060839.5–704014 (eRASSU J0608) नामक एक अत्यंत सघन द्विआधारी प्रणाली का अध्ययन किया है। इसमें दो श्वेत बौने (White Dwarfs) शामिल हैं, जो केवल 374.15013 सेकंड यानी लगभग 6.24 मिनट में एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं। यह प्रणाली तेजी से विकसित हो रहे अतिसंपीड़ित डबल-व्हाइट-ड्वार्फ बाइनरी सिस्टमों में शामिल है। शोध के निष्कर्ष 10 अगस्त 2026 को The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित हुए।
श्वेत बौने और अल्ट्राकॉम्पैक्ट बाइनरी:
श्वेत बौने ऐसे तारकीय अवशेष हैं, जो सामान्यतः तब बनते हैं जब कम या मध्यम द्रव्यमान वाले तारे अपना परमाणु ईंधन समाप्त कर बाहरी परतें छोड़ देते हैं। eRASSU J0608 में दो श्वेत बौने अत्यंत कम दूरी पर स्थित हैं। इसकी असाधारण रूप से छोटी कक्षीय अवधि इसे अल्ट्राकॉम्पैक्ट बाइनरी का महत्वपूर्ण उदाहरण बनाती है और तारकीय विकास के अंतिम चरणों को समझने में वैज्ञानिकों के लिए उपयोगी है।
Direct-impact Accretion से उत्पन्न एक्स-रे:
इस प्रणाली की विशेषता यह है कि एक श्वेत बौने से निकलने वाला पदार्थ दूसरे श्वेत बौने पर बिना सामान्य अभिवृद्धि डिस्क (Accretion Disk) बनाए सीधे गिरता है। इसे Direct-impact Accretion कहा जाता है। पदार्थ के अत्यधिक वेग से दूसरे श्वेत बौने की सतह से टकराने पर बहुत गर्म क्षेत्र बनता है, जिससे X-ray उत्सर्जन होता है। वैज्ञानिकों ने लगभग 1.5–1.7 मिलियन केल्विन तापमान वाले तापीय घटकों की पहचान की।
कक्षीय क्षय और गुरुत्वाकर्षण विकिरण:
लगभग साढ़े तीन वर्षों के अवलोकन में वैज्ञानिकों ने पाया कि इसकी कक्षीय अवधि लगभग 4.7 × 10⁻¹¹ सेकंड प्रति सेकंड की दर से घट रही है। इसका संभावित कारण गुरुत्वाकर्षण विकिरण (Gravitational Radiation) के कारण कक्षीय ऊर्जा और कोणीय संवेग का नुकसान है। अध्ययन में प्रणाली का अनुमानित Chirp Mass लगभग 0.43 सौर द्रव्यमान निकाला गया है। Chirp Mass वह प्रभावी द्रव्यमान है जो बाइनरी प्रणाली से उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण तरंगों की आवृत्ति और विकास को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
LISA और गुरुत्वाकर्षण तरंग खगोल विज्ञान:
eRASSU J0608 भविष्य में गुरुत्वाकर्षण तरंगों की पहचान के लिए एक संभावित Verification Source बन सकता है। विशेष रूप से यह LISA (Laser Interferometer Space Antenna) के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। LISA यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का प्रस्तावित अंतरिक्ष-आधारित गुरुत्वाकर्षण तरंग मिशन है, जिसमें लगभग लाखों किलोमीटर की दूरी पर स्थित तीन अंतरिक्ष यान शामिल होंगे। इसका उद्देश्य मुख्यतः कम आवृत्ति वाली गुरुत्वाकर्षण तरंगों का अध्ययन करना है।
UPSC के लिए वैज्ञानिक महत्व:
यह खोज तारकीय विकास, श्वेत बौने, द्विआधारी तारकीय प्रणालियां, गुरुत्वाकर्षण तरंगें और मल्टी-मैसेंजर खगोल विज्ञान जैसे विषयों से जुड़ी है। eRASSU J0608 जैसे स्रोतों का विद्युतचुंबकीय अवलोकन भविष्य में गुरुत्वाकर्षण तरंग संकेतों के साथ मिलाकर किया जा सकता है। इससे अत्यधिक सघन तारकीय प्रणालियों की संरचना, विकास और गुरुत्वाकर्षण के व्यवहार को समझने में सहायता मिलेगी। इसकी सटीक दूरी अभी अनिश्चित है, इसलिए भविष्य के अतिरिक्त एक्स-रे और दृश्य अवलोकन इसके भौतिक गुणों को अधिक स्पष्ट कर सकते हैं।