मिजोरम की लालरीथांगी बनीं FAO की ‘100 महिला नायिकाओं’ में शामिल, स्ट्रॉबेरी खेती से ग्रामीण उद्यमिता की मिसाल
मिजोरम के लॉन्ग्टलाई जिले की लालरीथांगी को कृषि-खाद्य प्रणालियों और ग्रामीण विकास में योगदान के लिए FAO की ‘100 Women Heroes’ पहल में चुना गया है। पूर्व शिक्षिका लालरीथांगी ने 2024 में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की और अब दो हेक्टेयर भूमि पर 10,000 से अधिक पौधों के साथ एवोकाडो व केले की भी खेती करती हैं। 2025 में उनकी स्ट्रॉबेरी खेती से 10 लाख रुपये से अधिक की आय हुई तथा उन्होंने स्ट्रॉबेरी वाइन जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद भी तैयार किए। यह सम्मान International Year of the Woman Farmer 2026 से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं के योगदान और संसाधनों तक उनकी समान पहुंच को बढ़ावा देना है।
मिजोरम के लॉन्ग्टलाई जिले की लालरीथांगी को कृषि-खाद्य प्रणालियों और ग्रामीण विकास में योगदान के लिए FAO की ‘100 Women Heroes’ पहल के लिए चुना गया है। यह पहल वर्ष 2026 के International Year of the Woman Farmer (IYWF 2026) से जुड़ी है और दुनिया भर की उन महिलाओं को पहचान देती है, जो कृषि-खाद्य प्रणालियों में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
शिक्षक से सफल किसान तक का सफर:
लालरीथांगी ने IGNOU से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की और निजी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी के बजाय कृषि को अपना व्यवसाय बनाया। यह परिवर्तन ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि-आधारित उद्यमिता और वैकल्पिक आजीविका की संभावनाओं को दर्शाता है।
स्ट्रॉबेरी खेती से आय में वृद्धि:
उन्होंने वर्ष 2024 में लगभग 1,000 स्ट्रॉबेरी पौधों से खेती शुरू की। प्रारंभिक सफलता के बाद उन्होंने उत्पादन बढ़ाया और अब लगभग दो हेक्टेयर भूमि पर 10,000 से अधिक स्ट्रॉबेरी पौधों के साथ एवोकाडो और केले जैसी फसलों की भी खेती करती हैं। वर्ष 2025 में उनकी स्ट्रॉबेरी खेती से 10 लाख रुपये से अधिक की आय हुई। यह उदाहरण फसल विविधीकरण, उच्च-मूल्य वाली बागवानी और ग्रामीण आय-वृद्धि के महत्व को दर्शाता है।
तकनीक और स्थानीय ज्ञान का उपयोग:
लालरीथांगी ने स्ट्रॉबेरी खेती का औपचारिक प्रशिक्षण न होने के बावजूद ऑनलाइन कृषि संबंधी सामग्री और अन्य किसानों के अनुभवों से जानकारी प्राप्त की। उनकी कहानी कृषि क्षेत्र में डिजिटल ज्ञान, किसान-से-किसान सीखने और स्थानीय नवाचार की भूमिका को रेखांकित करती है। साथ ही, उपज से स्ट्रॉबेरी वाइन जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करना Value Addition और कृषि-आधारित उद्यमिता का उदाहरण है।
International Year of the Woman Farmer 2026:
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2026 को International Year of the Woman Farmer घोषित किया है। इसका उद्देश्य कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को पहचानना तथा भूमि, वित्त, तकनीक, शिक्षा, कृषि-विस्तार सेवाओं और निर्णय-निर्माण तक उनकी पहुंच में मौजूद लैंगिक अंतर को कम करना है। FAO इस वर्ष की गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व:
यह समाचार महिला सशक्तिकरण, कृषि विविधीकरण, बागवानी, ग्रामीण रोजगार, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, कृषि-आधारित MSME/उद्यमिता और सतत ग्रामीण विकास जैसे विषयों से जुड़ा है। FAO के अनुसार महिलाओं की कृषि-खाद्य प्रणालियों में भूमिका उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, व्यापार और वितरण तक फैली हुई है, लेकिन उन्हें भूमि, वित्त, तकनीक और सेवाओं तक समान पहुंच में अभी भी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए महिला किसानों को संसाधनों और बाजारों तक बेहतर पहुंच देना SDG-2 (Zero Hunger), SDG-5 (Gender Equality) और समावेशी ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है।