FAO खाद्य मूल्य सूचकांक जुलाई 2026 में जनवरी 2023 के बाद सर्वोच्च स्तर पर पहुँचा
FAO के अनुसार जुलाई 2026 में FAO Food Price Index 131.1 अंक पर पहुंच गया, जो जून की तुलना में 0.6% अधिक और जनवरी 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है। अनाज सूचकांक में 3.4% और गेहूं की कीमतों में 5.8% वृद्धि हुई, जिसका कारण काला सागर क्षेत्र में आपूर्ति जोखिम और प्रतिकूल मौसम रहा। वनस्पति तेल की कीमतों में 2% तथा चीनी की कीमतों में 5.6% वृद्धि हुई, जबकि मांस और डेयरी कीमतों में क्रमशः 2.8% और 0.7% की गिरावट दर्ज की गई। खाद्य कीमतों में वृद्धि जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों और जैव ईंधन की मांग से प्रभावित हुई, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा और खाद्य मुद्रास्फीति की चिंता बढ़ी।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, जुलाई 2026 में FAO Food Price Index (FFPI) बढ़कर 131.1 अंक हो गया, जो जून के 130.3 अंक से 0.6% अधिक है। यह जनवरी 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है। हालांकि, सूचकांक अभी भी मार्च 2022 के रिकॉर्ड शिखर से 18.2% नीचे है। FAO Food Price Index अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रमुख खाद्य-वस्तुओं की कीमतों में मासिक परिवर्तन को मापता है।
अनाज और गेहूँ की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि
जुलाई में FAO Cereal Price Index में 3.4% की वृद्धि हुई। विशेष रूप से वैश्विक गेहूँ कीमतों में 5.8% की वृद्धि दर्ज की गई। इसके पीछे काला सागर क्षेत्र से निर्यात में संभावित व्यवधान, निर्यात अवसंरचना को नुकसान तथा प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में हीटवेव और प्रतिकूल मौसम से फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका प्रमुख कारण रहे। काला सागर क्षेत्र वैश्विक अनाज व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र होने के कारण यहां आपूर्ति में व्यवधान का अंतरराष्ट्रीय खाद्य कीमतों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
वनस्पति तेल और चीनी की कीमतों में भी तेजी
जुलाई में वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक में 2% की वृद्धि हुई। कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती और बायोडीजल की मांग ने वनस्पति तेलों की कीमतों को समर्थन दिया। वहीं, चीनी मूल्य सूचकांक में 5.6% की वृद्धि हुई। यूरोप और एशिया में प्रतिकूल मौसम से उत्पादन संबंधी चिंताओं तथा ब्राजील में गन्ने से इथेनॉल की बढ़ती मांग ने चीनी बाजार को प्रभावित किया। यह खाद्य और ऊर्जा बाजारों के बीच बढ़ते Food-Fuel Nexus को दर्शाता है।
मांस और डेयरी कीमतों में गिरावट ने समग्र वृद्धि को सीमित किया
सभी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई। जुलाई में FAO Meat Price Index में 2.8% की गिरावट आई, जबकि Dairy Price Index में 0.7% की कमी दर्ज की गई। चिकन, पोर्क और बीफ की कीमतों में गिरावट आई, जबकि ओशिनिया से सीमित आपूर्ति के कारण भेड़ के मांस की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचीं। इससे स्पष्ट होता है कि वैश्विक खाद्य कीमतें एक समान दिशा में नहीं चलतीं, बल्कि प्रत्येक commodity की आपूर्ति, मांग, मौसम और व्यापार परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं।
खाद्य कीमतों में वृद्धि के पीछे जलवायु और भू-राजनीतिक कारक
वर्तमान वृद्धि को केवल बाजार की सामान्य मांग-आपूर्ति से नहीं समझा जा सकता। हीटवेव और अन्य चरम मौसम घटनाएं, काला सागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में बदलाव तथा जैव ईंधन की बढ़ती मांग वैश्विक खाद्य बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। यह स्थिति Climate Change → Crop Yield → Global Supply → Food Prices → Food Inflation की श्रृंखला को स्पष्ट करती है। खाद्य कीमतों में अस्थिरता विशेष रूप से उन देशों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है जो अपनी खाद्य आवश्यकताओं के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर हैं।
UPSC के लिए महत्व: Food Security और Inflation का वैश्विक आयाम
यह समाचार UPSC के लिए GS Paper-III के अंतर्गत कृषि, खाद्य सुरक्षा, मुद्रास्फीति, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। भारत जैसे बड़े कृषि-उत्पादक देश पर वैश्विक खाद्य कीमतों का प्रभाव घरेलू WPI/CPI खाद्य मुद्रास्फीति, आयात लागत, MSP एवं कृषि व्यापार नीति के माध्यम से पड़ सकता है। साथ ही, यह विषय SDG-2 (Zero Hunger), जलवायु-लचीली कृषि, खाद्य आपूर्ति शृंखला और वैश्विक दक्षिण की खाद्य सुरक्षा से जोड़ा जा सकता है। UPSC उत्तर में यह तर्क महत्वपूर्ण है कि खाद्य सुरक्षा केवल पर्याप्त उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि वहनीय कीमत, स्थिर आपूर्ति और जलवायु एवं भू-राजनीतिक जोखिमों से सुरक्षा भी आवश्यक है।
