FAST-DS 2026: छोटे करदाताओं के लिए विदेशी अघोषित संपत्तियों के स्वैच्छिक प्रकटीकरण की योजना
FAST-DS 2026 केंद्र सरकार की एकमुश्त स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना है, जिसके तहत पात्र छोटे करदाता पूर्व में अघोषित विदेशी आय या संपत्तियों को घोषित कर सकते हैं। योजना में ₹1 करोड़ तक की अघोषित एवं कर-मुक्त विदेशी संपत्ति/आय पर 30% कर और उतनी ही अतिरिक्त राशि, जबकि ₹5 करोड़ तक की पहले से कर-चुकाई या गैर-निवासी रहते अर्जित संपत्ति पर ₹1 लाख शुल्क का प्रावधान है। विदेशी परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के लिए 31 मार्च 2026 महत्वपूर्ण तिथि है और विदेशी बैंक खाते, शेयर, ESOPs/RSUs, बॉन्ड व अचल संपत्तियां इसके दायरे में आ सकती हैं। यह योजना CRS, FATCA और डिजिटल Foreign Assets Information जैसी व्यवस्थाओं के बढ़ते उपयोग के बीच कर अनुपालन, वित्तीय पारदर्शिता और अघोषित विदेशी संपत्तियों के नियमितीकरण को बढ़ावा देती है।
FAST-DS (Foreign Assets of Small Taxpayers – Disclosure Scheme), 2026 केंद्र सरकार की एक एकमुश्त स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना है। इसका उद्देश्य ऐसे छोटे करदाताओं को अपने कुछ पूर्व में अघोषित विदेशी आय या विदेशी परिसंपत्तियों को नियमित करने का अवसर देना है, जिन्हें आयकर रिटर्न में घोषित नहीं किया गया था। वैध घोषणा और निर्धारित कर/शुल्क के भुगतान के बाद संबंधित परिसंपत्तियों के संबंध में Black Money Act, 2015 के तहत दंड और अभियोजन से वैधानिक प्रतिरक्षा का प्रावधान है।
किन करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है?
यह योजना विशेष रूप से विदेश में काम कर चुके भारतीयों, वापस लौटे NRIs, छात्रों, युवा पेशेवरों तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, विदेशी बैंक खाते, विदेशी शेयर, ESOPs/RSUs, विदेशी म्यूचुअल फंड, बॉन्ड या विदेश स्थित अचल संपत्ति जैसी परिसंपत्तियों को पूर्व में घोषित न करने की स्थिति में यह व्यवस्था प्रासंगिक हो सकती है। वर्तमान में Non-Resident या RNOR व्यक्ति भी कुछ परिस्थितियों में पात्र हो सकते हैं, यदि संबंधित अवधि में वे भारत के निवासी थे।
योजना की दो प्रमुख श्रेणियां
पहली श्रेणी में ऐसी विदेशी आय या संपत्ति आती है, जिस पर पहले कर नहीं चुकाया गया और जिसका खुलासा भी नहीं किया गया। इसके लिए कुल अघोषित विदेशी आय/संपत्ति की सीमा ₹1 करोड़ तक है। इस श्रेणी में विदेशी संपत्ति के उचित बाजार मूल्य या अघोषित विदेशी आय पर 30% कर तथा उसके बराबर अतिरिक्त राशि का प्रावधान है, अर्थात प्रभावी रूप से संबंधित राशि पर 60% तक भुगतान हो सकता है। दूसरी श्रेणी में ऐसी विदेशी संपत्ति आती है जो पहले से कर चुकाई गई आय से अर्जित हुई हो, लेकिन संपत्ति स्वयं घोषित न की गई हो, अथवा ऐसी संपत्ति जो व्यक्ति के Non-Resident रहते अर्जित हुई थी और बाद में भारत का निवासी बनने पर घोषित नहीं की गई। इस श्रेणी में परिसंपत्ति की सीमा ₹5 करोड़ तक है और ₹1 लाख का एकमुश्त शुल्क निर्धारित है।
विदेशी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन और प्रमुख दस्तावेज
FAST-DS में विदेशी परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के लिए 31 मार्च 2026 को महत्वपूर्ण मूल्यांकन तिथि माना गया है। विदेशी शेयर, प्रतिभूतियां, विदेशी कंपनियों में हिस्सेदारी तथा अन्य परिसंपत्तियों के लिए निर्धारित मूल्यांकन नियम लागू होंगे। यह प्रावधान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि करदाता को केवल संपत्ति की घोषणा ही नहीं, बल्कि उसकी वैध पहचान और निर्धारित मूल्यांकन के आधार पर देय राशि का निर्धारण भी करना होगा।
अंतरराष्ट्रीय कर पारदर्शिता से संबंध
FAST-DS को वैश्विक वित्तीय सूचना साझाकरण के बढ़ते दायरे के संदर्भ में समझना चाहिए। भारत को CRS (Common Reporting Standard) और FATCA (Foreign Account Tax Compliance Act) जैसे अंतरराष्ट्रीय सूचना-साझाकरण तंत्रों के माध्यम से विदेशी वित्तीय खातों और निवेश से संबंधित जानकारी प्राप्त होती है। जुलाई 2026 में आयकर विभाग ने e-Filing Portal पर Foreign Assets Information (FAI) सुविधा भी उपलब्ध कराई, जिसके माध्यम से करदाता विदेशों से प्राप्त अपनी वित्तीय परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी देख सकते हैं।
UPSC के लिए इसका व्यापक महत्व
FAST-DS केवल कर सुधार नहीं, बल्कि Tax Compliance, Black Money, International Tax Cooperation और Financial Transparency से जुड़ा महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार है। यह सरकार के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें जानबूझकर कर चोरी करने वालों पर कठोर कार्रवाई के साथ-साथ अनजाने में हुई reporting errors को सुधारने के लिए सीमित अवसर दिए जाते हैं। UPSC में इसे काला धन नियंत्रण, प्रत्यक्ष कर सुधार, वैश्वीकरण और कर प्रशासन में डिजिटल डेटा-साझाकरण के साथ जोड़ा जा सकता है। साथ ही, यह उदाहरण बताता है कि CRS/FATCA जैसे वैश्विक तंत्रों के कारण विदेशी परिसंपत्तियों को छिपाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है।
