G20 ऊर्जा प्रचुरता मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में चार प्रमुख सहमतियाँ, भारत ने ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग का समर्थन किया
14–16 सितंबर 2026 को ह्यूस्टन में आयोजित G20 Energy Abundance Ministerial Meeting में ऊर्जा सुरक्षा, वहनीयता और आपूर्ति-श्रृंखला लचीलेपन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में घरेलू ऊर्जा पहुंच और स्वच्छ खाना पकाने, ऊर्जा अवसंरचना के लिए बेहतर अनुमति प्रक्रियाओं तथा नियामकीय दक्षता पर सहमति बनी। G20 Water Reuse Initiative के तहत उपचारित जल के सुरक्षित पुन: उपयोग को बढ़ावा देने और जल संसाधनों पर दबाव कम करने पर जोर दिया गया। साथ ही Critical Minerals की विविधीकृत एवं लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए सहयोग, पुनर्चक्रण, निवेश और स्थानीय मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित किया गया।
14–16 सितंबर 2026 को अमेरिका के ह्यूस्टन, टेक्सास में G20 Energy Abundance Ministerial Meeting आयोजित हुई। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, वहनीयता, बुनियादी ढाँचे और आपूर्ति-श्रृंखला लचीलेपन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत की ओर से केंद्रीय विद्युत एवं आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। सम्मेलन में चार प्रमुख परिणामों पर सहमति बनी।
घरेलू ऊर्जा एवं स्वच्छ खाना पकाने की पहुंच:
पहला प्रमुख परिणाम घरेलू ऊर्जा तक किफायती और विश्वसनीय पहुंच बढ़ाने से संबंधित है। G20 ने देश-विशिष्ट परिस्थितियों के अनुरूप स्वच्छ खाना पकाने के समाधान अपनाने पर जोर दिया तथा विकासशील देशों में पारंपरिक बायोमास के स्थान पर LPG को एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में मान्यता दी। यह भारत के प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसे स्वच्छ खाना पकाने के प्रयासों से भी संबंधित है।
ऊर्जा अवसंरचना और नियामकीय दक्षता:
दूसरा परिणाम ऊर्जा एवं महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं के लिए अधिक प्रभावी, पारदर्शी, पूर्वानुमानित और सुव्यवस्थित अनुमति प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। G20 ने डिजिटल तकनीक और AI जैसे साधनों के उपयोग तथा सदस्य देशों के बीच अनुभव साझा करने की संभावना पर भी जोर दिया। भारत ने इस संदर्भ में National Single Window System, PARIVESH और PM Gati Shakti जैसी पहलों को अपने नियामकीय सुधारों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
जल पुन: उपयोग और जल सुरक्षा:
तीसरा परिणाम G20 Water Reuse Initiative है। इसके अंतर्गत उपचारित जल का उसके उपयोग के अनुरूप सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से पुन: उपयोग बढ़ाने की बात कही गई है। इसे कृषि, विनिर्माण, ऊर्जा उत्पादन, शहरी जल प्रबंधन और अन्य जल-गहन क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है। यह पहल स्वैच्छिक, गैर-निर्देशात्मक और गैर-बाध्यकारी है तथा इसका उद्देश्य ताजे जल संसाधनों पर दबाव कम करना और जल-लचीलापन बढ़ाना है।
महत्वपूर्ण खनिजों की लचीली आपूर्ति श्रृंखला:
चौथा प्रमुख परिणाम Critical Minerals से संबंधित है। लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और दुर्लभ मृदा तत्व जैसे महत्वपूर्ण खनिज ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रिक वाहन, डिजिटल अवसंरचना और उन्नत तकनीकों के लिए आवश्यक हैं। G20 ने इनकी विविधीकृत, सुरक्षित और लचीली मूल्य श्रृंखलाओं के लिए सूचना साझाकरण, अनुसंधान, नवाचार, निवेश, क्षमता निर्माण, पुनर्चक्रण और स्थानीय मूल्य संवर्धन में स्वैच्छिक सहयोग का समर्थन किया। भारत ने अपनी National Critical Mineral Mission तथा खनिजों की खोज से लेकर प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत एवं UPSC के लिए महत्व:
भारत के लिए यह सम्मेलन ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, जल सुरक्षा, अवसंरचना विकास और रणनीतिक खनिज सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। भारत ने सम्मेलन में सुरक्षित, किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा को विकासशील देशों के लिए आवश्यक बताया तथा अपने दीर्घकालिक Net Zero लक्ष्य 2070 को रेखांकित किया। UPSC में यह विषय International Relations, Energy Security, Climate Change, Sustainable Development, Critical Minerals, G20 और SDGs से जोड़ा जा सकता है। विशेष रूप से ध्यान रखें कि इन चारों परिणामों की प्रकृति स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी है; अतः ये सदस्य देशों पर किसी अंतरराष्ट्रीय संधि की तरह कानूनी बाध्यता नहीं डालते।