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H1N1 स्वाइन फ्लू में वृद्धि: इन्फ्लूएंजा वायरस, एंटीजेनिक ड्रिफ्ट और एंटीजेनिक शिफ्ट को समझें

Published 20 August 2026

H1N1 या स्वाइन फ्लू एक Influenza A वायरस है, जो श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और Orthomyxoviridae परिवार से संबंधित है। 12 अगस्त 2026 तक दिल्ली में H1N1 के 1,449 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 229 मामले थे। एंटीजेनिक ड्रिफ्ट छोटे और क्रमिक आनुवंशिक परिवर्तन हैं, जबकि एंटीजेनिक शिफ्ट अचानक बड़े परिवर्तन हैं जो नई महामारी का कारण बन सकते हैं। रोकथाम के लिए रोग निगरानी, समय पर निदान, संक्रमण नियंत्रण और उच्च जोखिम वाले समूहों की सुरक्षा तथा नियमित रूप से अपडेट किए गए इन्फ्लूएंजा टीके महत्वपूर्ण हैं।

H1N1, जिसे सामान्य रूप से स्वाइन फ्लू कहा जाता है, एक Influenza A वायरस है और यह श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। इन्फ्लूएंजा वायरस Orthomyxoviridae परिवार से संबंधित हैं। H1N1 नाम वायरस की सतह पर उपस्थित दो प्रमुख प्रोटीनों—Hemagglutinin (H1) और Neuraminidase (N1)—के आधार पर रखा गया है।

दिल्ली में मामलों में वृद्धि:

NCDC के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 12 अगस्त 2026 तक दिल्ली में H1N1 के 1,449 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 229 मामले थे। मामलों में यह वृद्धि मौसमी परिस्थितियों, जनसंख्या घनत्व, मानव संपर्क और वायरस में संभावित परिवर्तनों जैसे कारकों से संबंधित हो सकती है।

एंटीजेनिक ड्रिफ्ट (Antigenic Drift):

एंटीजेनिक ड्रिफ्ट वायरस के आनुवंशिक पदार्थ में होने वाले छोटे और क्रमिक उत्परिवर्तन हैं। इन परिवर्तनों के कारण वायरस के HA और NA सतह प्रोटीन में बदलाव हो सकता है। यही प्रक्रिया मौसमी इन्फ्लूएंजा के बार-बार होने वाले प्रकोपों और टीकों को नियमित रूप से अपडेट करने की आवश्यकता का प्रमुख कारण है।

एंटीजेनिक शिफ्ट (Antigenic Shift):

एंटीजेनिक शिफ्ट मुख्य रूप से Influenza A वायरस में होने वाला अचानक और बड़ा आनुवंशिक परिवर्तन है। इससे वायरस का एक नया उपप्रकार या सतही एंटीजन संयोजन उत्पन्न हो सकता है, जिसके विरुद्ध मानव आबादी में पहले से पर्याप्त प्रतिरक्षा नहीं होती। ऐसी स्थिति महामारी (Pandemic) का कारण बन सकती है। वर्ष 2009 का H1N1 प्रकोप इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य और रोकथाम:

H1N1 मुख्य रूप से श्वसन संक्रमण पैदा करता है। अधिकांश मामलों में संक्रमण हल्का हो सकता है, लेकिन बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों में गंभीर बीमारी का जोखिम अधिक होता है। रोकथाम के लिए निगरानी, समय पर निदान, संक्रमण नियंत्रण और जोखिम समूहों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। मौसमी इन्फ्लूएंजा टीकों को वायरस के बदलते स्वरूप के अनुसार नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

UPSC परीक्षा के लिए महत्त्व:

यह विषय GS Paper-III में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक स्वास्थ्य और महामारी प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही Antigenic Drift और Antigenic Shift, वायरस का उत्परिवर्तन, Zoonotic संक्रमण, महामारी की उत्पत्ति और One Health Approach जैसे विषय Prelims और Mains दोनों के लिए उपयोगी हैं।

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