ISRO-ESA सहयोग समझौता 2032 तक विस्तारित, मानव अंतरिक्ष अन्वेषण और अंतरिक्ष स्थिरता पर बढ़ेगा सहयोग
ISRO और European Space Agency (ESA) ने अपने दीर्घकालिक सहयोग समझौते को 8 जनवरी 2032 तक बढ़ाया, जिसका औपचारिक रूप 10 सितंबर 2026 को पेरिस में दिया गया। सहयोग में पृथ्वी अवलोकन, उपग्रह नेविगेशन, अंतरिक्ष विज्ञान, मानव एवं रोबोटिक अन्वेषण और मिशन संचालन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों एजेंसियाँ Space Weather के अध्ययन तथा उपग्रह डेटा के Calibration-Validation में भी सहयोग कर रही हैं, जिससे संचार और नेविगेशन प्रणालियों की सुरक्षा में सहायता मिलेगी। नए समझौते में Space Debris, Orbital Congestion और अंतरिक्ष स्थिरता जैसे मुद्दों को शामिल करते हुए बाह्य अंतरिक्ष के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया गया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने अपने दीर्घकालिक सहयोग समझौते को 8 जनवरी 2032 तक बढ़ाया है। इसका औपचारिक रूप 10 सितंबर 2026 को पेरिस में आयोजित International Space Summit के दौरान पत्रों के आदान-प्रदान के माध्यम से दिया गया। मूल Cooperative Agreement जनवरी 2002 में लागू हुआ था, इसलिए यह साझेदारी दो दशकों से अधिक पुरानी है।
सहयोग के दायरे का विस्तार:
नए समझौते में पहले से जारी पृथ्वी अवलोकन, उपग्रह नेविगेशन, अंतरिक्ष विज्ञान और मिशन संचालन सहायता जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ मानव एवं रोबोटिक अंतरिक्ष अन्वेषण, अंतरिक्ष मौसम और बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की स्थिरता को भी शामिल किया गया है। इससे दोनों एजेंसियों को बदलती अंतरिक्ष आवश्यकताओं और नई तकनीकी चुनौतियों पर संयुक्त रूप से काम करने का अवसर मिलेगा।
मानव एवं रोबोटिक अंतरिक्ष अन्वेषण:
मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में भारत और यूरोप के बीच सहयोग पहले से विकसित हो रहा है। 2025 में ISRO और ESA ने मानव अंतरिक्ष अन्वेषण पर Joint Statement of Intent पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें Low Earth Orbit में सहयोग तथा आगे चलकर चंद्र अन्वेषण की संभावनाओं पर ध्यान दिया गया। यह सहयोग अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण, मिशन संचालन, वैज्ञानिक प्रयोगों और अंतरिक्ष यान की interoperability जैसे क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है।
पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष मौसम:
पृथ्वी अवलोकन में दोनों एजेंसियां उपग्रह आधारित आंकड़ों की Calibration और Validation तथा वैज्ञानिक अध्ययनों पर भी सहयोग कर रही हैं। मार्च 2026 में इस उद्देश्य से एक अलग व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए गए थे। दूसरी ओर, Space Weather में सूर्य की गतिविधियों से उत्पन्न घटनाओं का अध्ययन शामिल है, जो उपग्रहों, संचार, नेविगेशन और अन्य अंतरिक्ष-आधारित प्रणालियों को प्रभावित कर सकती हैं।
बाह्य अंतरिक्ष की स्थिरता और जिम्मेदार उपयोग:
अंतरिक्ष गतिविधियों के बढ़ने के साथ space debris, orbital congestion, satellite safety और सुरक्षित अंतरिक्ष संचालन जैसी चुनौतियां महत्वपूर्ण हो रही हैं। नए सहयोग में outer space activities की sustainability को शामिल करना इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष के दीर्घकालिक, सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना है। सितंबर 2026 के International Space Summit में भी अंतरिक्ष स्थिरता, Low Earth Orbit की बढ़ती गतिविधियों और अंतरिक्ष सुरक्षा को प्रमुख विषयों के रूप में रखा गया था।
UPSC के लिए महत्व:
यह समाचार Science & Technology, International Relations, Space Diplomacy, Space Economy, Earth Observation, Space Weather और Global Space Governance से जुड़ा है। भारत के लिए ESA के साथ सहयोग वैज्ञानिक विशेषज्ञता, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरराष्ट्रीय मिशनों में क्षमता निर्माण का अवसर प्रदान करता है। व्यापक रूप से यह सहयोग इस तथ्य को दर्शाता है कि अत्यधिक जटिल और महंगे अंतरिक्ष मिशनों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, साझा वैज्ञानिक संसाधन और तकनीकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ISRO की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है; 2025-26 की ISRO वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत/ISRO ने अनेक देशों और बहुपक्षीय संस्थाओं के साथ अंतरिक्ष सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं।